“हिंदू एकता ही राष्ट्र की असली शक्ति” — ज्योतिर्मानंद महाराज
पूर्वी दिल्ली के जी.टी.बी. एनक्लेव में आयोजित विराट हिंदू सम्मेलन हिंदू समाज में बढ़ती सांस्कृतिक चेतना और सामाजिक एकता का सशक्त प्रतीक बनकर सामने आया। सम्मेलन में बड़ी संख्या में लोगों की उपस्थिति इस बात का प्रमाण रही कि आज का हिंदू समाज अपनी परंपरा, संस्कृति और मूल्यों की रक्षा को लेकर पहले से अधिक जागरूक और संगठित हो रहा है। आयोजन स्थल ‘एक भारत–एक हिंदू’ के नारों, वैदिक मंत्रोच्चार और राष्ट्रबोध से ओतप्रोत वातावरण से गूंजता रहा।
“हिंदू एकता ही राष्ट्र की वास्तविक शक्ति”
अखंड परमधाम से पधारे महामंडलेश्वर ज्योतिर्मानंद महाराज जी ने अपने ओजस्वी संबोधन में कहा कि हिंदू समाज की एकता ही राष्ट्र की वास्तविक शक्ति है। उन्होंने कहा कि वेद, पुराण और शास्त्र केवल धार्मिक ग्रंथ नहीं हैं, बल्कि वे मानवता को शांति, सह-अस्तित्व और संतुलन का मार्ग दिखाते हैं। महाराज जी ने प्रकृति, जल, वायु और वृक्षों की पूजा को हिंदू संस्कृति की वैज्ञानिक सोच का प्रमाण बताते हुए कहा कि हिंदू जीवन पद्धति स्वयं पर्यावरण संरक्षण का संदेश देती है, जिसकी आज पूरी दुनिया को आवश्यकता है।
स्वदेशी और आत्मनिर्भर भारत का लिया गया संकल्प
सम्मेलन के दौरान वक्ताओं ने स्वदेशी अपनाने और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण का आह्वान किया। इस अवसर पर गौ-रक्षा, प्राकृतिक योग चिकित्सा तथा भारतीय जीवन शैली को अपनाने पर विशेष जोर दिया गया। वक्ताओं ने कहा कि सांस्कृतिक आत्मनिर्भरता के बिना राष्ट्र का सर्वांगीण विकास संभव नहीं है।
बी. एस. वर्मा के संचालन में अनुशासित और प्रभावी आयोजन
कार्यक्रम का मंच संचालन बी. एस. वर्मा ने किया। उनके संतुलित, संयमित और प्रभावशाली संचालन ने पूरे आयोजन को गरिमा प्रदान की। वक्ताओं के विचारों को क्रमबद्ध और स्पष्ट रूप से प्रस्तुत किए जाने से सम्मेलन अपने उद्देश्य और संदेश को प्रभावी ढंग से जनमानस तक पहुंचाने में सफल रहा।
“संस्कृति बचेगी, तभी राष्ट्र बचेगा”
सम्मेलन में निगम पार्षद वीर सिंह पंवार, चौधरी अजीत सिंह और हरीश रावत ने कहा कि हिंदू संस्कृति केवल आस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि यह जीवन का अनुशासन है। उन्होंने समाज से जाति, वर्ग और क्षेत्रीय भेदभाव से ऊपर उठकर हिंदू एकता के सूत्र में बंधने का आह्वान किया और कहा कि संगठित समाज ही राष्ट्र को मजबूत बना सकता है।
वेदों से विश्व शांति और प्रकृति संरक्षण का संदेश
विष्णु पंडित, राजनाथ तिवारी और केदार सिंह चौहान ने वैदिक मंत्रों के साथ विश्व शांति, प्रकृति संरक्षण और भारत माता की आराधना का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि अनेकता में एकता ही हिंदू समाज की सबसे बड़ी शक्ति है और यही भारत की पहचान भी है।
समाजसेवियों और कार्यकर्ताओं की सक्रिय भूमिका
सम्मेलन को सफल बनाने में नवीन शर्मा, कमलेश शर्मा, सुनील शर्मा, दीपक गुप्ता और राम संजीवन शुक्ला की सक्रिय भूमिका रही। उन्होंने इसे हिंदुत्व की वैचारिक जागरूकता का महत्वपूर्ण कदम बताते हुए भविष्य में ऐसे आयोजनों को और व्यापक स्तर पर आयोजित करने की आवश्यकता जताई।
युवा शक्ति से राष्ट्र निर्माण का आह्वान
दीपक सागर, पंकज बालियान और शैंकी खुराना ने युवाओं से संस्कृति, राष्ट्र और धर्म के प्रति जागरूक रहने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि आज का युवा ही हिंदू समाज की सबसे बड़ी ताकत है और वही भविष्य में संस्कृति और राष्ट्र का प्रहरी बनेगा।
सम्मेलन के समापन पर ‘भारत माता की जय’ और ‘हिंदू एकता अमर रहे’ के नारों से वातावरण गूंज उठा। यह आयोजन केवल एक धार्मिक कार्यक्रम नहीं रहा, बल्कि सांस्कृतिक चेतना, सामाजिक एकता और राष्ट्रबोध का एक विराट उत्सव बनकर उभरा, जिसने हिंदू समाज की बढ़ती जागरूकता और संगठित शक्ति को स्पष्ट रूप से रेखांकित किया।