October 25, 2026

योगी सरकार का बड़ा फैसला! 26 अक्टूबर को वाल्मीकि जयंती पर छुट्टी, 75 जिलों में होंगे आयोजन।

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उत्तर प्रदेश में 26 अक्टूबर को महर्षि वाल्मीकि जयंती के अवसर पर सार्वजनिक अवकाश रहेगा। इस मौके पर प्रदेश के 75 जिलों में रामायण पाठ, भजन-कीर्तन और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। योगी सरकार की इस पहल के तहत महर्षि वाल्मीकि के योगदान और रामायण के संदेश को जन-जन तक पहुंचाने की तैयारी है।

✍️ Yogesh Rana |

News Diary Today | Uttar Pradesh News

लखनऊ: उत्तर प्रदेश में सोमवार, 26 अक्टूबर 2026 को महर्षि वाल्मीकि जयंती के अवसर पर सार्वजनिक अवकाश रहेगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली सरकार ने इस संबंध में 25 अक्टूबर को अवकाश की घोषणा की है। वहीं, महर्षि वाल्मीकि जयंती को खास बनाने के लिए प्रदेश के सभी 75 जिलों में धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। मंदिरों में रामायण पाठ, दीपदान, भजन-कीर्तन और रामलीला के जरिए आदिकवि महर्षि वाल्मीकि के योगदान को याद किया जाएगा।

इस बार जयंती के अवसर पर उत्तर प्रदेश में रामायण की सांस्कृतिक विरासत को जन-जन तक पहुंचाने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। प्रदेश के प्रमुख श्रीराम मंदिरों, हनुमान मंदिरों और महर्षि वाल्मीकि से जुड़े धार्मिक स्थलों पर विशेष आयोजन होंगे। कुछ स्थानों पर 8, 12 और 24 घंटे तक लगातार वाल्मीकि रामायण पाठ कराने की तैयारी है। चित्रकूट के लालापुर स्थित महर्षि वाल्मीकि की तपोस्थली पर भी विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।

26 अक्टूबर को यूपी में सार्वजनिक अवकाश, जानिए क्या रहेगा बंद

उत्तर प्रदेश में महर्षि वाल्मीकि जयंती के अवसर पर सोमवार को सार्वजनिक अवकाश घोषित किया गया है। शासन की ओर से जारी सूचना के अनुसार, वर्ष 2026 की अवकाश सूची में संशोधन किया गया है।

इस घोषणा से सरकारी कामकाज और स्कूलों में पढ़ाई की योजना बनाने वाले लोगों को महत्वपूर्ण जानकारी मिली है। सरकारी कार्यालयों में अवकाश संबंधी व्यवस्था शासन के आदेश के अनुसार लागू होगी। स्कूलों, कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में छुट्टी की स्थिति संबंधित संस्थान के निर्देशों के अनुसार देखी जानी चाहिए।

हालांकि, बैंक जाने की योजना बना रहे लोगों को ध्यान रखना चाहिए कि सार्वजनिक अवकाश घोषित होने का अर्थ यह नहीं है कि सभी बैंक भी अनिवार्य रूप से बंद रहेंगे। बैंकिंग अवकाश के नियम अलग हो सकते हैं। इसलिए बैंक जाने से पहले संबंधित शाखा से जानकारी लेना बेहतर रहेगा।

यूपी के सभी 75 जिलों में होंगे रामायण पाठ और भजन-कीर्तन

महर्षि वाल्मीकि जयंती के अवसर पर उत्तर प्रदेश के सभी 75 जिलों में कार्यक्रम आयोजित किए जाने की तैयारी है। इन आयोजनों के जरिए धार्मिक आस्था के साथ-साथ महर्षि वाल्मीकि के साहित्यिक योगदान और रामायण के संदेश को भी लोगों तक पहुंचाने का प्रयास किया जाएगा।

प्रदेश के चयनित मंदिरों और रामायण से जुड़े प्रमुख स्थलों पर कई तरह के कार्यक्रम आयोजित होंगे। इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं:

  • अखंड वाल्मीकि रामायण पाठ: कई स्थानों पर 8, 12 या 24 घंटे तक लगातार रामायण पाठ कराया जाएगा।
  • दीप प्रज्ज्वलन और दीपदान: धार्मिक स्थलों पर दीप जलाकर महर्षि वाल्मीकि को श्रद्धांजलि दी जाएगी।
  • भजन-कीर्तन और भजन संध्या: स्थानीय कलाकार और भजन मंडलियां भक्तिमय प्रस्तुतियां देंगी।
  • रामलीला मंचन: रामायण के प्रमुख प्रसंगों को नाट्य रूप में प्रस्तुत किया जाएगा।
  • पूजन और हवन: निर्धारित कार्यक्रमों के अनुसार धार्मिक अनुष्ठान आयोजित होंगे।
  • लव-कुश प्रसंग का मंचन: रामायण के इस महत्वपूर्ण प्रसंग के जरिए लोगों को सांस्कृतिक विरासत से परिचित कराया जाएगा।

कार्यक्रमों को जिला, तहसील और विकासखंड स्तर तक आयोजित करने की योजना है। इससे स्थानीय लोगों की भागीदारी बढ़ाने और क्षेत्रीय कलाकारों को मंच उपलब्ध कराने पर जोर रहेगा।

