✍️ ऋतु दुबे, एस्ट्रो (विशेष रिपोर्ट)
:- होली से पहले ग्रहण का संयोग, धार्मिक और वैज्ञानिक सच
मार्च महीने की शुरुआत एक महत्वपूर्ण खगोलीय घटना के साथ हो रही है। 3 मार्च को वर्ष 2026 का पहला चंद्र ग्रहण घटित होगा। यह ग्रहण न केवल वैज्ञानिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि धार्मिक, ज्योतिषीय और सामाजिक स्तर पर भी लोगों की विशेष रुचि का विषय रहता है। चूंकि यह ग्रहण फाल्गुन पूर्णिमा के आसपास पड़ रहा है, इसलिए आम जनमानस में इसके प्रभाव, दृश्यता और सावधानियों को लेकर कई प्रश्न उठ रहे हैं—क्या यह पूरे भारत में दिखाई देगा? दिल्ली-एनसीआर में कब और कितनी देर तक दिखेगा? इसका मानव जीवन पर क्या प्रभाव पड़ सकता है? और ग्रहण काल में किन उपायों को अपनाना चाहिए?
इन्हीं सभी पहलुओं पर प्रस्तुत है यह विस्तृत और तथ्यपरक रिपोर्ट।
चंद्र ग्रहण क्या होता है?
चंद्र ग्रहण एक प्राकृतिक खगोलीय प्रक्रिया है। जब सूर्य, पृथ्वी और चंद्रमा एक सीधी रेखा में आ जाते हैं और पृथ्वी की छाया चंद्रमा पर पड़ती है, तब चंद्र ग्रहण घटित होता है। यह घटना केवल पूर्णिमा के दिन ही संभव होती है।
चंद्र ग्रहण मुख्यतः तीन प्रकार का होता है—
उपच्छाया चंद्र ग्रहण
आंशिक चंद्र ग्रहण
पूर्ण चंद्र ग्रहण
3 मार्च को होने वाला ग्रहण पूर्ण चंद्र ग्रहण की श्रेणी में आता है, हालांकि भारत के कई हिस्सों में इसका पूरा चरण दिखाई नहीं देगा।
3 मार्च को चंद्र ग्रहण का समय
भारतीय समयानुसार, यह चंद्र ग्रहण दोपहर बाद दोपहर 3 बजकर 20 मिनट पर शुरू हो जाएगा और शाम को 6 बजकर 46 मिनट तक रहेगा। ग्रहण का अधिकांश चरण उस समय घटित होगा जब भारत में चंद्रमा अभी उदित नहीं हुआ होगा। यही कारण है कि देश के अलग-अलग हिस्सों में इसकी दृश्यता भिन्न-भिन्न होगी।
संक्षेप में—
ग्रहण की शुरुआत: दोपहर बाद
ग्रहण का मध्य चरण: सूर्यास्त से पहले
ग्रहण की समाप्ति: सूर्यास्त के बाद
क्या यह चंद्र ग्रहण पूरे भारत में दिखाई देगा?
यह चंद्र ग्रहण तकनीकी रूप से पूरे भारत पर प्रभावी है, लेकिन दृश्यता हर स्थान पर समान नहीं होगी। भारत के पूर्वी और उत्तर-पूर्वी राज्यों में चंद्रमा अपेक्षाकृत पहले उदित होता है, इसलिए वहां ग्रहण का अंतिम और स्पष्ट चरण अधिक समय तक देखा जा सकेगा। मध्य और पश्चिमी भारत में ग्रहण का केवल अंतिम हिस्सा ही दिखाई देगा। कई स्थानों पर चंद्रमा उदय के समय ग्रहण समाप्ति की ओर होगा।
दिल्ली-एनसीआर में चंद्र ग्रहण कब दिखाई देगा?
