डिलीवरी में लापरवाही: महिला के पेट में डेढ़ साल तक पड़ा रहा तौलिया, कोर्ट के आदेश पर सीएमओ समेत 6 पर FIR

✍️ योगेश राणा

:- बैक्सन अस्पताल में सर्जरी के दौरान बड़ी मेडिकल नेग्लिजेंस

:- शिकायत पर कार्रवाई न होने से आहत महिला ने ली कोर्ट की शरण

न्यूज़ डायरी,नोएडा

ग्रेटर नोएडा स्थित बैक्सन अस्पताल में प्रसूता की डिलीवरी के दौरान हुई गंभीर चिकित्सीय लापरवाही का सनसनीखेज मामला सामने आया है। सर्जरी के दौरान डॉक्टरों द्वारा महिला के पेट में तौलिया छोड़ दिया गया, जो करीब डेढ़ वर्ष तक उसके शरीर के भीतर रहा। लगातार पेट दर्द से जूझ रही महिला जब दूसरे अस्पताल पहुंची, तो जांच और ऑपरेशन के बाद पेट से लगभग डेढ़ मीटर लंबा तौलिया निकाला गया। इसके बाद पूरे मामले का खुलासा हुआ।

डेढ़ साल तक झेलती रही दर्द, तब हुआ खुलासा

पीड़िता की डिलीवरी लगभग डेढ़ वर्ष पूर्व बैक्सन अस्पताल में कराई गई थी। डिलीवरी के बाद से ही महिला को लगातार पेट दर्द और असहजता की शिकायत बनी रही। कई बार इलाज कराने के बावजूद जब आराम नहीं मिला तो महिला ने दूसरे अस्पताल में जांच कराई। वहां डॉक्टरों ने तत्काल ऑपरेशन की सलाह दी। ऑपरेशन के दौरान महिला के पेट से तौलिया निकलने पर सभी हैरान रह गए।

सीएमओ से शिकायत, लेकिन नहीं हुई कोई कार्रवाई

घटना सामने आने के बाद महिला ने गौतमबुद्धनगर के मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) से लिखित शिकायत की। सीएमओ की ओर से जांच के लिए स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी डॉ. चंदन सोनी को नामित किया गया, लेकिन आरोप है कि जांच में भारी लापरवाही बरती गई और समय पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। वहीं दूसरी ओर अस्पताल प्रबंधन द्वारा महिला और उसके परिजनों को कथित रूप से धमकाए जाने के आरोप भी सामने आए।

न्याय न मिलने पर महिला ने खटखटाया कोर्ट का दरवाजा

प्रशासनिक स्तर पर कार्रवाई न होने से निराश होकर महिला ने दिसंबर 2025 में जिला न्यायालय की शरण ली। मामले की गंभीरता को देखते हुए न्यायालय ने 24 दिसंबर 2025 को कोतवाली नॉलेज पार्क पुलिस को FIR दर्ज करने के स्पष्ट आदेश दिए।

कोर्ट के आदेश पर 6 लोगों के खिलाफ दर्ज हुआ मुकदमा

न्यायालय के आदेश के अनुपालन में पुलिस ने बैक्सन अस्पताल की डॉ. अंजना अग्रवाल, अस्पताल के मालिक डॉ. मनीष गोयल, गौतमबुद्धनगर के सीएमओ डॉ. नरेंद्र मोहन, स्वास्थ्य विभाग के जांच अधिकारी डॉ. चंदन सोनी, डॉ. आशा किरण चौधरी सहित कुल छह लोगों के खिलाफ FIR दर्ज कर ली है।

मेडिकल सिस्टम पर उठे सवाल

यह मामला न केवल एक अस्पताल की लापरवाही को उजागर करता है, बल्कि स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है। अब देखना यह होगा कि जांच और कानूनी कार्रवाई में पीड़िता को कितना और कब तक न्याय मिल पाता है।