बिना विवाद बना एशिया का सबसे बड़ा एयरपोर्ट, धीरेंद्र सिंह का कमाल
Special story : आज हर जगह जेवर एयरपोर्ट की बात हो रही है और हो भी क्यों ना एशिया का सबसे बड़ा एयरपोर्ट है और भविष्य में उत्तर प्रदेश की आर्थिक नीति का महत्वपूर्ण हिस्सा भी होगा लेकिन इन सब के बीच एक और नाम के चर्चा हो रही है वह नाम है विधायक धीरेंद्र सिंह का क्यों हो रही है यह समझना जरूरी है। जेवर एयरपोर्ट के लिए हजारों एकड़ जमीन का अधिग्रहण करना किसी चुनौती से कम नहीं था। भट्टा-पारसोल कांड के इतिहास को देखते हुए किसानों में डर और अविश्वास था और धीरेंद्र सिंह ने एक विधायक की गरिमा से ऊपर उठकर एक ‘बेटे’ और ‘भाई’ के रूप में गांव-गांव जाकर चौपालें लगाईं। उन्होंने किसानों को डराने के बजाय उन्हें भविष्य के विकास का सपना दिखाया और जब अधिग्रहण को लेकर गतिरोध पैदा हुआ, तो धीरेंद्र सिंह ने ‘पदयात्रा’ शुरू की। उन्होंने खेतों में बैठकर किसानों के साथ खाना खाया और उनकी शंकाओं को दूर किया। उनकी सबसे बड़ी उपलब्धि यह रही कि उन्होंने बिना किसी बड़े विवाद या पुलिसिया बल के किसानों को राजी कर लिया और किसानों की उचित मुआवजे और पुनर्वास की मांग को लेकर धीरेंद्र सिंह ने सीधे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात करवाई। उन्होंने सुनिश्चित किया कि किसानों की हर जायज मांग को नीति में शामिल किया जाए। मुख्यमंत्री का उन पर अटूट विश्वास ही था कि इस परियोजना को इतनी तेजी से मंजूरी मिली और आज गूगल पर धीरेंद्र सिंह का नाम इसलिए ट्रेंड कर रहा है क्योंकि लोग विकास के उस ‘मॉडल’ की सराहना कर रहे हैं जहाँ नेता जनता के बीच रहकर काम करता है। स्थानीय लोगों का मानना है कि अगर धीरेंद्र सिंह बीच में न होते, तो शायद जमीन अधिग्रहण इतना सुगम नहीं होता और यह सच है कि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के ड्रीम प्रोजेक्ट ‘जेवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट’ (Noida International Airport) को हकीकत में बदलने का श्रेय जहां सरकार की इच्छाशक्ति को जाता है, वहीं जमीन पर इसे मुमकिन बनाने वाले ‘असली हीरो’ के रूप में स्थानीय विधायक धीरेंद्र सिंह का नाम उभरकर सामने आया है और स्थानीय ग्रामीणों का कहना है, “विधायक जी ने हमें यह अहसास कराया कि यह एयरपोर्ट हमारी जमीन छीनने नहीं, बल्कि हमारी आने वाली पीढ़ियों की किस्मत बदलने आ रहा है और धीरेंद्र सिंह ने राजनीति में एक नई मिसाल पेश की है कि कैसे बड़ी से बड़ी विकास परियोजनाओं को जन-भागीदारी के साथ पूरा किया जा सकता है। जेवर एयरपोर्ट की हर उड़ान में उनकी मेहनत का अक्स साफ नजर आएगा।
भविष्य की आर्थिक नीति का आधार!
जेवर एयरपोर्ट केवल एक हवाई अड्डा नहीं है,बल्कि यह उत्तर प्रदेश को 1 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने का इंजन है। इसके आसपास बन रहे फिल्म सिटी, मेडिकल डिवाइस पार्क और इंडस्ट्रियल कॉरिडोर ने जेवर की पूरी तस्वीर बदल दी है। इस औद्योगिक क्रांति का श्रेय धीरेंद्र सिंह के उस शुरुआती निवेश (मेहनत) को जाता है, जो उन्होंने किसानों का दिल जीतने में किया।