युवराज मेहता मौत केस : इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यूपी सरकार को लगाई फटकार।

✍️ योगेश राणा

न्यूज़ डायरी टुडे, नोएडा।

Noida/ prayagraj : इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश में सुरक्षा मानकों और आपदा प्रबंधन की स्थिति पर सख्त नाराजगी व्यक्त करते हुए राज्य सरकार को फटकार लगाई है। जस्टिस महेश चंद्र त्रिपाठी और जस्टिस कुणाल रवि सिंह की खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि केवल बड़ी इमारतें खड़ी कर देना ही विकास नहीं है, बल्कि आम जनता के जीवन की रक्षा करना सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी है। बता दें कि जस्टिस त्रिपाठी ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा, “बड़ी-बड़ी इमारतें बनाना विकास नहीं होता, आम जनता की जान की रक्षा भी करनी पड़ती है”। उन्होंने इस बात पर भी हैरानी जताई कि मुख्यमंत्री के बार-बार दौरों के बावजूद जमीनी स्तर पर स्थितियों में सुधार नहीं हो रहा है और कोर्ट NDRF, SDRF, जिला प्रशासन और पुलिस द्वारा पेश किए गए जवाबों से पूरी तरह असंतुष्ट दिखा और कोर्ट ने अग्निशमन विभाग की ढिलाई पर भी कड़ा रुख अपनाते हुए DG Fire से विस्तृत जवाब मांगा है।

क्या था पूरा मामला !

यह मामला 27 वर्षीय सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की मौत से जुड़ा है, जो 16-17 जनवरी, 2026 की रात नोएडा के सेक्टर 150 में एक निर्माणाधीन साइट के असुरक्षित गड्ढे में गिरने से हुई थी और युवराज अपनी कार से घर लौट रहे थे, तभी घने कोहरे के कारण उनकी कार अनियंत्रित होकर एक 20 से 30 फीट गहरे और पानी से भरे गड्ढे में जा गिरी। यह गड्ढा एक निर्माणाधीन इमारत के बेसमेंट के लिए खोदा गया था और वहां कोई बैरिकेडिंग या चेतावनी बोर्ड नहीं था और दुर्घटना के बाद युवराज कार की छत पर चढ़ गए और लगभग 90 मिनट तक फोन की फ्लैशलाइट जलाकर मदद के लिए चिल्लाते रहे। उन्होंने अपने पिता को फोन कर बचाने की गुहार भी लगाई थी और याचिका में आरोप लगाया गया है कि पुलिस, फायर ब्रिगेड और NDRF/SDRF की टीमें मौके पर मौजूद होने के बावजूद उन्हें समय पर नहीं निकाल सकीं। उपकरणों की कमी और समन्वय के अभाव के कारण युवराज ने घंटों संघर्ष करने के बाद दम तोड़ दिया।