Supreme Court : BJP नेता अश्विनी कुमार उपाध्याय की PIL, झूठे केस पर सजा की मांग।

✍️ योगेश राणा

फर्जी केस से न्याय व्यवस्था पर बोझ, सुप्रीम कोर्ट ने माना गंभीर मुद्दा

बीजेपी नेता और वरिष्ठ अधिवक्ता अश्विनी कुमार उपाध्याय ने झूठे मुकदमों और दुर्भावनापूर्ण अभियोजन (Malicious Prosecution) को रोकने के लिए सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका (PIL) दायर की है। बता दें कि 26 फरवरी 2026 को सुप्रीम कोर्ट की बेंच (CJI सूर्यकांत, जस्टिस जोयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल पंचोली) ने इस याचिका पर केंद्र सरकार, सभी राज्य सरकारों और राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) को नोटिस जारी कर 4 सप्ताह में जवाब मांगा है और याचिका में तर्क दिया गया है कि झूठे मुकदमे (विशेषकर बलात्कार और SC/ST एक्ट के तहत) निर्दोष नागरिकों के सम्मान और जीवन के अधिकार (अनुच्छेद 21) का उल्लंघन करते हैं और न्यायिक प्रणाली पर भारी बोझ डालते हैं और सुनवाई के दौरान CJI सूर्यकांत ने कहा कि समाज को जागरूक करने और ‘भाईचारे के सिद्धांत’ (Principle of Fraternity) को विकसित करने की आवश्यकता है ताकि कोई दूसरों के अधिकारों का हनन न करे।

प्रमुख मांगें-?

सभी थानों, तहसील/जिला अदालतों, पंचायत भवनों और शैक्षणिक संस्थानों में ‘डिस्प्ले बोर्ड’ लगाए जाएं, जिनमें झूठी शिकायत और फर्जी गवाही देने पर होने वाली सजा (जैसे 7 साल तक का कारावास) की जानकारी हो और शिकायत दर्ज करने से पहले शिकायतकर्ता को कानूनी परिणामों के बारे में सूचित किया जाए और उनसे सच्चाई का शपथ पत्र (Undertaking/Affidavit) लिया जाए।