दिल्ली, नोएडा, गुरुग्राम, गाजियाबाद और फरीदाबाद जैसे एनसीआर क्षेत्रों में चंद्रमा शाम लगभग 6:20 से 6:30 बजे के बीच उदित होगा। इस समय तक ग्रहण अपने अंतिम चरण में होगा।
अर्थात—दिल्ली-एनसीआर में पूर्ण ग्रहण नहीं,बल्कि आंशिक रूप से ग्रसित चंद्रमा का दृश्य देखने को मिलेगा। यदि मौसम साफ रहा और क्षितिज पर बादल न हों, तो पूर्व दिशा में खुले स्थान से ग्रहण का दृश्य साफ देखा जा सकता है।
क्या चंद्र ग्रहण देखना सुरक्षित है? वैज्ञानिक दृष्टि से चंद्र ग्रहण को देखना पूरी तरह सुरक्षित होता है। इसके लिए किसी विशेष चश्मे, फिल्टर या उपकरण की आवश्यकता नहीं होती।
बच्चे, बुजुर्ग और गर्भवती महिलाएं भी इसे सामान्य रूप से देख सकती हैं।
हालांकि धार्मिक मान्यताओं के अनुसार कुछ लोग ग्रहण काल में चंद्र दर्शन से परहेज़ करते हैं—यह व्यक्तिगत आस्था का विषय है।
चंद्र ग्रहण का ज्योतिषीय महत्व
ज्योतिष शास्त्र में चंद्रमा को मन, भावनाओं, माता, जल तत्व और मानसिक संतुलन का कारक माना गया है। इसलिए चंद्र ग्रहण को भावनात्मक स्तर पर संवेदनशील समय माना जाता है।
संभावित प्रभाव—
मन में अस्थिरता, भ्रम या भावुकता बढ़ सकती है
नींद, चिंता या निर्णय क्षमता पर असर पड़ सकता है
कुछ लोगों में पुरानी स्मृतियाँ या भावनात्मक मुद्दे उभर सकते हैं
हालांकि यह प्रभाव हर व्यक्ति पर समान नहीं होता। जिनकी कुंडली में चंद्रमा कमजोर स्थिति में होता है, वे इसे अधिक महसूस कर सकते हैं।
सामाजिक और मानसिक प्रभाव
ग्रहण काल को आत्ममंथन का समय भी माना गया है। इस दौरान
अनावश्यक विवाद से बचना
बड़े निर्णय टालना
भावनात्मक प्रतिक्रिया से दूरी रखना
मानसिक शांति के लिए लाभकारी माना जाता है।
सूतक काल और उसकी मान्यता
धार्मिक परंपराओं में ग्रहण से पहले का समय सूतक काल कहलाता है।
हालांकि चंद्र ग्रहण का सूतक सूर्य ग्रहण की तुलना में कम प्रभावी माना जाता है।
सूतक काल में सामान्यतः—
पूजा-पाठ रोकने,भोजन पकाने से बचने,ध्यान और जप करने की परंपरा है। यह ध्यान रखना आवश्यक है कि सूतक काल आस्था का विषय है, विज्ञान से इसका कोई सीधा संबंध नहीं है।
चंद्र ग्रहण के दौरान क्या करें?
धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टि से ग्रहण काल को साधना के लिए विशेष माना गया है।
- मंत्र जाप
चंद्रमा को शांत करने के लिए निम्न मंत्र का जाप अत्यंत शुभ माना जाता है:
“ॐ सोम सोमाय नमः”
या
“ॐ चंद्राय नमः”
ग्रहण काल में 108 बार मंत्र जाप करने से मानसिक शांति मिलती है। - ध्यान और मौन
इस समय मौन रखकर ध्यान करना मन को स्थिर करता है।
भावनात्मक तनाव कम करने में यह विशेष सहायक है। - दान-पुण्य
ग्रहण समाप्ति के बाद—
दूध
चावल
सफेद वस्त्र
चीनी
का दान करना शुभ माना जाता है। - ग्रहण के बाद स्नान
ग्रहण समाप्ति के बाद स्नान कर स्वच्छ वस्त्र पहनना और घर की साफ-सफाई करना परंपरागत रूप से शुद्धिकरण का प्रतीक माना जाता है। - क्या न करें?
परंपरागत मान्यताओं के अनुसार—
ग्रहण काल में बाल-नाखून न काटें
अनावश्यक वाद-विवाद से बचें
नकारात्मक विचारों में न उलझें
इन नियमों का उद्देश्य भय नहीं, बल्कि मानसिक अनुशासन बनाए रखना है।
होली और चंद्र ग्रहण का संयोग
चूंकि यह चंद्र ग्रहण फाल्गुन पूर्णिमा के समय पड़ रहा है, इसलिए कई स्थानों पर होली के आयोजन को लेकर संशय रहता है।
परंपरा के अनुसार—
ग्रहण के दिन रंग खेलने से परहेज़ किया जाता है
कई क्षेत्रों में होली का मुख्य उत्सव अगले दिन मनाया जाता है
3 मार्च को होने वाला चंद्र ग्रहण एक प्राकृतिक खगोलीय घटना है, जिसे डर या भ्रम से नहीं, बल्कि ज्ञान, संतुलन और जागरूकता के साथ देखना चाहिए।
दिल्ली-एनसीआर सहित भारत के अधिकांश हिस्सों में इसका आंशिक दृश्य दिखाई देगा।
वैज्ञानिक दृष्टि से यह पूरी तरह सुरक्षित है, जबकि ज्योतिषीय और धार्मिक दृष्टि से इसे आत्मचिंतन, संयम और साधना का अवसर माना गया है।
ग्रहण हमें यह संदेश देता है कि जीवन में भी कभी-कभी छाया आती है, लेकिन वह स्थायी नहीं होती—प्रकाश फिर लौटता है।