न्यूज़ डायरी टुडे
कैसरगंज सांसद करण भूषण सिंह ने हाल ही में सोशल मीडिया पर एक आधिकारिक बयान जारी कर यूजीसी रेगुलेशन 2026 से जुड़े विवादों पर अपनी स्थिति स्पष्ट की है और सांसद ने स्पष्ट किया कि जिस संसदीय स्टैंडिंग कमेटी (Standing Committee on Education) के वे सदस्य हैं,उसका इन नियमों के निर्माण में कोई योगदान नहीं था और सोशल मीडिया और कुछ समाचार चैनलों पर चल रहे “दुष्प्रचार”को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि उनका पक्ष जाने बिना उनके खिलाफ कैंपेन चलाया जा रहा है और सिंह ने जोर देकर कहा कि वे शिक्षण संस्थानों को जातिगत युद्ध का केंद्र नहीं बनने देंगे और समाज में जाति आधारित वैमनस्यता को रोकने के लिए प्रतिबद्ध हैं और उन्होंने यूजीसी से इन नियमों पर पुनर्विचार करने और जनभावनाओं का सम्मान करते हुए आवश्यक सुधार करने की अपील की है।
विवाद का मुख्य कारण :
विवाद यूजीसी के उस नए नियम को लेकर है जिसमें उच्च शिक्षण संस्थानों में ‘इक्विटी कमेटी’ बनाना अनिवार्य किया गया है। सामान्य वर्ग के छात्रों और कुछ सामाजिक समूहों का तर्क है कि ये नियम एकपक्षीय हैं और कैंपस में जातिगत तनाव बढ़ा सकते हैं। केंद्र सरकार ने भी स्पष्ट किया है कि संविधान के दायरे में रहकर ही व्यवस्था की जाएगी और किसी के साथ भेदभाव नहीं होने दिया जाएगा और इस बीच, सुप्रीम कोर्ट ने इन नियमों (Promotion of Equity in Higher Education Institutions Regulations, 2026) पर अंतरिम रोक (Stay) लगा दी है। कोर्ट ने माना कि नियमों के कुछ प्रावधान अस्पष्ट हैं और उनके दुरुपयोग की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।