UP News : पुलिस थानों में CCTV फेल होने पर हाईकोर्ट का सख्त रुख, जवाबदेही तय।

✍️ योगेश राणा

अब सिपाही या दरोगा नहीं, SP-कमिश्नर होंगे जिम्मेदार: हाईकोर्ट का आदेश

इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ खंडपीठ ने उत्तर प्रदेश के थानों में सीसीटीवी (CCTV) कैमरों के बार-बार खराब होने की दलीलों पर कड़ा रुख अपनाया है। न्यायमूर्ति अब्दुल मोईन और न्यायमूर्ति बबीता रानी की पीठ ने इसे “तकनीकी खराबी” मानने से इनकार करते हुए पुलिस की कार्यप्रणाली पर तीखी टिप्पणी की है और कोर्ट ने जेम्स बॉन्ड फिल्म ‘गोल्डफिंगर’के एक डायलॉग का हवाला देते हुए कहा, “एक बार होना दुर्घटना है, दो बार होना संयोग है, लेकिन तीन बार होना दुश्मन की कार्रवाई (साजिश) है”। कोर्ट ने कहा कि यह कोई संयोग नहीं है कि जैसे ही अदालतें फुटेज मांगती हैं, कैमरे खराब मिलते हैं‌ और कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अब छोटे अधिकारियों (सिपाही या दरोगा) को बलि का बकरा नहीं बनाया जा सकता। मुख्य सचिव को ऐसे दिशा-निर्देश जारी करने को कहा गया है जिससे जिले के उच्चतम पुलिस अधिकारियों (जैसे एसपी या कमिश्नर) की जिम्मेदारी तय की जा सके और मुख्य सचिव को 23 फरवरी 2026 तक व्यक्तिगत हलफनामे के साथ जांच रिपोर्ट और नए दिशा-निर्देश पेश करने का आदेश दिया गया है। यदि ऐसा नहीं किया जाता,तो उन्हें 23 फरवरी को स्वयं कोर्ट में हाजिर होना होगा।

क्या है पूरा मामला:-

यह मामला सुल्तानपुर के एक दिव्यांग व्यक्ति (श्याम सुंदर अग्रहरि) की याचिका पर सुनवाई के दौरान सामने आया, जिसने पुलिस पर अवैध हिरासत और उत्पीड़न का आरोप लगाया था। जब कोर्ट ने सीसीटीवी फुटेज मांगी, तो बताया गया कि कैमरे महीनों से खराब थे। कोर्ट ने पाया कि यह सुप्रीम कोर्ट के परमवीर सिंह सैनी बनाम बलजीत सिंह मामले के आदेशों का सीधा उल्लंघन है, जिसमें 6 से 18 महीने तक फुटेज सुरक्षित रखने का नियम है।

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