:- कैश कांड में घिरे इलाहाबाद हाई कोर्ट के जज जस्टिस यशवंत वर्मा का इस्तीफा, महाभियोग की कार्यवाही के बीच राष्ट्रपति को भेजा पत्र।
Legal : इलाहाबाद हाई कोर्ट के जस्टिस यशवंत वर्मा ने 9 अप्रैल 2026 को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को अपना इस्तीफा सौंप दिया है। यह इस्तीफा उनके दिल्ली स्थित आवास पर पिछले साल भारी मात्रा में नकदी मिलने के बाद शुरू हुई महाभियोग (impeachment) की प्रक्रिया के बीच आया है। बता दें कि जस्टिस यशवंत वर्मा ने राष्ट्रपति को भेजे पत्र में लिखा, “मैं उन कारणों का उल्लेख कर आपके कार्यालय पर बोझ नहीं डालना चाहता जिन्होंने मुझे यह पत्र लिखने के लिए मजबूर किया है, लेकिन मैं अत्यंत दुख के साथ तत्काल प्रभाव से इलाहाबाद हाई कोर्ट के न्यायाधीश पद से अपना इस्तीफा दे रहा हूँ” और यह विवाद मार्च 2025 में शुरू हुआ था जब दिल्ली स्थित उनके सरकारी आवास में आग लगने के बाद फायर ब्रिगेड को वहां भारी मात्रा में जले हुए ₹500 के नोटों की गड्डियां मिली थीं और इस मामले में भ्रष्टाचार के आरोपों के चलते संसद में उन्हें हटाने के लिए महाभियोग प्रस्ताव लाया गया था।अगस्त 2025 में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने 146 सांसदों द्वारा हस्ताक्षरित इस प्रस्ताव को स्वीकार कर एक तीन सदस्यीय जांच समिति गठित की थी और जस्टिस वर्मा ने इन जांच समितियों की वैधता को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी, लेकिन 16 जनवरी 2026 को शीर्ष अदालत ने उनकी याचिकाओं को खारिज कर दिया था और विवाद के बाद उन्हें दिल्ली हाई कोर्ट से इलाहाबाद हाई कोर्ट स्थानांतरित कर दिया गया था, जहाँ उन्होंने 5 अप्रैल 2025 को शपथ ली थी, हालांकि उन्हें कोई न्यायिक कार्य नहीं सौंपा गया था लेकिन अब इस्तीफे के बाद अब संसद में उनके खिलाफ चल रही महाभियोग की कार्यवाही स्वतः ही समाप्त (lapse) हो जाएगी, क्योंकि वह अब जज के पद पर नहीं हैं।