एशिया का सबसे बड़ा एयरपोर्ट बनने की ओर जेवर, उद्घाटन पर पीएम मोदी का बड़ा बयान
न्यूज़ डायरी टुडे, नोएडा।
Noida: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज, 28 मार्च 2026 को उत्तर प्रदेश के जेवर में नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट (फेज-1) का भव्य उद्घाटन किया। लगभग ₹11,200 करोड़ की लागत से तैयार यह एयरपोर्ट पूर्ण होने पर एशिया का सबसे बड़ा और दुनिया का चौथा सबसे बड़ा हवाई अड्डा बन जाएगा। बता दें कि प्रधानमंत्री ने जेवर पहुंचकर पहले टर्मिनल भवन का निरीक्षण किया और फिर एक बटन दबाकर (रिमोट के जरिए) इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट के पहले चरण का लोकार्पण किया और उद्घाटन के दौरान पीएम मोदी ने बताया कि इस एयरपोर्ट से हर 2 मिनट में एक विमान उड़ान भरेगा। हालांकि, कमर्शियल उड़ानें अप्रैल के अंत या मई 2026 से शुरू होने की उम्मीद है और पहले चरण में यह एयरपोर्ट सालाना 1.2 करोड़ यात्रियों को संभालने में सक्षम है। साल 2040 तक सभी 4 चरण पूरे होने पर इसकी क्षमता सालाना 7 करोड़ यात्रियों तक पहुंच जाएगी और इस प्रोजेक्ट से पश्चिमी उत्तर प्रदेश (नोएडा, ग्रेटर नोएडा, आगरा, अलीगढ़) में निवेश बढ़ेगा और करीब 50,000 से अधिक नौकरियां पैदा होने का अनुमान है और कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, नागरिक उड्डयन मंत्री राममोहन नायडू और राज्यपाल आनंदीबेन पटेल सहित तमाम नेता भी मौजूद रहे।
जेवर एयरपोर्ट की खासियतें है!
यह एयरपोर्ट अत्याधुनिक सुविधाओं और भारतीय संस्कृति के अनूठे मिश्रण का प्रतीक है और यह एयरपोर्ट लगभग 5,000 हेक्टेयर (52 वर्ग किमी) में फैला हुआ है, जो इसे दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से भी बड़ा बनाता है और पहले चरण में इसकी क्षमता सालाना 1.2 करोड़ (12 मिलियन) यात्रियों की है, जिसे 2040 तक बढ़ाकर 7 करोड़ (70 मिलियन) करने का लक्ष्य है और फेज-1 में 3,900 मीटर लंबा रनवे तैयार किया गया है, जो बड़े ‘वाइड-बॉडी’ विमानों (जैसे बोइंग 777-300ER) को संभालने में सक्षम है और एयरपोर्ट पर डिजी यात्रा (Digi Yatra), सेल्फ बैगेज ड्रॉप और ऑटोमैटिक गेट जैसी सुविधाएं उपलब्ध हैं, जिससे यात्री बिना किसी लंबी कतार के प्रवेश कर सकेंगे और एयरपोर्ट का दावा है कि प्रवेश के बाद केवल 20 मिनट से भी कम समय में बोर्डिंग प्रक्रिया पूरी की जा सकेगी और यह एयरपोर्ट सड़क, रेल, मेट्रो और क्षेत्रीय परिवहन प्रणालियों से सीधे जुड़ा हुआ है। यमुना एक्सप्रेसवे के जरिए आगरा और मथुरा तक दो घंटे में पहुँचा जा सकता है और यह देश का पहला ‘नेट जीरो कार्बन एमिशन’ एयरपोर्ट है। इसकी 50% ऊर्जा सौर और पवन ऊर्जा से पूरी की जाएगी और टर्मिनल की वास्तुकला वृंदावन की कला-संस्कृति और वाराणसी के घाटों व हवेलियों से प्रेरित है, जो यात्रियों को भारतीय विरासत का अहसास कराती है और यह पूरी तरह से शून्य से निर्मित (Greenfield) परियोजना है, जिसका निर्माण ज्यूरिख एयरपोर्ट इंटरनेशनल एजी (Zurich Airport International AG) की सहायक कंपनी द्वारा किया गया है।