लग्जरी शौक बना अपराध की वजह, सेक्टर-113 पुलिस ने किया लुटेरे गैंग का भंडाफोड़।

:- दिन-रात घूमकर करते थे रेकी, मौका मिलते ही लूट

न्यूज़ डायरी, नोएडा।

नोएडा के सेक्टर-113 थाना पुलिस ने रेकी कर हथियार के बल पर लूटपाट करने वाले गिरोह का पर्दाफाश करते हुए तीन बदमाशों को सर्फाबाद क्षेत्र से गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक हाल ही में सर्फाबाद/जनसुविधा केंद्र क्षेत्र में हुई लूट की वारदात की जांच के दौरान यह गैंग सामने आया, जिसके सदस्य महज 18 से 20 वर्ष की उम्र के हैं।

डीसीपी यमुना प्रसाद के निर्देशन में गठित पुलिस टीमों ने सीसीटीवी फुटेज और स्थानीय इनपुट के आधार पर आरोपियों को दबोचा। गिरोह का मुख्य सरगना देवेश उर्फ कुक्की अभी फरार है, जिसकी गिरफ्तारी के लिए अलग से टीम लगाई गई है।

कैसे देते थे लूट की वारदातों को अंजाम

डीसीपी यमुना प्रसाद और एसीपी स्तर के अधिकारियों ने बताया कि गिरफ्तार बदमाशों की पहचान जाहिद अली उर्फ पपला, तरुण और पुष्पेंद्र उर्फ भोला के रूप में हुई है। ये तीनों दोपहिया वाहन से दिन और रात घूमकर ऐसी दुकानों और लोगों की रेकी करते थे, जहां नगद लेनदेन अधिक होता हो या कोई व्यक्ति कैश लेकर सुनसान जगह से गुजर रहा हो। रेकी के बाद मौका मिलने पर ये दुकान में घुसकर या राहगीर को घेरकर तमंचा दिखाकर कैश लूट लेते थे और विरोध होने पर लोगों को धमकाकर मौके से फरार हो जाते थे। पुलिस के मुताबिक ये इतने शातिर हैं कि वारदात के दौरान अपने मोबाइल फोन का इस्तेमाल नहीं करते थे, ताकि लोकेशन ट्रेस न हो सके।

लग्जरी लाइफस्टाइल के लिए करते थे लूट

पूछताछ में आरोपियों ने खुलासा किया कि वे लूट के पैसों से लग्जरी लाइफ जीते थे, महंगे शौक पूरे करते थे और घूमने‑फिरने के अलावा उधार आदि चुकाने में भी यह रकम उड़ाते थे। शुरुआती जांच में यह भी सामने आया है कि गिरोह के मुख्य सदस्य देवेश उर्फ कुक्की के खिलाफ पहले से ही 20 से अधिक आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं और पूरे गैंग का आपराधिक रिकॉर्ड खंगाला जा रहा है।

पुलिस का कहना है कि तीनों युवक कम पढ़े-लिखे हैं और आसान व त्वरित कमाई के लिए अपराध की राह पर चल पड़े, जबकि गिरोह का नेटवर्क नोएडा और आसपास के जिलों तक फैला हो सकता है जिसकी तस्दीक की जा रही है।

सेक्टर-113 पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से 95 हजार रुपये नकद और एक लैपटॉप बरामद किया है, जो हालिया लूट की वारदात से जुड़ा बताया जा रहा है। बरामदगी के सिलसिले में पीड़ितों से पहचान कराई जा रही है, ताकि अन्य मामलों में भी इन्हें लिंक किया जा सके।