नोएडा में बड़ा साइबर फ्रॉड खुलासा : CBI अधिकारी बनकर ₹2.20 करोड़ की ठगी, 2 गिरफ्तार।

✍️ योगेश राणा।

Noida : नोएडा थाना साइबर क्राइम पुलिस को साइबर अपराधियों के खिलाफ चल रहे अभियान में एक बड़ी सफलता हाथ लगी है। पुलिस ने ‘डिजिटल अरेस्ट’ और सीबीआई (CBI) के नाम पर करोड़ों की ठगी करने वाले दो शातिर वांछित अभियुक्तों को गिरफ्तार किया है।बता दें कि पुलिस टीम ने सटीक सूचना के आधार पर दबिश देकर दो आरोपियों नरेन्द्र सिंह पुत्र राम सनेही एवं इन्द्रेश पुत्र ज्ञान सिंह को गिरफ्तार किया है और पुलिस टीम ने इन अभियुक्तों के कब्जे से घटना में इस्तेमाल किए गए 02 मोबाइल फोन भी बरामद किए गए हैं।

ठगी का तरीका (Modus Operandi)

अभियुक्तों ने एक पीड़ित को फर्जी अधिकारी बनकर फोन किया और यह डराया कि उनके विरुद्ध CBI द्वारा जांच की जा रही है। गिरफ्तारी का भय दिखाकर उन्होंने पीड़ित से कुल 1,29,61,962 रुपये की ठगी की, जिसमें से करीब 48.95 लाख रुपये सीधे इन अभियुक्तों के खातों में पहुंचे थे और पुलिस जांच में सामने आया कि यह गैंग केवल यूपी तक सीमित नहीं था। अभियुक्तों के संयुक्त बैंक खातों के विरुद्ध पूरे भारत में कुल 08 शिकायतें दर्ज हैं और इन सभी शिकायतों को मिलाकर आरोपियों ने अब तक करीब 2 करोड़ 20 लाख रुपये की धोखाधड़ी को अंजाम दिया है। इन आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता और आईटी एक्ट की धारा 66D के तहत कार्रवाई की गई है। इस गैंग के दो अन्य साथियों को पुलिस पहले ही गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी है।

डीसीपी साइबर क्राइम ने क्या कुछ बताया!

नोएडा साइबर क्राइम डीसीपी (DCP) शैव्या गोयल ने बताया कि पुलिस टीम ने डिजिटल अरेस्ट और CBI के नाम पर ठगी करने वाले गिरोह के दो वांछित अपराधियों, नरेन्द्र सिंह और इन्द्रेश को आगरा और भिंड (मप्र) से सफलता पूर्वक गिरफ्तार किया है और अभियुक्त पीड़ित को नकली सीबीआई अधिकारी बनकर डराते थे और उन्हें ‘डिजिटल अरेस्ट’ का झांसा देकर करोड़ों रुपये ऐंठते थे। इस मामले में पीड़ित से करीब ₹1.29 करोड़ की ठगी की गई थी और जांच में पाया गया कि इन अपराधियों के बैंक खातों के खिलाफ भारत के 8 अलग-अलग राज्यों (जैसे उत्तर प्रदेश, कर्नाटक, तमिलनाडु, दिल्ली, गुजरात आदि) में शिकायतें दर्ज हैं, जिसमें कुल ₹2.20 करोड़ की धोखाधड़ी का मामला सामने आया है और पुलिस ने अभियुक्तों के पास से घटना में प्रयुक्त 02 मोबाइल फोन बरामद किए हैं और गैंग के अन्य सदस्यों की तलाश जारी है और उन्होंने नागरिकों को सतर्क रहने की सलाह दी और स्पष्ट किया कि सरकारी एजेंसियां कभी भी वीडियो कॉल के माध्यम से किसी को ‘डिजिटल अरेस्ट’ नहीं करती हैं।