मोबाइल गेम नहीं, मौत का जाल : नाबालिगों में तेजी से फैलती खतरनाक लत
न्यूज़ डायरी टुडे, गाजियाबाद।
भारत में ऑनलाइन गेमिंग की लत (Gaming Addiction) एक गंभीर राष्ट्रीय स्वास्थ्य संकट का रूप ले रही है। हालांकि सरकारी स्तर पर इसके कारण होने वाली मौतों का कोई एकत्रित राष्ट्रव्यापी आंकड़ा (National Aggregate Data) उपलब्ध नहीं है,लेकिन कुछ घटनाएं यह बता रही है और यह डेटा एक भयावह तस्वीर पेश करते हैं।
गेमिंग के कारण मौतों के हालिया आंकड़े और घटनाएं-?
1-गाजियाबाद ट्रिपल सुसाइड (4 फरवरी 2026):-
एक बेहद दुखद घटना में,गाजियाबाद में तीन नाबालिग बहनों (उम्र 12, 14 और 16 वर्ष) ने एक कोरियन ‘टास्क
-बेस्ड’ गेम की लत के चलते 9वीं मंजिल से कूदकर अपनी जान दे दी।
2-केरल का डेटा (नवंबर 2024):-
केरल सरकार के आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार, राज्य में पिछले तीन वर्षों में 19 बच्चों की मौत डिजिटल एडिक्शन (जिसमें गेमिंग मुख्य है) के कारण हुई है।
3-तमिलनाडु (2019-2024):-
रिपोर्ट्स के अनुसार, तमिलनाडु में ऑनलाइन गेमिंग और उससे जुड़े वित्तीय नुकसान के कारण लगभग 47-48 लोगों ने आत्महत्या की है, जिनमें कई किशोर (13-17 वर्ष) शामिल थे।
4-कर्नाटक (2023-2025):-
राज्य में पिछले तीन वर्षों में ऑनलाइन गेमिंग से जुड़े वित्तीय संकट और लत के कारण 18 आत्महत्याएं दर्ज की गई हैं।
गेमिंग एडिक्शन का बच्चों पर प्रभाव-?
भारत में लगभग 8.5% बच्चे और किशोर गेमिंग एडिक्शन से प्रभावित पाए गए हैं और 9-17 वर्ष की आयु के लगभग 49% शहरी बच्चे रोजाना 3 घंटे से अधिक समयऑनलाइन बिता रहे हैं, जिससे उनमें आक्रामकता (58%), अधीरता (61%) और अति-सक्रियता (50%) जैसे लक्षण देखे जा रहे हैं और बढ़ते खतरे को देखते हुए, भारत सरकार ने ऑनलाइन गेमिंग (विनियमन) अधिनियम,2025 (Online Gaming (Regulation) Act, 2025) पारित किया है, जिसका उद्देश्य सट्टेबाजी वाले खेलों पर प्रतिबंध लगाना और बच्चों को इस जानलेवा लत से बचाना है।