✍️ योगेश राणा
इलाहाबाद हाईकोर्ट : ललितपुर के बहुचर्चित अवैध हिरासत मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश पुलिस की कार्यप्रणाली पर सख्त नाराजगी जताते हुए ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। बता दें कि हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को आदेश दिया है कि पीड़ित (राशिद) को अवैध हिरासत के लिए ₹1 लाख का मुआवजा दिया जाए और यह राशि दोषी पुलिस अधिकारियों (SHO और विवेचक) के वेतन से वसूलने का भी निर्देश दिया गया है और अदालत ने संबंधित थाना प्रभारी (SHO) और विवेचक (IO) को “कोर्ट उठने तक”(हिरासत में खड़े रहने) की सजा सुनाई और पीड़ित राशिद को 14 सितंबर को हिरासत में लिया गया था,लेकिन पुलिस ने उसकी गिरफ्तारी 17 सितंबर को दिखाई (2 दिन की अवैध हिरासत) और पुलिस अदालत के आदेश के बावजूद थाने के CCTV फुटेज पेश नहीं कर सकी। पुलिस ने तर्क दिया कि स्टोरेज क्षमता कम होने के कारण रिकॉर्डिंग स्वतः डिलीट हो गई,जिसे कोर्ट ने न्यायिक आदेशों की अवहेलना माना।
हाईकोर्ट के महत्वपूर्ण निर्देश-?
अब थानों में सीसीटीवी फुटेज को कम से कम 6 महीने तक सुरक्षित रखना अनिवार्य होगा और जिला न्यायिक अधिकारियों को पुलिस थानों का औचक निरीक्षण करने का अधिकार दिया गया है और जिला स्तर पर हिरासत में हिंसा या अवैध बंदी के मामलों की सुनवाई के लिए मानवाधिकार न्यायालयों की स्थापना के निर्देश दिए गए हैं।
क्या था पूरा मामला:-
यह मामला ललितपुर कोतवाली में बजाज फाइनेंस लिमिटेड के साथ हुई लोन धोखाधड़ी (करीब ₹1.71 करोड़ का फ्रॉड) से जुड़ा है।