✍️ योगेश राणा
:- FBI की सूचना पर खुलासा, अमेरिकी नागरिकों से करोड़ों की साइबर ठगी
न्यूज़ डायरी,नोएडा।
नोएडा में अंतरराष्ट्रीय साइबर ठगी के एक बड़े नेटवर्क का भंडाफोड़ करते हुए केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने फर्जी कॉल सेंटर पर छापा मारा है। यह कार्रवाई अमेरिका की जांच एजेंसी एफबीआई (Federal Bureau of Investigation) से मिली पुख्ता सूचना के आधार पर की गई। छापेमारी में सीबीआई ने छह साइबर ठगों को गिरफ्तार किया है, जो खुद को अमेरिकी एजेंसियों का अधिकारी बताकर विदेशी नागरिकों को निशाना बना रहे थे।
अमेरिका, दिल्ली और कोलकाता तक फैला था ठगी का नेटवर्क
जांच में सामने आया है कि आरोपी नोएडा, दिल्ली और कोलकाता से बैठकर अमेरिकी नागरिकों से साइबर ठगी कर रहे थे। देश के भीतर रहकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सक्रिय इस गिरोह ने एक संगठित साइबर क्राइम नेटवर्क खड़ा कर रखा था।
1.88 करोड़ नकद, 34 इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बरामद
सीबीआई टीम ने मौके से 1.88 करोड़ रुपये नकद, भारी मात्रा में मोबाइल फोन, लैपटॉप समेत कुल 34 इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बरामद किए हैं। इन उपकरणों से अंतरराष्ट्रीय लेन-देन और ठगी से जुड़े अहम डिजिटल सबूत मिलने की उम्मीद है।
गिरफ्तार आरोपी, विदेशी नामों से करते थे कॉल
पकड़े गए आरोपियों की पहचान इस प्रकार हुई है—
शुभम सिंह उर्फ डॉमिनिक, डाल्टनलियन उर्फ माइकल, जार्ज टी. ज़ामलियनलाल उर्फ माइल्स, एल. सेइमिनलन हाओकिप उर्फ रोनी, मंगखोलुन उर्फ मैक्सी और रॉबर्ट थांगखान्खुआल उर्फ डेविड उर्फ मुनरोइन।
ऐसे देते थे ठगी को अंजाम
पूछताछ में खुलासा हुआ कि आरोपी खुद को एफबीआई, ड्रग एनफोर्समेंट एजेंसी और सोशल सिक्योरिटी एडमिनिस्ट्रेशन का अधिकारी बताकर अमेरिकी नागरिकों से संपर्क करते थे।
वे पीड़ितों के सोशल सिक्योरिटी नंबर (SSN) के ड्रग डिलीवरी और मनी लॉन्ड्रिंग में इस्तेमाल का झूठा आरोप लगाकर गिरफ्तारी का डर दिखाते थे।
डर दिखाकर डॉलर और क्रिप्टो ट्रांसफर कराते थे
गिरफ्तारी के डर से सहमे पीड़ितों को आरोपी लाखों डॉलर, क्रिप्टोकरेंसी वॉलेट्स और विदेशी बैंक खातों में पैसे ट्रांसफर करने के लिए मजबूर करते थे।
खाते और संपत्तियां फ्रीज, जांच जारी
सीबीआई आरोपियों से जुड़े बैंक खातों और संपत्तियों को फ्रीज कराने की कार्रवाई कर रही है। साथ ही नेटवर्क से जुड़े अन्य साथियों, विदेशी खातों और ठगी की रकम के अंतिम गंतव्य की गहन जांच की जा रही है।
जांच एजेंसी को जब्त किए गए इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों से अंतरराष्ट्रीय साइबर ठगी से जुड़े कई बड़े खुलासे होने की उम्मीद है। सीबीआई का मानना है कि यह नेटवर्क और भी देशों तक फैला हो सकता है।