अरावली बचाओ, जीवन बचाओ: सपा नोएडा महानगर ने सरकार को जगाने के लिए निकाला कैंडल मार्च।

✍️ योगेश राणा

:- सेक्टर-53 से सिटी सेंटर तक सैकड़ों कार्यकर्ता और पर्यावरण प्रेमी हुए शामिल, अरावली के संरक्षण की उठी बुलंद आवाज

न्यूज़ डायरी,नोएडा।


“अरावली बचाओ, जीवन बचाओ और सरकार को जगाओ” अभियान के तहत समाजवादी पार्टी नोएडा महानगर की ओर से एक विशाल कैंडल मार्च का आयोजन किया गया। यह कैंडल मार्च नोएडा सेक्टर-53 स्थित कंचनजंगा मार्केट से शुरू होकर नोएडा सिटी सेंटर तक निकाला गया। मार्च में सैकड़ों की संख्या में समाजवादी पार्टी के नेता, पदाधिकारी, कार्यकर्ता और पर्यावरण से प्रेम करने वाले जागरूक नागरिक शामिल हुए।
कैंडल मार्च का नेतृत्व सपा नोएडा महानगर अध्यक्ष डॉ. आश्रय गुप्ता ने किया। इस दौरान कार्यकर्ताओं के हाथों में जलती मोमबत्तियां और “अरावली बचाओ”, “पर्यावरण बचाओ”, “प्रकृति बचेगी तभी मानव बचेगा” जैसे नारों की तख्तियां दिखाई दीं। पूरे मार्ग पर पर्यावरण संरक्षण को लेकर नारेबाजी की गई और सरकार से अरावली पर्वतमाला को बचाने के लिए ठोस कदम उठाने की मांग की गई।


महानगर अध्यक्ष डॉ. आश्रय गुप्ता ने कहा कि अरावली पर्वतमाला सदियों से राजस्थान, हरियाणा, दिल्ली और आसपास के क्षेत्रों को मरुस्थल बनने से बचाती आ रही है। ये पहाड़ियां रेत के तूफानों को रोकने, वर्षा के संतुलन को बनाए रखने और भूजल को रिचार्ज करने में अहम भूमिका निभाती हैं। अरावली का अस्तित्व केवल पहाड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह करोड़ों लोगों के जीवन और भविष्य से जुड़ा हुआ है।


इस अवसर पर महानगर महासचिव विकास यादव और प्रदेश सचिव सुनील चौधरी ने कहा कि आज अरावली पर्वतमाला अवैध खनन, अंधाधुंध कटाई और बेतरतीब शहरी विस्तार के कारण गंभीर खतरे में है। लगातार पहाड़ों को काटा जा रहा है, जंगल खत्म हो रहे हैं और जल स्रोत सूखते जा रहे हैं। इसका सीधा असर मौसम चक्र, खेती, जल संकट और आम आदमी के जीवन पर पड़ रहा है।


उन्होंने कहा कि अरावली सिर्फ जमीन का एक टुकड़ा नहीं, बल्कि पानी, हवा और जीवन का सुरक्षा कवच है। यह केवल 600 मीटर की ऊंचाई का सवाल नहीं है, बल्कि आने वाली 600 पीढ़ियों के भविष्य की चिंता का विषय है। यदि आज प्रकृति हार गई, तो कल इंसान को इसकी भारी कीमत चुकानी पड़ेगी।
सपा नेताओं ने सरकार से मांग की कि अरावली क्षेत्र में हो रहे अवैध खनन और कटाई पर तुरंत रोक लगाई जाए, पर्यावरण संरक्षण से जुड़े कानूनों को सख्ती से लागू किया जाए और अरावली को बचाने के लिए जनभागीदारी के साथ ठोस नीति बनाई जाए।