✍️ योगेश राणा
न्यूज़ डायरी,दिल्ली।
सुप्रीम कोर्ट में आवारा कुत्तों पर सुनवाई चल रही है। एनिमल वेलफेयर की तरफ से सुनवाई लड़ने वाले एडवोकेट सीयू सिंह ने कोर्ट में कुत्तों का पक्ष रखते हुए कहा कि अगर गलियों से आवारा कुत्तों को हटाया गया,तो चूहों की तादाद अचानक से बढ़ सकती है।“इस पर प्रतिक्रिया देते हुए न्यायाधीश ने कहा, तो क्या बिल्लियां ले आएं?”एडवोकेट सीयू सिंह का कहना है कि भारी संख्या में आवारा कुत्तों को एक ही शेल्टर में रखने से कई बीमारियां फैलने का खतरा रहता है। ऐसे में कुत्तों के लिए 91,800 नए शेल्टर बनाए जाने चाहिए।
वकीलों ने पेश की दलीलें:
सीनियर एडवोकेट ध्रुव मेहता ने सुप्रीम कोर्ट में दलील देते हुए कहा कि आखिरी बार कुत्तों की मॉनिटरिंग 2009 में हुई थी। तब दिल्ली में सिर्फ 5,60,000 कुत्ते थे। मगर, अब इनकी संख्या बढ़ चुकी है। इसलिए कुत्तों की मॉनिटरिंग करना बेहद जरूरी है। कोर्ट में एक अन्य याचिकाकर्ता की तरफ से दलील देते हुए सीनियर एडवोकेट नकुल दीवान ने कहा, “मेरे क्लाइंट एक एनजीओ चलाते हैं, जिसमें 45 लोग काम करते हैं। उनकी टीम ने अब तक 66000 से ज्यादा कुत्तों की जान बचाई है और 15000 कुत्तों की नसबंदी करवाई है।” इस पर एडवोकेट सीयू सिंह ने अदालत में कहा कई क्षेत्रों में बंदरों की समस्या भी बनी हुई है। अगर हम अचानक से सभी कुत्तों को हटा लेंगे, तो बंदरों की संख्या बढ़ सकती है, जिसके दुष्प्रभाव भयंकर होंगे। इसलिए हमें बैलेंस बनाने की जरूरत है। 20-30 साल पहले सूरत में क्या हुआ था, ये सबको पता है।
सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
वकीलों की दलील पर प्रतिक्रिया देते हुए कोर्ट ने कहा,”क्या इसका आवारा कुत्तों को हटाने से कोई संबंध है? कुत्ते और बिल्ली की दुश्मनी जगजाहिर है। बिल्ली चूहों को मारती है, तो क्या हमें बिल्लियों की संख्या में इजाफा करके कुत्तों की तादाद कम कर देनी चाहिए? हमें ABC (एनिमल बर्थ कंट्रोल) नियमों को सही से लागू करने की जरूरत है।”