CP लक्ष्मी सिंह की सख्ती : ग्रेटर नोएडा वेस्ट में 5 दिन की बच्ची का ₹2.60 लाख में सौदा, 3 गिरफ्तार

:- ममता का सौदा : ग्रेटर नोएडा वेस्ट के अस्पताल में 5 दिन की नवजात को ₹2.60 लाख में बेचा, 3 गिरफ्तार

न्यूज़ डायरी टुडे, नोएडा।

Noida : ग्रेटर नोएडा के बिसरख थाना क्षेत्र से मानवता को शर्मसार करने वाला एक मामला सामने आया है, जहाँ एक निजी अस्पताल में नवजात बच्ची को गोद देने के नाम पर लाखों रुपयों का सौदा किया जा रहा था। ए0एच0टी0 (Anti-Human Trafficking Unit) और बिसरख पुलिस ने एक संयुक्त ऑपरेशन चलाकर इस रैकेट का भंडाफोड़ किया और तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। बता दें कि दिनांक 21 मार्च 2026 को चाइल्ड हेल्पलाइन के जरिए पुलिस को सूचना मिली कि बिसरख क्षेत्र के एक निजी अस्पताल के कर्मचारी एक बच्ची को गोद दिलाने के बदले ₹2,60,000 की मांग कर रहे हैं। पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तुरंत जाल बिछाया और आवेदिका से संपर्क कर बच्ची को सुरक्षित बरामद किया और पुलिस जांच में चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि इस अनैतिक कार्य में अस्पताल की मालकिन खुद शामिल थी।गिरफ्तार किए गए आरोपियों की पहचान यशिका गर्ग निजी अस्पताल की मालकिन (पुत्री अनिल गर्ग),गजेन्द्र सिंह अस्पताल का सफाई कर्मी (पुत्र दरिया प्रसाद),रंजीत सिंह: ऑपरेशन थियेटर (OT) टेक्नीशियन (पुत्र नत्थू) के रूप में हुई है और पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए बच्ची को सकुशल रेस्क्यू किया। बाल कल्याण समिति (CWC) के आदेशानुसार, बच्ची को उचित देखभाल के लिए साईं कृपा शेल्टर होम भेज दिया गया है।

बच्ची को गोद दिलाने के नाम पर वसूली: ग्रेटर नोएडा पुलिस की बड़ी कार्रवाई, अस्पताल संचालिका सलाखों के पीछे।

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, यह कार्रवाई एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट (AHTU), चाइल्ड हेल्पलाइन (1098) और बिसरख पुलिस की संयुक्त टीम द्वारा की गई है और जांच में सामने आया कि आरोपियों ने आवेदिका को बच्ची “गोद” दिलाने का झांसा दिया था, लेकिन इसके बदले में वे ₹2,60,000 से ₹2,65,000 की अवैध मांग कर रहे थे और पुलिस ने बताया कि जैसे ही आरोपियों ने बच्ची को सौंपने का प्रयास किया, घेराबंदी कर रही टीम ने उन्हें रंगे हाथों पकड़ लिया और बच्ची को सुरक्षित बरामद किया है और प्रारंभिक जांच में बिसरख स्थित नौजीवन अस्पताल (Navjeevan Hospital) की संलिप्तता पाई गई है, जिसकी मालकिन यशिका गर्ग (हर्षिका) को मुख्य आरोपियों में शामिल पाया गया है और पुलिस का मानना है कि ये लोग पहले भी अवैध रूप से बच्चों की खरीद-फरोख्त में शामिल रहे होंगे। अधिकारियों ने संकेत दिया है कि इस मामले की गहराई से जांच की जा रही है ताकि किसी बड़े बच्चा चोरी या बिक्री गिरोह का खुलासा किया जा सके और अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि बच्ची को बाल कल्याण समिति (CWC) के संरक्षण में सुरक्षित भेज दिया गया है और सभी अभियुक्तों को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका।