नोएडा PGICH को बड़ी सौगात : DM पीडियाट्रिक व नियोनेटल एनेस्थीसिया की 2 सीटों को मिली मंजूरी।

✍️ योगेश राणा

पीजीआई निदेशक प्रो. डॉ. अरुण कुमार सिंह की मेहनत लाई रंग, मुख्यमंत्री से मुलाकात के बाद मिली बड़ी उपलब्धि

न्यूज़ डायरी टुडे, नोएडा।

नोएडा स्थित Post Graduate Institute of Child Health(PGICH)के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि शासन ने DM पीडियाट्रिक और नियोनेटल एनेस्थीसिया के लिए 2 सीटों को मंजूरी दे दी है और यह निर्णय संस्थान के विकास और नोएडा के चिकित्सा बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। बता दें कि DM पीडियाट्रिक और नियोनेटल एनेस्थीसिया कोर्स के लिए कुल 2 सीटें स्वीकृत की गई हैं और हाल ही में,चाइल्ड पीजीआई के निदेशक प्रो.डॉ.अरुण कुमार सिंह ने लखनऊ में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात की थी और इस बैठक के दौरान उन्होंने संस्थान की शैक्षणिक क्षमताओं को बढ़ाने और सुपर-स्पेशियलिटी पाठ्यक्रमों को शुरू करने की मांग रखी थी,जिसे अब शासन की हरी झंडी मिल गई है और यह मंजूरी संस्थान को एक पूर्ण सुपर-स्पेशियलिटी केंद्र के रूप में विकसित करने में मदद करेगी,जिससे गंभीर रूप से बीमार बच्चों और नवजातों के ऑपरेशन के दौरान दी जाने वाली एनेस्थीसिया सेवाओं में और अधिक विशेषज्ञता आएगी और यह कदम नोएडा और आसपास के क्षेत्रों के मरीजों के लिए राहत की बात है क्योंकि अब यहाँ बाल चिकित्सा के क्षेत्र में और अधिक विशेषज्ञ डॉक्टर तैयार हो सकेंगे।

पीजीआई के निदेशक की मेहनत लाई रंग।

पीजीआई के निदेशक के साथ विभागाध्यक्ष डॉ.नीता राधा
कृष्णन ने भी हाल ही में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी से शिष्टाचार भेंट कर संस्थान की प्रगति पर चर्चा की थी और विस्तार की मांग पुरजोर तरीके से रखी थी और इन सीटों की मंजूरी से न केवल विशेषज्ञ डॉक्टरों की संख्या बढ़ेगी, बल्कि नोएडा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के गंभीर रूप से बीमार बच्चों को और भी बेहतर और सुरक्षित सर्जरी व उपचार की सुविधाएं मिल सकेंगी।

NMC से भी मिला चाइल्ड पीजीआई को मंजूरी।

राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) ने नोएडा स्थित चाइल्ड पीजीआई (Post Graduate Institute of Child Health – PGICH) को शैक्षणिक सत्र 2025-26 के लिए पीजी (स्नातकोत्तर) पाठ्यक्रमों में प्रवेश प्रक्रिया शुरू करने की महत्वपूर्ण अनुमति दे दी है और इस अनुमति के बाद संस्थान की शैक्षणिक गतिविधियों में विस्तार होगा और बाल चिकित्सा के क्षेत्र में विशेषज्ञों की संख्या बढ़ेगी।