विश्व हिंदी दिवस 2026 : जानिए क्यों हिंदी भारत की राष्ट्रभाषा नहीं।

न्यूज़ डायरी, नोएडा।

World Hindi Day2026 : हर साल 10 जनवरी को विश्व हिंदी दिवस मनाया जाता है। हिंदी दुनिया की तीसरी सबसे ज्यादा बोली जाने वाली भाषा है। अंग्रेजी और मैंडरिन चाइनीज के बाद दुनिया में हिंदी तीसरे नंबर पर बोली जाने वाली भाषा है। लेकिन भारत की राष्ट्रभाषा नहीं है। भारत में हिंदी को राष्ट्रभाषा का दर्जा नहीं दिया गया है। हिंदी भारत की राष्ट्रभाषा है या नहीं? अक्सर जनरल नॉलेज (जीके) में यह सवाल पूछा जाता है। इसे लेकर भी काफी डिबेट होती रहती है। आइए इसके पीछे के कारण समझते हैं।

हिंदी भारत की राष्ट्रभाषा है या नहीं?

नहीं, हिंदी भारत की राष्ट्रभाषा नहीं है। इसके पीछे वजहों को समझना भी जरूरी है। दरअसल भारत एक विविधताओं से भरा देश है और यही इसकी बड़ी पहचान भी है। यहां अनेक भाषाएं और बोलियां, लिखी और पढ़ी जाती हैं। इसी वजह से भारत में हिंदी को राष्ट्रभाषा का दर्जा नहीं दिया गया है। यह सच है कि भारत की बड़ी आबादी (करीब 43 प्रतिशत) की भाषा हिंदी है, लेकिन अन्य भाषाएं बोलने वालों की संख्या भी कम नहीं है। बड़ी संख्या में लोग न हिंदी बोलते हैं और न समझते हैं और न सभी को एक राष्ट्रभाषा सीखने और बोलने की कोई बाध्यता है। सभी भाषाओं को सम्मान और आदर मिला हुआ है। मातृभाषा बोलने, लिखने और पढ़ने की स्वतंत्रता है।

हिंदी को लेकर क्या है कानून?

ब्रिटिश शासन से स्वतंत्रता के बाद भारत में हिंदी भाषा को लेकर कानून बनाने की पहल की गई है। उस वक्त कन्हैयालाल माणिकलाल मुंशी और नरसिम्हा गोपालस्वामी आंयगर को भाषा संबंधी कानून बनाने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। डॉ. भीम राव आंबेडकर को कमेटी का अध्यक्ष बनाया गया था। 14 सितंबर 1949 को संविधान के अनुच्छेद 343 और 351 के तहत बने कानून में हिंदी को भारत की राजभाषा का दर्जा दिया गया। इसके बाद 1953 से हर साल भारत में 14 सितंबर को नेशनल हिंदी मनाया जाता है।भारत के संविधान के भाग 17 के अनुच्छेद 343 (1) में कहा गया है कि हिंदी भारत की राजभाषा होगी और लिपि देवनागरी होगी। हालांकि सरकारी कामकाजों में 15 साल के लिए हिंदी को लागू किया गया था, लेकिन 15 साल बाद भी ज्यादातर कामकाज अंग्रेजी भाषा में हो रहा था। तब संविधान में अन्य भाषाओं को भी मान्यता दी गई।

विश्व हिंदी दिवस 10 जनवरी को क्यों मनाया जाता है?

आजादी के बाद भाषा को लेकर सबसे बड़ा सवाल था कि क्या हिंदी सिर्फ भारत तक सीमित रहेगी या दुनियाभर में पहचान मिलेगी या नहीं? क्योंकि उस समय अंग्रेजी वैश्विक भाषा बन चुकी थी। अंतराराष्ट्रीय स्तर पर स्पेनिश, फ्रेंच, चीनी भाषा मजबूत हो रही थी और हिंदी कमजोर थी। यहीं से हिंदी को वैश्विक भाषा बनाने की सोच ने जन्म लिया। 10 जनवरी 1975, ऐतिहासिक तारीख बन गई। क्योंकि इस दिन भारत की तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने पहला विश्व हिंदी सम्मेलन का आयोजन किया जिसमें 30 से ज्यादा देशों के हिंदी विद्वान शामिल हुए। सम्मेलन में हिंदी को विश्व स्तर पर पहचान दिलाने को लेकर गंभीर चर्चा हुई। तय हुआ कि विदेशों में हिंदी पढ़ाई जाएगी, रिसर्च इंस्टीट्यूट शुरू किए जाएंगे और अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों का आयोजन किया जाएगा। उस ऐतिहासिक दिन की याद में भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने 2006 में 10 जनवरी को विश्व हिंदी दिवस के रूप में मनाने की घोषणा की। तब से हर साल 10 जनवरी को विश्व हिंदी (World Hindi Day)मनाया जाता है।