✍️ योगेश राणा।
न्यूज़ डायरी टुडे।
Lucknow/Noida: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई उत्तर प्रदेश कैबिनेट की बैठक में नोएडा को महानगर निगम (Metropolitan Corporation) बनाने के प्रस्ताव पर महत्वपूर्ण चर्चा हुई लेकिन नोएडा वासियों को झटका देते हुए राज्य सरकार ने इस प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया है और कैबिनेट ने नोएडा (न्यू ओखला औद्योगिक विकास प्राधिकरण)को महानगर निगम में बदलने के प्रस्ताव को खारिज कर दिया है। इसे यथावत (Industrial Authority) रखने का निर्णय लिया बता दें कि यह प्रस्ताव एक विशेष जांच दल (SIT) की सिफारिशों और सुप्रीम कोर्ट के उन सुझावों के बाद लाया गया था,जिसमें नोएडा के निवासियों के लिए अधिक नागरिक-केंद्रित बनाने की बात कही गई थी।
नोएडा को नगर निगम में बदलने में क्या है कानूनी अड़चनें!
औद्योगिक विकास विभाग का तर्क था कि नोएडा विदेशी निवेश का प्रमुख केंद्र है। इसे निगम में बदलने से राज्य की निवेश नीतियों और औद्योगिक विकास पर विपरीत असर पड़ सकता है और न्याय विभाग ने राय दी कि ‘उत्तर प्रदेश औद्योगिक क्षेत्र विकास अधिनियम-1976’ के मौजूदा नियमों के तहत वर्तमान ढांचे में नोएडा में महानगर निगम की स्थापना नहीं की जा सकती हैं और इसी को ध्यान में रखते हुए फिलहाल प्रस्ताव को टाल दिया है।
नोएडा नगर निगम बनाने के लिए मुख्य चुनौतियां
कानूनी अड़चनें: नोएडा का गठन 1976 के यूपी इंडस्ट्रियल एरिया डेवलपमेंट एक्ट के तहत हुआ है, न कि नगर निगम अधिनियम के तहत। इसे बदलने के लिए विशेष कानूनी संशोधन या निर्णय की आवश्यकता है।
अधिकार क्षेत्र (Jurisdiction): यदि नगर निगम बनता है, तो मौजूदा नोएडा अथॉरिटी के नागरिक कार्यों (जैसे- सड़क, सीवर, पार्क, स्ट्रीट लाइट) का नियंत्रण नगर निगम (मेयर/सभासद) के पास जा सकता है, जिससे प्राधिकरण के अधिकार कम हो सकते हैं।
वित्तीय मॉडल: अथॉरिटी के पास अपने लीज-आधारित राजस्व मॉडल को बनाए रखने की चुनौती होगी, जबकि निगम को संपत्ति कर लगाने का नया अधिकार मिलेगा।
सुप्रीम कोर्ट का आदेश: 13 अगस्त 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने भ्रष्टाचार के आरोपों के बाद एसआईटी की रिपोर्ट पर विचार करते हुए नोएडा को नगर निगम या मेट्रोपॉलिटन काउंसिल में बदलने पर विचार करने का निर्देश दिया था।