✍️ योगेश राणा
न्यूज़ डायरी टुडे, नोएडा।
High Court: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सेक्टर-150 में सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की मौत के मामले में नोएडा पुलिस की कार्यप्रणाली पर सख्त टिप्पणी की है। न्यायालय ने गिरफ्तारी प्रक्रिया में गंभीर संवैधानिक उल्लंघन और सुप्रीम कोर्ट के डी.के. बसु (D.K. Basu) दिशा-निर्देशों की अनदेखी को आधार मानते हुए बड़ा फैसला सुनाया। बता दें कि इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आरोपी बिल्डर अभय कुमार(निदेशक,MZ Wiztown Planners) की हैबियस कॉर्पस (Habeas Corpus) याचिका स्वीकार कर ली है और कोर्ट ने उनकी हिरासत को अवैध करार देते हुए उन्हें तत्काल रिहा करने का आदेश दिया, जिसके बाद गुरुवार देर रात उन्हें जेल से रिहा कर दिया गया।
कहां हुई पुलिस से चूक!
अदालत ने कहा कि गिरफ्तारी के दौरान सुप्रीम कोर्ट द्वारा निर्धारित अनिवार्य दिशा-निर्देशों का पालन नहीं किया गया। पुलिस ने आरोपी के परिजनों या वकील को गिरफ्तारी मेमो जारी नहीं किया था, जिसे न्यायालय ने अनुच्छेद 21 और 22 का उल्लंघन माना है और हाईकोर्ट के इस फैसले से नोएडा पुलिस और प्रशासन की जांच प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। वहीं इस मामले में नॉलेज पार्क पुलिस ने पहले दो अन्य आरोपियों (लोटस ग्रीन बिल्डर के कर्मचारी) को भी गिरफ्तार किया था,जिन्हें स्थानीय सीजेएम कोर्ट से पहले ही जमानत मिल चुकी है।
मामले की पृष्ठभूमि:
16 जनवरी 2026 की रात सेक्टर-150 में एक निर्माणाधीन साइट के पास जलमग्न गड्ढे (बेसमेंट) में कार गिरने से युवराज की मौत हो गई थी। जांच में सामने आया कि बिल्डर ने बेसमेंट के लिए मिली अनुमति से कई गुना अधिक (लगभग 70 फीट) खुदाई कर दी थी,जो हादसे का मुख्य कारण बनी।