खाकी का मानवीय चेहरा: नोएडा स्टेडियम में दशहरा मेले में बिछड़े मासूम को ट्रैफिक इंस्पेक्टर संजय पाल ने अथक प्रयासों से माता-पिता से मिलाया।

नोएडा स्टेडियम में दशहरा मेले की भारी भीड़ में बिछड़ा मासूम रोता-बिलखता रह गया, लेकिन खाकी ने पिता की तरह उसे संभाला। ट्रैफिक इंस्पेक्टर संजय पाल ने लगभग एक घंटे की अथक मशक्कत के बाद बच्चे को उसके माता-पिता से सुरक्षित मिलाया। पढ़िए पूरी खबर News Diary Today पर।
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नोएडा न्यूज़ | सेक्टर-21 स्थित नोएडा स्टेडियम में आयोजित भव्य दशहरा पर्व के दौरान उस समय एक भावुक कर देने वाला नजारा सामने आया, जब भीड़ में अपनों से बिछड़े एक मासूम बच्चे को नोएडा पुलिस के एक अधिकारी ने अपनी सूझबूझ और अथक प्रयासों से सुरक्षित उसके परिजनों तक पहुंचा दिया। इस सराहनीय और मानवीय कार्य के बाद हर तरफ ट्रैफिक इंस्पेक्टर संजय पाल और उनकी टीम की तारीफ हो रही है।
रावण दहन देखने उमड़ी थी हजारों की भीड़
बता दें कि अश्विन मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को नोएडा स्टेडियम में रावण दहन का कार्यक्रम चल रहा था। बुराई पर अच्छाई की जीत का जश्न देखने के लिए हजारों की संख्या में लोग उमड़े थे। इसी भारी भीड़ और चकाचौंध के बीच एक छोटा बच्चा अचानक अपने माता-पिता की उंगली छोड़कर कहीं आगे निकल गया और भीड़ में खो गया।
कुछ ही देर में जब बच्चे को अपने आसपास माता-पिता नहीं दिखे, तो वह घबरा गया और रोने लगा। मेले के शोर-शराबे में उसकी सिसकियां दब रही थीं, और वह बदहवास इधर-उधर दौड़ रहा था।
ट्रैफिक इंस्पेक्टर की नजर पड़ी रोते बच्चे पर

उसी दौरान वहां सुरक्षा और यातायात व्यवस्था संभाल रहे यातायात निरीक्षक (ट्रैफिक इंस्पेक्टर) संजय पाल की नजर उस रोते हुए बच्चे पर पड़ी। बच्चे को अकेला और परेशान देखकर उन्होंने तुरंत उसके पास जाकर उसे अपनी गोद में उठा लिया।
संजय पाल ने पहले एक पिता की तरह बच्चे को दुलारा, उसे पानी पिलाया और उसका हौसला बढ़ाया ताकि वह शांत हो सके। बच्चा इतना डरा हुआ था कि वह अपने घर का पता या माता-पिता का मोबाइल नंबर भी ठीक से नहीं बता पा रहा था।
लाउडस्पीकर से अनाउंसमेंट, गेटों पर अलर्ट
ट्रैफिक इंस्पेक्टर संजय पाल ने बिना समय गंवाए तुरंत एक्शन लिया। उन्होंने तत्काल लाउडस्पीकर और उद्घोषणा प्रणाली (अनाउंसमेंट सिस्टम) का सहारा लिया। इसके साथ ही उन्होंने स्टेडियम के एंट्री और एग्जिट गेटों पर तैनात अन्य पुलिसकर्मियों को भी अलर्ट किया। संजय पाल खुद बच्चे को साथ लेकर मेले के अलग-अलग कोनों में उसके माता-पिता की तलाश में जुट गए।
उधर, बच्चे के माता-पिता भी अपने कलेजे के टुकड़े को गायब देखकर बदहवास हालत में उसे ढूंढ रहे थे और उनका रो-रोकर बुरा हाल था। लगभग एक घंटे की कड़ी मशक्कत और अथक प्रयासों के बाद, अनाउंसमेंट सुनकर रोते-बिलखते माता-पिता उस जगह पहुंचे जहां संजय पाल बच्चे को संभाल रहे थे।
आंखों में खुशी के आंसू, खाकी को मिला सलाम
जैसे ही बच्चे ने अपने माता-पिता को देखा, वह दौड़कर उनके गले लग गया। अपने खोए हुए बच्चे को सही-सलामत वापस पाकर माता-पिता की आंखों से खुशी के आंसू छलक पड़े। उन्होंने ट्रैफिक इंस्पेक्टर संजय पाल के पैर छूकर उनका आभार व्यक्त किया और कहा कि आज पुलिस ने उनके घर का चिराग बुझने से बचा लिया।
इस मार्मिक दृश्य को देखकर वहां मौजूद आम जनता ने भी तालियां बजाकर पुलिस की इस मुस्तैदी और मानवीय चेहरे का स्वागत किया। इस घटना ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि पुलिस का काम सिर्फ कानून व्यवस्था संभालना ही नहीं, बल्कि संकट की घड़ी में जनता का सबसे भरोसेमंद साथी बनना भी है। संजय पाल के इस कार्य की उच्चाधिकारियों ने भी सराहना की है।



