✍️ योगेश राणा
:- नोएडा के लिए भी बन सकता है नजीर, गौशालाएं बनेंगी सप्लाई की नई धुरी”
न्यूज़ डायरी टुडे, नोएडा/दिल्ली
दिल्ली नगर निगम (MCD) ने वायु प्रदूषण कम करने और पेड़ों की कटाई को रोकने के लिए दाह संस्कार में लकड़ी के बजाय गोबर के उपलों (cow dung cakes) के इस्तेमाल को बढ़ावा देने का महत्वपूर्ण फैसला लिया है। हाल ही में मार्च 2026 में हुई MCD सदन की बैठक में दो श्मशान घाटों पर उपलों से अंतिम संस्कार शुरू करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई है। बता दें कि MCD ने शुरुआत में ज्वाला नगर, ग्रीन पार्क और द्वारका सेक्टर-24 जैसे श्मशान घाटों को पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर चुना है और निगम ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि कुछ श्मशान घाटों में केवल गोबर के उपलों का ही उपयोग किया जाए। भविष्य में केवल उन्हीं NGOs को एक्सटेंशन दिया जाएगा जो उपलों के इस्तेमाल को बढ़ावा देंगे और लकड़ी से दाह संस्कार में लगभग ₹2,500 का खर्च आता है, जबकि गोबर के उपलों या लट्ठों (logs) के इस्तेमाल से यह खर्च घटकर लगभग ₹2,300 रह सकता है।
नोएडा में इस्तेमाल की संभावना!
दिल्ली के इस मॉडल को नोएडा में भी अपनाया जा सकता है।नोएडा और ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण पहले से ही पर्यावरण अनुकूल पहलों पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं और दिल्ली की तरह नोएडा में भी वायु प्रदूषण (Air Pollution) एक बड़ी समस्या है। पारंपरिक लकड़ी के दाह संस्कार से बड़ी मात्रा में कार्बन मोनोऑक्साइड और PM10 उत्सर्जित होता हैं और नोएडा और ग्रेटर नोएडा में स्थित गौशालाएं इस मॉडल की सफलता के लिए रीढ़ की हड्डी साबित हो सकती हैं और गौशालाओं में उपले बनाने वाली मशीनें लगाकर श्मशान घाटों को सीधे सप्लाई दी जा सकती है और यह मॉडल गौशालाओं के लिए आय का एक नया स्रोत (Revenue Stream) बनेगा, जिससे वे स्वावलंबी बन सकेंगी।
गौशालाओं की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी!
MCD के मॉडल के अनुसार गौशालाओं को गोबर से लकड़ीनुमा लट्ठे (Go-Kashth) बनाने की मशीनें प्रदान की जाएंगी और यह डेयरी कॉलोनियों और गौशालाओं के अपशिष्ट प्रबंधन (Waste Management) की समस्या को हल करने में मदद करेगा और गौशालाएं सीधे उन संस्थाओं से जुड़ेंगी जो श्मशान घाटों का संचालन करती हैं।