नोएडा के रैन बसेरों की जमीनी हकीकत: कागज़ों में सुविधा, ज़मीन पर बदहाली!

✍️योगेश राणा

न्यूज़ डायरी, नोएडा।


कड़ाके की ठंड में गरीब और बेसहारा लोगों को राहत देने के उद्देश्य से नोएडा प्राधिकरण द्वारा बनाए गए रैन बसेरों की जमीनी हकीकत दावों से बिल्कुल उलट नजर आई। न्यूज डायरी टुडे की टीम ने जब शहर में बनाए गए रैन बसेरों का ग्राउंड जीरो पर जाकर रियलिटी चेक किया, तो व्यवस्थाओं की पोल खुलकर सामने आ गई।
प्राधिकरण की ओर से दावा किया गया था कि ठंड के मौसम में जरूरतमंदों के लिए रैन बसेरों में ठहरने, सुरक्षा और अन्य बुनियादी सुविधाओं की व्यवस्था की गई है, लेकिन मौके पर हालात कुछ और ही कहानी बयां कर रहे थे।


सेक्टर-21ए नोएडा क्रिकेट स्टेडियम का रैन बसेरा:


सबसे पहले टीम सेक्टर-21ए स्थित नोएडा क्रिकेट स्टेडियम पहुंची। यहां महिला और पुरुषों के लिए अलग-अलग रैन बसेरा तो बनाया गया है, लेकिन सुरक्षा व्यवस्था नदारद दिखी। महिला रैन बसेरे में किसी भी महिला गार्ड की तैनाती नहीं पाई गई, जो महिला सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े करता है।


सेक्टर-49 समुदाय केंद्र : बोर्ड लगा, गेट पर ताले


इसके बाद टीम सेक्टर-49 स्थित समुदाय केंद्र में बने रैन बसेरे पर पहुंची। यहां रैन बसेरे का बोर्ड तो लगा मिला, लेकिन न तो कोई कर्मचारी मौजूद था और न ही कोई गार्ड। हैरानी की बात यह रही कि रैन बसेरे के गेट पर दो-दो ताले लगे हुए थे।
इसी रैन बसेरे से कुछ ही दूरी पर कई लोग फुटपाथ पर ठंड में ठिठुरते हुए सोते नजर आए, जिन्हें टीम ने कैमरे में कैद किया।


सेक्टर-66 मामूरा बारात घर : चौकीदार नहीं, अलाव के पास बेजुबान पहरेदार


तीसरा रैन बसेरा सेक्टर-66 स्थित मामूरा बारात घर में देखा गया। यहां भी हालात कुछ खास बेहतर नहीं थे। रैन बसेरे का बोर्ड लगा हुआ था और गेट खुला मिला, लेकिन कोई चौकीदार या कर्मचारी नजर नहीं आया।
हैरान करने वाली बात यह रही कि चौकीदारी के नाम पर जल रहे अलाव के पास एक बेजुबान जानवर पहरेदारी करता दिखा, जो व्यवस्थाओं की बदहाली की तस्वीर खुद बयां कर रहा था।



रैन बसेरों से कुछ दूरी पर सड़क किनारे फुटपाथ पर सो रहे लोगों से जब टीम ने बातचीत की, तो उन्होंने चौंकाने वाले आरोप लगाए। लोगों का कहना था कि वे रैन बसेरों में गए थे, लेकिन वहां मौजूद कर्मचारियों ने उन्हें ठहरने नहीं दिया।
कुछ लोगों ने बताया कि रैन बसेरों में न तो रुकने दिया जाता है और न ही खाने की कोई व्यवस्था है। मजबूरी में उन्हें फुटपाथ पर रात गुजारनी पड़ती है। काम मिला तो ठीक, वरना मंदिर या भंडारों में खाना खाकर गुजारा करते हैं।


नोएडा प्राधिकरण ने शहर में कहां-कहां बनाए हैं रैन बसेरे!


नोएडा प्राधिकरण ने कड़ाके की ठंड को देखते हुए जरूरतमंदों और बेघर लोगों को राहत देने के उद्देश्य से शहर में रैन बसेरे और अलाव जलाने का निर्णय लिया था। प्राधिकरण का दावा है कि 10 दिसंबर से नोएडा के सात स्थानों पर रैन बसेरे और 55 जगहों पर अलाव जलाए जा रहे हैं, ताकि सर्द रातों में कोई भी व्यक्ति खुले आसमान के नीचे सोने को मजबूर न हो।

हालांकि, इन दावों की सच्चाई जानने के लिए जब न्यूज डायरी टुडे की टीम ने ग्राउंड जीरो पर जाकर रियलिटी चेक किया, तो सामने आई तस्वीरें कुछ और ही कहानी बयां कर रही थीं। कागजों में व्यवस्थाएं भले ही पूरी दिखाई देती हों, लेकिन ज़मीनी स्तर पर हालात इसके बिल्कुल विपरीत नजर आए।तस्वीरें खुद गवाही दे रही हैं कि “तुम्हारी फाइलों में गांव का मौसम गुलाबी है, तुम्हारा यह दवा किताबी है।

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  • News Dairy Today Desk

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