भारत की ओलंपिक 2036 की राह में शारीरिक शिक्षा को केंद्रीय स्थान!

न्यूज़ डायरी टुडे, दिल्ली।

भारत की 2036 ओलंपिक मेजबानी और उसमें शीर्ष प्रदर्शन के लक्ष्य को साकार करने के लिए शारीरिक शिक्षा, खेल विज्ञान और जमीनी स्तर पर खेल विकास को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में फिजिकल एजुकेशन फाउंडेशन ऑफ इंडिया (PEFI) द्वारा आयोजित “8वां राष्ट्रीय सम्मेलन ऑन फिजिकल एजुकेशन एंड स्पोर्ट्स साइंसेज़–2026” का भव्य शुभारंभ आज एनडीएमसी कन्वेंशन सेंटर, नई दिल्ली में हुआ। दो दिवसीय इस राष्ट्रीय सम्मेलन में देश के विभिन्न राज्यों से आए 700 से अधिक शारीरिक शिक्षा शिक्षक, कोच, खेल प्रशासक, शोधार्थी, खेल वैज्ञानिक और शिक्षा व खेल क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञ भाग ले रहे हैं, जो भारत के खेल भविष्य को लेकर गंभीर विमर्श में जुटे हैं।

इस सम्मेलन का केंद्रीय विषय “Global Spotlight: India’s Transformative Vision for the 2036 Olympics” रखा गया है, जिसके माध्यम से यह संदेश दिया गया कि भारत की ओलंपिक सफलता केवल अंतरराष्ट्रीय मंच पर प्रदर्शन तक सीमित नहीं हो सकती, बल्कि इसकी नींव स्कूल स्तर से मजबूत, वैज्ञानिक और संरचित शारीरिक शिक्षा प्रणाली के निर्माण में निहित है। सम्मेलन में खेल संस्कृति के विकास, खेल विज्ञान के उपयोग और दीर्घकालिक एथलीट विकास मॉडल पर विशेष जोर दिया गया, ताकि भारत 2036 तक विश्व खेल मानचित्र पर एक सशक्त और प्रतिस्पर्धी राष्ट्र के रूप में उभर सके।
कार्यक्रम का औपचारिक उद्घाटन युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय, भारत सरकार के संयुक्त सचिव श्री शोभित जैन, PEFI के अध्यक्ष डॉ. ए.के. बंसल, राष्ट्रीय सचिव डॉ. पियूष जैन सहित अन्य गणमान्य अतिथियों द्वारा किया गया। इस अवसर पर वीडियो संदेश के माध्यम से केंद्रीय खेल एवं युवा कार्य मंत्री श्री मनसुख मांडवीया ने कहा कि भारत की 2036 ओलंपिक दृष्टि का आधार स्कूलों में मजबूत शारीरिक शिक्षा व्यवस्था से जुड़ा है। उन्होंने कहा कि खेल और शारीरिक शिक्षा केवल पदक जीतने का माध्यम नहीं हैं, बल्कि ये युवा सशक्तिकरण, सामाजिक समावेशन और राष्ट्र निर्माण की दिशा में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने इस राष्ट्रीय सम्मेलन को समय की आवश्यकता बताते हुए PEFI की पहल की सराहना की।
युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय के संयुक्त सचिव श्री शोभित जैन ने अपने संबोधन में कहा कि भारत को 2036 ओलंपिक को ध्यान में रखते हुए अभी से दीर्घकालिक और ठोस तैयारी शुरू करनी होगी। उन्होंने कहा कि भारत को खेलों में केवल सहभागिता तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि उसे पदकों में बदलने की रणनीति पर काम करना होगा। इसके लिए अन्य देशों की तरह कम से कम दस वर्ष पहले से योजनाबद्ध तैयारी, खेल अवसंरचना का विकास और प्रतिभाओं की पहचान अनिवार्य है, तभी भारत पदक तालिका में शीर्ष दस देशों में स्थान बना सकेगा।

विधायक सतीश उपाध्याय ने खेलों के सामाजिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि खेल समाज में संगठन, अनुशासन और सामाजिक समरसता की भावना को मजबूत करते हैं। उन्होंने कहा कि खेल को जीवन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया जाना चाहिए, न कि केवल एक विकल्प के रूप में देखा जाए। उनके अनुसार खेलों से न केवल शारीरिक और मानसिक विकास होता है, बल्कि समाज में सकारात्मक सोच और एकता भी बढ़ती है।

