चुनाव आयोग सख्त : यूपी में वोटर लिस्ट बनने तक SDM-DM समेत अफसरों के ट्रांसफर पर रोक, पीलीभीत में ERO और VRC ऑपरेटर हटाए

उत्तर प्रदेश में वोटर लिस्ट पुनरीक्षण पूरा होने तक SDM-DM, ERO-AERO समेत चुनावी अफसरों के तबादले पर रोक लगा दी गई है। वहीं पीलीभीत में वोटर लिस्ट गड़बड़ी पर ERO और VRC ऑपरेटर हटाए गए हैं, और पूरे प्रदेश में 2 दिन में जांच रिपोर्ट मांगी गई है। News Diary Today
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लखनऊ न्यूज़ | उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची को लेकर भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने दो बड़े और सख्त फैसले लिए हैं। एक तरफ जहां आयोग ने मतदाता सूची पुनरीक्षण (SSR-2027) के काम से जुड़े अधिकारियों के तबादलों पर रोक लगा दी है, वहीं दूसरी तरफ पीलीभीत सदर विधानसभा क्षेत्र में वोटर लिस्ट में गड़बड़ी पाए जाने पर संबंधित ERO और VRC ऑपरेटर को हटाकर उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) नवदीप रिणवा ने बुधवार को यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि आयोग का मकसद मतदाता सूची निर्माण की प्रक्रिया को बिना किसी रुकावट के पूरा करना और पारदर्शिता सुनिश्चित करना है।
वोटर लिस्ट पुनरीक्षण: 4 जनवरी 2027 तक अधिकारी नहीं हिलेंगे
निर्वाचन आयोग ने लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 13CC के तहत यह निर्देश जारी किया है। इसके अनुसार, विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण (SSR-2027) से जुड़े सभी अधिकारियों और कर्मचारियों का तबादला आयोग की पूर्व अनुमति के बिना नहीं किया जा सकेगा।
किन अधिकारियों पर रोक?
- · जिला निर्वाचन अधिकारी (DEO) — आमतौर पर जिलाधिकारी/DM
- · निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी (ERO)
- · सहायक निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी (AERO)
- · पुनरीक्षण कार्य से जुड़े अन्य अधिकारी और कर्मचारी
आयोग ने साफ किया है कि इन अधिकारियों के पदों को रिक्त नहीं रखा जाएगा, ताकि मतदाता सूची तैयार करने में कोई देरी न हो। यह रोक अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित होने तक प्रभावी रहेगी।
मतदाता सूची पुनरीक्षण का पूरा शेड्यूल

यानी, 4 जनवरी 2027 को अंतिम सूची आने तक इन अधिकारियों का तबादला नहीं होगा। आयोग का यह कदम चुनावी प्रक्रिया की शुचिता और निरंतरता बनाए रखने के लिए अहम माना जा रहा है।
पीलीभीत में वोटर लिस्ट गड़बड़ी: कांग्रेस ने लगाया था आरोप, जांच में हुई पुष्टि
पीलीभीत सदर विधानसभा क्षेत्र (संख्या 127) की मतदाता सूची में बड़ी अनियमितताओं का मामला सामने आया है। कांग्रेस पार्टी ने आरोप लगाया था कि यहां लगभग 13,150 मतदाताओं के नाम और पिता के नाम बदल दिए गए, जबकि उनका EPIC नंबर और सीरियल नंबर वही रहे। कुल मिलाकर करीब 16,554 प्रविष्टियों में गड़बड़ी का दावा किया गया था, जिसमें नाम बदलना, कुछ नाम हटाना और कुछ नए नाम जोड़ना शामिल था।
जांच में क्या निकला?
शिकायत मिलने के बाद CEO नवदीप रिणवा ने जिला निर्वाचन अधिकारी (DEO) पीलीभीत से जांच करवाई। प्रारंभिक जांच में यह बात पुष्टि हो गई कि कुछ मतदाताओं के EPIC नंबर ऑनलाइन सर्च करने पर किसी दूसरे मतदाता का विवरण प्रदर्शित हो रहा था। यह एक गंभीर त्रुटि थी, जिससे मतदाता सूची की विश्वसनीयता पर सवाल उठ सकते थे।
आयोग ने तुरंत की कार्रवाई:
- संबंधित ERO और VRC ऑपरेटर को मतदाता सूची संबंधी सभी कार्यों से तत्काल हटा दिया गया।
- दोनों के खिलाफ लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 32 और भारतीय न्याय संहिता के संबंधित प्रावधानों के तहत कानूनी कार्रवाई के आदेश दिए गए।
- उन्हें नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया है।
- मतदाता सूची में पाई गई सभी गड़बड़ियों को तुरंत सुधारने के निर्देश दिए गए।
पूरे प्रदेश के लिए अलर्ट
CEO ने सिर्फ पीलीभीत तक सीमित न रहते हुए, जिले की सभी विधानसभा सीटों और पूरे उत्तर प्रदेश के सभी DEO को निर्देश दिए हैं कि वे अपने-अपने क्षेत्र की मतदाता सूची की गहन जांच करें और 2 दिनों के अंदर रिपोर्ट जमा करें। इससे साफ है कि आयोग किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं करेगा।



