✍️ योगेश राणा।
:- सुप्रीम कोर्ट का केंद्र को नोटिस : धर्म के नाम पर पशु बलि रोकने की याचिका पर 4 सप्ताह में मांगा जवाब
Supreme Court : सुप्रीम कोर्ट ने 12 मार्च 2026 को एक जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया है, जिसमें मंदिरों और धार्मिक अनुष्ठानों में दी जाने वाली पशु बलि पर देशव्यापी प्रतिबंध लगाने की मांग की गई है। बता दें कि जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने अधिवक्ता श्रुति बिष्ट द्वारा दायर याचिका पर यह नोटिस जारी किया। अदालत ने केंद्र सरकार को अपना जवाब दाखिल करने के लिए चार सप्ताह का समय दिया है और याचिकाकर्ता ने पशु क्रूरता निवारण अधिनियम (PCA), 1960 की धारा 28 की संवैधानिक वैधता को चुनौती दी है। यह धारा धार्मिक समुदायों को उनकी परंपराओं के अनुसार पशुओं की हत्या करने की छूट देती है, जिसे याचिका में क्रूर और अमानवीय बताया गया है और इससे पहले भी सुप्रीम कोर्ट ने ऐसे मामलों में परंपराओं का हवाला देते हुए हस्तक्षेप से इनकार किया था, लेकिन इस नई याचिका पर केंद्र का जवाब भविष्य में इस कानून की दिशा तय कर सकता है।
याचिका के प्रमुख तर्क!
याचिका में तर्क दिया गया है कि बेजुबान जानवरों को भी जीने का अधिकार है और धार्मिक मान्यताओं के नाम पर उनकी हत्या करना संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता) और 21 (जीवन का अधिकार) का उल्लंघन है और याचिका में देश के विभिन्न हिस्सों जैसे हिमालयी क्षेत्र,उत्तर-पूर्व भारत,ओडिशा,बंगाल और दक्षिण भारत में प्रचलित बलि प्रथाओं का उल्लेख किया गया है और याचिकाकर्ता का आरोप है कि मंदिरों में होने वाली पशु बलि को रोकने के लिए वर्तमान में पर्याप्त सरकारी कदम नहीं उठाए जा रहे हैं।