PEFI के राष्ट्रीय सचिव डॉ. पियूष जैन ने देशभर से आए प्रतिभागियों और विशिष्ट अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि शारीरिक शिक्षा, खेल विज्ञान और उच्च प्रदर्शन खेल के क्षेत्र में यह सम्मेलन एक ऐतिहासिक पहल है। उन्होंने कहा कि यह मंच नीति-निर्माताओं, शिक्षाविदों और जमीनी स्तर पर काम करने वाले प्रशिक्षकों को एक साथ लाकर भारत के खेल भविष्य की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। वहीं PEFI के अध्यक्ष डॉ. ए.के. बंसल ने कहा कि यह सम्मेलन केवल विचार-विमर्श तक सीमित नहीं है, बल्कि भारत के खेल भविष्य के लिए एक सामूहिक और व्यावहारिक कार्ययोजना तैयार करने का प्रयास है।

उद्घाटन सत्र में पूर्व निदेशक, स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया डॉ. श्याम सुंदर दुबे ने उच्च प्रदर्शन खेलों, ओलंपिक मॉडल और विश्वविद्यालयों की भूमिका पर अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालयों और शिक्षण संस्थानों को खेल प्रतिभा के विकास का प्रमुख केंद्र बनाना होगा। वहीं यंग इंडिया स्किल यूनिवर्सिटी, तेलंगाना के कुलपति डॉ. किशोर कुलपति ने कौशल आधारित खेल शिक्षा, नवाचार और आधुनिक तकनीकों के उपयोग पर जोर दिया।

सम्मेलन के दौरान एक आधारभूत अध्ययन एवं सर्वेक्षण रिपोर्ट भी जारी की गई, जिसमें देश के विभिन्न राज्यों और शिक्षा बोर्डों से प्राप्त आंकड़ों के आधार पर स्कूल स्तर पर खेल अवसंरचना, शारीरिक शिक्षा पीरियड्स, प्रशिक्षित शिक्षकों की उपलब्धता और खेल सहभागिता की वास्तविक स्थिति को सामने रखा गया। रिपोर्ट में यह स्पष्ट किया गया कि यदि भारत को 2036 ओलंपिक विज़न को साकार करना है, तो स्कूल स्तर से ही वैज्ञानिक, संरचित और दीर्घकालिक खेल विकास कार्यक्रमों को अनिवार्य रूप से लागू करना होगा।

उद्घाटन के बाद आयोजित पहली पैनल चर्चा “Sports as a Tool for Social Change” विषय पर केंद्रित रही, जिसमें वक्ताओं ने खेल को सामाजिक समावेशन, लैंगिक समानता, युवा सशक्तिकरण और स्कूल ड्रॉपआउट में कमी लाने का सशक्त माध्यम बताया। चर्चा में इस बात पर सहमति बनी कि खेल न केवल शारीरिक विकास का साधन है, बल्कि सामाजिक परिवर्तन का भी प्रभावी औजार है।

दो दिवसीय सम्मेलन के दौरान 2036 ओलंपिक विज़न को ध्यान में रखते हुए कई तकनीकी सत्र आयोजित किए गए, जिनमें शैक्षणिक संस्थानों में हाई-परफॉर्मेंस सेंटर की स्थापना, खेल विश्वविद्यालयों और शिक्षण संस्थानों की भूमिका, टैलेंट आइडेंटिफिकेशन, लॉन्ग-टर्म एथलीट डेवलपमेंट, कोचिंग उत्कृष्टता, इंटीग्रेटेड स्पोर्ट्स सिस्टम और डेटा आधारित मॉनिटरिंग जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर गहन चर्चा की गई। इसके साथ ही एंटी-डोपिंग और खेल पोषण पर आधारित विशेष सत्र में NADA, NDTL, खेल पोषण विशेषज्ञों और खेल वैज्ञानिकों ने एंटी-डोपिंग शिक्षा, वैज्ञानिक पोषण और प्रदर्शन सुधार कार्यक्रमों की आवश्यकता पर जोर दिया।


सम्मेलन के दौरान शोधार्थियों के लिए पेपर प्रेज़ेंटेशन आयोजित किए गए और शारीरिक शिक्षा व खेल विज्ञान के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देने वाले व्यक्तियों को PEFI के 8वें राष्ट्रीय पुरस्कारों के माध्यम से सम्मानित किया गया। युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय और मंत्रालय समर्थित संस्थानों के सहयोग से आयोजित यह सम्मेलन स्कूल स्तर से एक सशक्त शारीरिक शिक्षा व्यवस्था विकसित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण नीति संवाद साबित हुआ, जिसने नीति-निर्माताओं, शिक्षाविदों और जमीनी कार्यकर्ताओं को एक मंच पर लाकर भारत की 2036 ओलंपिक दृष्टि को ठोस आधार प्रदान किया।