न्यूज़ डायरी टुडे,नई दिल्ली।
अभिनेता राजपाल यादव से जुड़े चर्चित वित्तीय विवाद मामले में दिल्ली उच्च न्यायालय ने अगली सुनवाई गुरुवार, 12 फरवरी 2026 के लिए निर्धारित की है। राजपाल यादव ने अब अपना पक्ष मजबूती से रखने के लिए सौरभ त्रिवेदी लॉ फर्म को नियुक्त किया है। 7 फरवरी को हुई सुनवाई के दौरान उनके पूर्व वकीलों ने स्वयं को इस मामले से अलग कर लिया था, जिसके बाद नए अधिवक्ता ने केस के अध्ययन और आगे की रणनीति तय करने के लिए अदालत से समय मांगा। न्यायालय ने यह अनुरोध स्वीकार करते हुए सुनवाई की अगली तारीख तय की। माना जा रहा है कि 12 फरवरी को होने वाली सुनवाई में राजपाल यादव की जमानत पर अहम चर्चा हो सकती है, जो उनके फिल्मी करियर और निर्माताओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
क्या है पूरा मामला?
गौरतलब है कि माननीय दिल्ली उच्च न्यायालय के कड़े रुख के बाद राजपाल यादव ने 5 फरवरी 2026 की शाम लगभग 4 बजे तिहाड़ जेल में आत्मसमर्पण कर दिया था। इससे पहले अदालत ने उनकी आत्मसमर्पण की समयसीमा बढ़ाने संबंधी याचिका को खारिज करते हुए स्पष्ट टिप्पणी की थी कि “कानून आज्ञाकारिता को पुरस्कृत करता है, अवमानना को नहीं।”
यह पूरा मामला वर्ष 2010 में बनी फिल्म ‘अता पता लापता’ के निर्माण से जुड़ा है। आरोप है कि फिल्म के लिए मुरली प्रोजेक्ट्स प्रा. लि. से ली गई धनराशि को लेकर विवाद उत्पन्न हुआ। राजपाल यादव का कहना है कि यह राशि निवेश (इन्वेस्टमेंट) थी, जबकि शिकायतकर्ता कंपनी का दावा है कि यह ऋण (लोन) था, जिसे वापस नहीं किया गया। इस दौरान राजपाल यादव द्वारा जारी किए गए कई चेक भी बाउंस हो गए, जिसके बाद वर्ष 2018 में एक निचली अदालत ने उन्हें छह महीने की सजा सुनाई थी।
बाद में जून 2024 में दिल्ली उच्च न्यायालय ने उन्हें अस्थायी राहत देते हुए सजा पर रोक लगा दी थी, ताकि दोनों पक्ष आपसी समझौते के जरिए विवाद का निपटारा कर सकें। हालांकि, अदालत के अनुसार बार-बार दिए गए आश्वासनों के बावजूद बकाया राशि—जो लगभग 9 करोड़ रुपये बताई जा रही है—का भुगतान नहीं किया गया। इसी के चलते अब अदालत ने सख्त रुख अपनाते हुए उन्हें जेल भेजने का आदेश दिया।
फिलहाल राजपाल यादव की कई बड़ी फिल्में इस कानूनी पेंच के चलते अधर में लटकी हुई हैं, जिन पर करोड़ों रुपये का निवेश दांव पर लगा है। ऐसे में 12 फरवरी को होने वाली सुनवाई न सिर्फ अभिनेता के भविष्य, बल्कि फिल्म इंडस्ट्री के कई निर्माताओं के लिए भी निर्णायक साबित हो सकती है।