पद्मश्री से सम्मानित स्टैच्यू ऑफ यूनिटी के शिल्पकार राम सुतार नहीं रहे।

✍️ योगेश राणा

:- नोएडा के सेक्टर-19 स्थित आवास पर ली अंतिम सांस, आज सेक्टर-94 में होगा अंतिम संस्कार

न्यूज़ डायरी,नोएडा।

विश्वविख्यात एवं पद्मश्री से सम्मानित महान मूर्तिकार राम सुतार का बुधवार देर रात निधन हो गया। उन्होंने नोएडा के सेक्टर-19 स्थित अपने निज निवास पर अंतिम सांस ली। उनके निधन की सूचना मिलते ही भारत सहित विदेशों में कला, संस्कृति और मूर्तिकारिता से जुड़े लोगों में गहरा शोक व्याप्त हो गया। देश-विदेश के नेताओं, कलाकारों, बुद्धिजीवियों और सामाजिक संगठनों ने उनके निधन को अपूरणीय क्षति बताते हुए श्रद्धांजलि अर्पित की है।

राम सुतार का अंतिम संस्कार आज नोएडा के सेक्टर-94 स्थित अंतिम निवास पर पूरे राजकीय सम्मान के साथ संपन्न होगा। संभावित भारी भीड़ को देखते हुए जिला प्रशासन और पुलिस प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है, ताकि अंतिम यात्रा शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो सके।

भारत की पहचान को दी पत्थरों में अमरता

राम सुतार ने केवल मूर्तियां नहीं गढ़ीं, बल्कि भारत के गौरव, इतिहास और सांस्कृतिक चेतना को आकार दिया। उनकी कृतियां देश की सीमाओं से बाहर भी भारतीय कला की पहचान बन चुकी हैं। गुजरात में स्थापित 182 मीटर ऊंची स्टैच्यू ऑफ यूनिटी (सरदार वल्लभ भाई पटेल) उनकी सबसे ऐतिहासिक और विश्वविख्यात रचना मानी जाती है।

इसके अलावा महात्मा गांधी की ध्यानमग्न मूर्तियां (गांधीनगर), संसद भवन परिसर में सरदार पटेल की प्रतिमा, अमृतसर में महाराजा रणजीत सिंह की भव्य मूर्ति, जम्मू में डॉ. भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा, पूर्व राष्ट्रपति शंकर दयाल शर्मा की आवक्ष प्रतिमा तथा अयोध्या राम मंदिर में स्थापित राम प्रतिमा उनकी अद्भुत कलात्मक क्षमता का प्रमाण हैं।

साधारण परिवार से असाधारण शिखर तक

राम सुतार का जन्म 19 फरवरी 1925 को महाराष्ट्र के धूलिया जिले के गोंदुर गांव में एक साधारण सुतार परिवार में हुआ था। बचपन से ही कला के प्रति रुचि रखने वाले राम सुतार ने अपनी प्रतिभा के बल पर 1953 में मुंबई के प्रतिष्ठित जे.जे. स्कूल ऑफ आर्ट से मॉडलिंग में मेयो गोल्ड मेडल प्राप्त किया।

1954 से 1958 तक उन्होंने औरंगाबाद स्थित अजन्ता और एलोरा की प्राचीन गुफाओं में मूर्तियों के पुनर्स्थापन का महत्वपूर्ण कार्य किया। वर्ष 1959 में सरकारी नौकरी छोड़कर उन्होंने पूर्णकालिक पेशेवर मूर्तिकार बनने का साहसिक निर्णय लिया और बाद में नोएडा में अपने परिवार के साथ निवास करने लगे।

युग का अंत, विरासत अमर

राम सुतार का निधन भारतीय कला जगत के एक स्वर्णिम युग के अंत के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि वे आज हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनकी रचनाएं सदियों तक उन्हें जीवित रखेंगी। देश की आने वाली पीढ़ियां उनकी मूर्तियों के माध्यम से भारत के इतिहास, संस्कृति और आत्मगौरव को महसूस करती रहेंगी।