अखलाक हत्याकांड में यूपी सरकार को बड़ा झटका, कोर्ट ने मुकदमा वापसी से किया इनकार!

न्यूज़ डायरी,नोएडा।


बहुचर्चित अखलाक हत्याकांड में उत्तर प्रदेश सरकार को अदालत से करारा झटका लगा है। सरकार की ओर से दाखिल मुकदमा वापसी की याचिका को कोर्ट ने खारिज कर दिया है। अदालत ने साफ कहा कि प्रस्तुत अर्जी में कोई ठोस और वैधानिक आधार नहीं है, इसलिए आरोपियों के खिलाफ चल रही न्यायिक प्रक्रिया जारी रहेगी।
इतना ही नहीं, कोर्ट ने इस मामले की रोज़ाना सुनवाई के निर्देश भी दिए हैं। हालांकि अगली सुनवाई की तारीख 6 जनवरी 2026 निर्धारित की गई है।
कोर्ट ने कहा कि दण्ड प्रक्रिया संहिता की धारा-321 के तहत मुकदमा वापस लेने के लिए मजबूत कानूनी कारणों का होना अनिवार्य है, जो इस प्रकरण में प्रस्तुत नहीं किए गए। ऐसे में न्यायालय किसी भी स्थिति में केस वापसी की अनुमति नहीं दे सकता।


सरकार की ओर से कब और कैसे की गई थी पहल


उत्तर प्रदेश सरकार के न्याय अनुभाग-5 (फौजदारी) द्वारा 26 अगस्त 2025 को एक शासनादेश जारी किया गया था। इसके क्रम में संयुक्त निदेशक अभियोजन ने पत्र लिखते हुए मुकदमा वापस लेने का प्रस्ताव रखा।
इसके बाद 12 सितंबर 2025 को गौतमबुद्धनगर के संयुक्त निदेशक अभियोजन ने जिला शासकीय वकील (फौजदारी) को पत्र जारी कर आवश्यक विधिक कार्रवाई के निर्देश दिए थे। पत्र में यह भी उल्लेख किया गया था कि राज्यपाल द्वारा अभियोजन वापसी की अनुमति दी गई है और यह कार्रवाई सीआरपीसी की धारा-321 के अंतर्गत की जा रही है।


अखलाक हत्याकांड आज भी क्यों है चर्चा में


अखलाक हत्याकांड आज भी इसलिए सुर्खियों में बना रहता है क्योंकि यह मामला दो समुदायों से जुड़ा हुआ है और इसका सामाजिक व राजनीतिक असर पूरे देश में देखने को मिला था।
गौरतलब है कि 28 सितंबर 2015 की रात दादरी के बिसाहड़ा गांव में यह सनसनीखेज घटना हुई थी। अफवाह फैलाई गई थी कि अखलाक के घर में गोमांस रखा है। इसके बाद गुस्साए लोगों की भीड़ अखलाक के घर पहुंची, घर की तलाशी ली गई और फ्रिज में मांस मिलने के बाद भीड़ ने अखलाक की पीट-पीटकर हत्या कर दी, जबकि उसके बेटे दानिश को गंभीर रूप से घायल कर दिया गया।
इस घटना के बाद न सिर्फ उत्तर प्रदेश बल्कि पूरे देश में विरोध-प्रदर्शन हुए थे और मामला राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया था।