न्यूज़ डायरी टुडे, नोएडा।
Noida: सुप्रीम कोर्ट ने एक हालिया सुनवाई (20 मार्च 2026) के दौरान यह महत्वपूर्ण टिप्पणी की है कि पत्नी द्वारा खाना न बनाना या घरेलू काम न करना क्रूरता (Cruelty) नहीं माना जा सकता। जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने जोर देकर कहा कि वैवाहिक जीवन में पति को भी बराबर की जिम्मेदारी निभानी चाहिए। बता दें कि सुप्रीम कोर्ट एक ऐसे व्यक्ति की याचिका पर सुनवाई कर रहा था जिसने अपनी पत्नी पर क्रूरता का आरोप लगाते हुए तलाक की मांग की थी। पति का मुख्य तर्क यह था कि उसकी पत्नी खाना नहीं बनाती और घरेलू काम नहीं करती है और जस्टिस विक्रम नाथ ने कहा, “आज का समय अलग है। पति को भी खाना बनाने, सफाई और कपड़े धोने जैसे कामों में बराबर का हाथ बँटाना चाहिए” और जस्टिस संदीप मेहता ने याचिकाकर्ता को फटकार लगाते हुए कहा, “आप किसी मेड (नौकरानी) से शादी नहीं कर रहे हैं, बल्कि एक जीवनसाथी से कर रहे हैं। आपको समझना होगा कि घर की जिम्मेदारियां साझा होती हैं” और यह जोड़ा 2017 में शादी के बंधन में बंधा था और 2019 से अलग रह रहा है। दोनों पेशे से सरकारी स्कूल में शिक्षक हैं। पति ने आरोप लगाया था कि पत्नी का व्यवहार ठीक नहीं है और वह घर का काम नहीं करती और अदालत ने मध्यस्थता (Mediation) विफल होने के बाद दोनों पक्षों को 27 अप्रैल 2026 को व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में पेश होने का आदेश दिया है ताकि उनसे सीधे बातचीत की जा सके।