October 12, 2026

Noida Cyber Crime : नोएडा में अंतरराष्ट्रीय ‘टेक सपोर्ट’ स्कैम का भंडाफोड़, विदेशी नागरिकों को ठगने वाले 16 साइबर अपराधी गिरफ्तार।

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न्यूज़ डायरी टुडे, नोएडा।

Noida : गौतमबुद्धनगर कमिश्नरेट की साइबर क्राइम थाना पुलिस (सेक्टर-36) ने एक बड़े अंतरराष्ट्रीय गिरोह का पर्दाफाश करते हुए 16 साइबर अपराधियों को गिरफ्तार किया है। यह गिरोह गूगल और सोशल मीडिया पर फर्जी ‘टेक सपोर्ट’ के विज्ञापन चलाकर विदेशी नागरिकों को अपना शिकार बनाता था। बता दें कि गौतमबुद्धनगर पुलिस ने एक संगठित गिरोह को पकड़ा है जो इंटरनेट पर विज्ञापन चलाकर खुद को नामी कंपनियों का कस्टमर केयर बताकर विदेशियों से करोड़ों की ठगी कर रहा था। पुलिस ने इनके पास से मोबाइल और लैपटॉप बरामद किए हैं, जिनसे करोड़ों रुपये के अवैध लेनदेन के सबूत मिले हैं और थाना साइबर क्राइम ने इस मामले में मुकदमा पंजीकृत किया गया है और गिरफ्तार किए गए 16 अभियुक्तों से पूछताछ जारी है ताकि इस सिंडिकेट के अन्य नेटवर्क और मास्टरमाइंड का पता लगाया जा सके।

ठगी का तरीका!

अभियुक्त गूगल और सोशल मीडिया पर ‘कस्टमर केयर’ और ‘टैक्स सपोर्ट’ के नाम पर Paid (सशुल्क) विज्ञापन चलाते थे और विज्ञापनों में फर्जी टोल-फ्री नंबर दिए जाते थे। जब कोई विदेशी नागरिक मदद के लिए इन नंबरों पर कॉल करता, तो कॉल सीधे अभियुक्तों के लैपटॉप पर लगे कॉलिंग सॉफ्टवेयर पर आती थी और कॉल रिसीव करते ही अपराधी खुद को टेक्निकल सपोर्ट एजेंट बताते थे। वे पीड़ितों को डराते थे कि उनका कंप्यूटर डिवाइस हैक हो गया है और अपराधी ‘स्क्रीन शेयरिंग ऐप’ के जरिए पीड़ित के कंप्यूटर का एक्सेस ले लेते थे। डर पैदा करने के लिए वे स्क्रीन को ‘ब्लैक’ (काला) कर देते थे और फिर उनके बैंकिंग क्रेडेंशियल चोरी कर लेते थे और यदि खाते में कम पैसे होते थे, तो वे 100 से 500 USD वसूलते थे। बड़ी रकम होने पर कॉल को अपने ‘सीनियर’ को ट्रांसफर कर देते थे और ठगी गई राशि को पकड़े जाने के डर से क्रिप्टो करेंसी के माध्यम से मंगवाया जाता था और फिर आपस में बांट लिया जाता था।

डीसीपी साइबर गौतमबुद्धनगर ने क्या कुछ बताया इस गिरोह के बारे में!

डीसीपी साइबर शैव्या गोयल ने बताया कि अभियुक्त गूगल और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर ‘पेयड’ विज्ञापन (Paid Ads) चलाते थे, जिसमें फर्जी टोल-फ्री नंबर दिए जाते थे। जब कोई विदेशी नागरिक तकनीकी सहायता के लिए सर्च करता, तो उसे ये विज्ञापन दिखाई देते थे और कॉल आने पर ये लोग खुद को टेक्निकल सपोर्ट एजेंट बताकर पीड़ित को डराते थे कि उनका कंप्यूटर हैक हो चुका है। इसके बाद वे ‘एनीडेस्क’ या ‘टीमव्यूअर’ जैसे ऐप्स के जरिए स्क्रीन का एक्सेस ले लेते थे और पीड़ित के मन में वास्तविक हैकिंग का डर पैदा करने के लिए ये कंप्यूटर स्क्रीन को पूरी तरह ‘ब्लैक’ कर देते थे और इसी दौरान वे पीड़ित की बैंकिंग जानकारी और खाते में मौजूद रकम का पता लगा लेते थे और खाते की जमा पूंजी के आधार पर वे $100 से $2,000 (लगभग ₹8,000 से ₹1.6 लाख) तक वसूलते थे। अधिक धन होने पर मामले को अपने ‘सीनियर’ को ट्रांसफर कर देते थे। यह पूरी धनराशि क्रिप्टो करेंसी के माध्यम से प्राप्त की जाती थी ताकि पकड़े न जा सकें और पुलिस ने इन आरोपियों को नोएडा के सेक्टर 16,ए-23 से गिरफ्तार किया गया है और आरोपियों के कब्जे से भारी मात्रा में लैपटॉप, मोबाइल फोन, इंटरनेट राउटर और माइक्रोफोन हेडसेट बरामद किए गए हैं।

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