:- उत्तराखंडी लोक गायन–नृत्य ने बांधा समां, तीसरे दिन सांस्कृतिक रंग में रंगा नोएडा क्रिकेट स्टेडियम
न्यूज़ डायरी,नोएडा
पर्वतीय सांस्कृतिक संस्था द्वारा आयोजित 15वें उत्तराखंड महाकौथिग मेले का तीसरा दिन सांस्कृतिक उल्लास, लोक परंपराओं और जनभागीदारी के नाम रहा। सुबह से ही लोगों के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया था और जैसे-जैसे दिन ढलता गया, वैसे-वैसे नोएडा का क्रिकेट स्टेडियम पूरी तरह “मिनी उत्तराखंड” में तब्दील होता चला गया। हजारों की संख्या में पहुंचे लोगों ने उत्तराखंड की लोक संस्कृति, संगीत और नृत्य का भरपूर आनंद लिया।
कार्यक्रम में उत्तराखंड के प्रसिद्ध लोक कलाकारों की प्रस्तुतियों ने माहौल को और भी जीवंत बना दिया। लोक गायक किशन महिपाल, लोक गायिका रेशमा शाह और लोक गायक कैलाश कुमार ने एक के बाद एक पारंपरिक उत्तराखंडी लोक गीत प्रस्तुत कर दर्शकों को झूमने पर मजबूर कर दिया। ढोल-दमाऊं और पहाड़ी लोक धुनों पर पूरा पंडाल तालियों और उत्साह से गूंज उठा।
महाकौथिग मेले के तीसरे दिन के कार्यक्रम की शुरुआत मुख्य संयोजक राजेंद्र चौहान और कल्पना चौहान द्वारा दीप प्रज्वलन के साथ की गई। इसके पश्चात दिल्ली-एनसीआर में रह रहे प्रवासी उत्तराखंडियों के 24 सांस्कृतिक समूहों ने उत्तराखंडी लोक नृत्य प्रतियोगिता के अंतर्गत शानदार प्रस्तुतियां दीं। पारंपरिक वेशभूषा, लोक संगीत और सधे हुए नृत्य कदमों ने दर्शकों का मन मोह लिया।
नृत्य प्रतियोगिता में निर्णायक की भूमिका उत्तराखंड की स्वर कोकिला कल्पना चौहान, प्रसिद्ध नृत्यांगना कोमल राणा नेगी और शिक्षिका हेजल खुराना ने निभाई। कड़ी प्रतिस्पर्धा के बाद अंजली भट्ट के निर्देशन में ग्रेटर नोएडा वेस्ट की पहाड़ी कला ग्रुप टीम ने प्रथम स्थान हासिल किया। वहीं लक्ष्मी बिष्ट के निर्देशन में बीरा ग्रुप, मयूर विहार-3 को दूसरा स्थान मिला, जबकि यूके आर्ट ग्रुप, खोड़ा ने तीसरा स्थान प्राप्त किया।
महाकौथिग मेला न केवल सांस्कृतिक कार्यक्रमों का मंच बना, बल्कि प्रवासी उत्तराखंडियों के लिए अपनी जड़ों से जुड़ने का सशक्त माध्यम भी साबित हुआ। तीसरे दिन की भारी भीड़ और दर्शकों का उत्साह इस बात का प्रमाण रहा कि उत्तराखंड की लोक संस्कृति की खुशबू आज भी लोगों के दिलों में बसी हुई है।