चित्रकूट के लालापुर में होगा विशेष आयोजन

महर्षि वाल्मीकि जयंती के अवसर पर चित्रकूट के लालापुर स्थित महर्षि वाल्मीकि की तपोस्थली पर विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इस स्थान का संबंध महर्षि वाल्मीकि की धार्मिक और सांस्कृतिक परंपरा से माना जाता है।

यहां रामलीला मंचन, वाल्मीकि रामायण पाठ, भजन संध्या और स्थानीय कलाकारों की प्रस्तुतियां कार्यक्रम का प्रमुख हिस्सा होंगी। इसके साथ ही नदी के घाट पर वाल्मीकि आरती आयोजित करने की भी तैयारी है।

चित्रकूट में होने वाले इस आयोजन का उद्देश्य श्रद्धालुओं को महर्षि वाल्मीकि के जीवन और साहित्यिक योगदान से जोड़ना है। धार्मिक आयोजनों के माध्यम से रामायण के प्रमुख प्रसंगों और उनकी शिक्षाओं को आम लोगों तक पहुंचाने का प्रयास किया जाएगा।

स्थानीय कलाकारों को मिलेगा मंच, जिलों में होंगी तैयारियां

प्रदेशभर में आयोजित होने वाले कार्यक्रमों में स्थानीय कलाकारों और भजन मंडलियों की भागीदारी पर भी जोर दिया जा रहा है। जिला स्तर पर संबंधित विभागों और प्रशासन के बीच समन्वय के माध्यम से कार्यक्रमों को व्यवस्थित करने की योजना है।

आयोजन स्थलों पर साफ-सफाई, पेयजल, रोशनी, ध्वनि और सुरक्षा की व्यवस्था सुनिश्चित करना भी जरूरी होगा। संस्कृति विभाग और अन्य संबंधित विभाग कार्यक्रमों के संचालन में भूमिका निभाएंगे।

इन आयोजनों से स्थानीय कलाकारों को अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिलेगा। साथ ही, धार्मिक और सांस्कृतिक स्थलों की पहचान को भी बढ़ावा मिल सकता है।

क्या प्रत्येक जिले को मिलेगा एक लाख रुपये का बजट?

महर्षि वाल्मीकि जयंती के आयोजन को लेकर सामने आई जानकारी में प्रत्येक जिले के लिए एक लाख रुपये के विशेष बजट का उल्लेख किया गया है। हालांकि, इस राशि के आवंटन और इस्तेमाल की पुष्टि संबंधित विभाग के आधिकारिक आदेश से की जानी चाहिए।

कार्यक्रमों के लिए बजट आवंटन का उद्देश्य आयोजन की व्यवस्था, सांस्कृतिक प्रस्तुतियों और अन्य जरूरी गतिविधियों को सुचारू रूप से संचालित करना हो सकता है। अंतिम राशि और उसके इस्तेमाल की जानकारी आधिकारिक आदेश या विभागीय सूचना के आधार पर ही स्पष्ट होगी।

महर्षि वाल्मीकि कौन थे? क्यों खास है उनकी जयंती?

महर्षि वाल्मीकि को भारतीय साहित्यिक परंपरा में आदिकवि के रूप में सम्मान दिया जाता है। परंपरागत मान्यता के अनुसार, उन्होंने संस्कृत में रामायण की रचना की थी। इस महाकाव्य में भगवान श्रीराम के जीवन, उनके संघर्षों, आदर्शों और जीवन-मूल्यों का वर्णन मिलता है।

रामायण भारतीय साहित्य और संस्कृति की महत्वपूर्ण रचनाओं में शामिल है। इसकी कथाएं केवल धार्मिक आस्था से ही नहीं, बल्कि कर्तव्य, त्याग, धैर्य, मर्यादा और मानवीय संबंधों से भी जुड़ी हैं।

महर्षि वाल्मीकि जयंती के अवसर पर उनके साहित्यिक योगदान को याद किया जाता है। देश के विभिन्न हिस्सों में इस दिन शोभायात्राएं, धार्मिक अनुष्ठान, भजन-कीर्तन और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।

उत्तर प्रदेश में भी इस अवसर पर होने वाले आयोजनों के जरिए रामायण की विरासत और महर्षि वाल्मीकि के योगदान को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है।

योगी सरकार का क्या है उद्देश्य?

प्रदेशभर में महर्षि वाल्मीकि जयंती को व्यापक स्तर पर मनाने का उद्देश्य धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत को बढ़ावा देना, रामायण की शिक्षाओं को जन-जन तक पहुंचाना और स्थानीय स्तर पर लोगों की भागीदारी बढ़ाना है।

मंदिरों में रामायण पाठ, दीपदान और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के जरिए महर्षि वाल्मीकि की रचनाओं को सम्मान देने के साथ भारतीय साहित्यिक परंपरा के महत्व को भी सामने लाया जाएगा।

कुल मिलाकर, 26 अक्टूबर को महर्षि वाल्मीकि जयंती के अवसर पर उत्तर प्रदेश में सार्वजनिक अवकाश के साथ धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों की व्यापक तैयारी है। प्रदेश के सभी 75 जिलों में होने वाले आयोजनों में रामायण पाठ, भजन-कीर्तन और दीपदान प्रमुख आकर्षण रहेंगे। चित्रकूट के लालापुर में होने वाला विशेष कार्यक्रम भी इस अवसर पर चर्चा में रहेगा।

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