✍️ योगेश राणा
Court.of.law: नोएडा सेक्टर-150 में सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की मौत के मामले में मंगलवार को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट(CJM)की अदालत में हुई सुनवाई। बता दें कि अदालत ने लोटस ग्रीन बिल्डर से जुड़े आरोपी रवि बंसल और सचिन करनवाल की न्यायिक हिरासत 29 जनवरी 2026 तक बढ़ा दी है और एमजेड विजटाउन बिल्डर कंपनी के डायरेक्टर अभय कुमार की न्यायिक हिरासत 2 फरवरी 2026 तक बढ़ाई गई है और अदालत ने विवेचना (जांच) में ढिलाई और लापरवाही बरतने पर जांच अधिकारी (विवेचक) को कड़ी फटकार लगाई।
कोर्ट में बिल्डरों के वकीलों की दलील,सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन नहीं हुआ पालन!
लोटस ग्रीन बिल्डर के वकीलों ने कोर्ट में तर्क दिया कि गिरफ्तार किए गए रवि बंसल और सचिन करनवाल कंपनी के डायरेक्टर नहीं, बल्कि महज एक वेतनभोगी कर्मचारी और जूनियर स्टाफ (मुनीम) हैं और अधिवक्ताओं ने आरोप लगाया कि पुलिस ने प्रशासनिक दबाव में बिना गहन जांच के यह गिरफ्तारियां कीं और सुप्रीम कोर्ट की गिरफ्तारी संबंधी गाइडलाइनों (जैसे अर्नश कुमार बनाम बिहार राज्य) का उल्लंघन किया गया है और अदालत को 500 पेज की रिपोर्ट सौंपते हुए बताया गया कि घटनास्थल पर जलभराव की स्थिति 2021 से बनी हुई थी, जिसकी सूचना नोएडा प्राधिकरण को दी गई थी और मरम्मत के लिए फंड भी स्वीकृत हुआ था, लेकिन कार्य नहीं कराया गया।
अगली सुनवाई 29 जनवरी 2026 को
अदालत ने लोटस ग्रीन से जुड़े दोनों आरोपियों की अगली सुनवाई की तारीख 29 जनवरी 2026 तय करते हुए उनकी न्यायिक हिरासत दो दिन के लिए बढ़ा दी। वहीं, एमजेड विजटाउन बिल्डर कंपनी के डायरेक्टर अभय कुमार के मामले में भी उनके अधिवक्ताओं ने गिरफ्तारी प्रक्रिया में नियमों के उल्लंघन का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि गिरफ्तारी के दौरान कानूनी प्रावधानों और सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन का पालन नहीं किया गया। इस पर अदालत ने उनकी न्यायिक हिरासत 2 फरवरी 2026 तक बढ़ाते हुए अगली सुनवाई की तारीख तय की।सीजेएम ने आदेश में कहा कि अगली तारीख पर विवेचक को पूरी फाइल, सभी दस्तावेजों के अध्ययन और तथ्यों के साथ अदालत में उपस्थित होना होगा। पुलिस को निर्देश दिया गया है कि वह दो दिन के भीतर अपनी रिपोर्ट में अब तक की गई जांच और आरोपियों की भूमिका को स्पष्ट रूप से दर्ज करे, ताकि यह तय किया जा सके कि किस स्तर पर लापरवाही या आपराधिक कृत्य हुआ है।