नोएडा प्राधिकरण की कार्यशैली पर उठे गंभीर सवाल
Noida News : Noida Authority देश के सबसे अमीर और स्वयं वित्त पोषित शहरी निकायों में गिना जाता है। जमीन आवंटन, भवन नक्शा पास करने, लीज शुल्क और अन्य विकास शुल्कों से प्राधिकरण हर साल अरबों रुपये का राजस्व अर्जित करता है। इसके बावजूद जब शहर में बड़ी विकास परियोजनाओं, बुनियादी ढांचे के विस्तार, किसानों के मुआवजे या जनसुविधाओं से जुड़े फैसलों की बात आती है, तो अक्सर जिम्मेदारी राज्य शासन यानी लखनऊ पर डाल दी जाती है। इस प्रशासनिक रवैये ने अब स्थानीय जनता और विशेषज्ञों के बीच गंभीर बहस को जन्म दे दिया है।
स्वयं वित्त पोषित संस्था होने के बावजूद शासन पर निर्भरता
विशेषज्ञों का कहना है कि नोएडा प्राधिकरण के पास आर्थिक रूप से फैसले लेने की पूरी क्षमता है, लेकिन अधिकांश महत्वपूर्ण फाइलें और नीतिगत निर्णय महीनों तक शासन स्तर पर लंबित रखे जाते हैं। जब भी शहर में किसी समस्या को लेकर सवाल उठते हैं, तो अधिकारियों की ओर से “मामला शासन स्तर पर विचाराधीन है” कहकर जिम्मेदारी से बचने की कोशिश की जाती है। प्रशासनिक विश्लेषकों के अनुसार यह व्यवस्था स्थानीय जवाबदेही से बचने का माध्यम बन चुकी है, जहां जनता टैक्स देती है, प्राधिकरण मुनाफा कमाता है, लेकिन निर्णय लेने की प्रक्रिया पूरी तरह नौकरशाही और शासन पर केंद्रित रहती है।
स्थानीय लोकतंत्र की कमी बना बड़ा मुद्दा
नोएडा में सबसे बड़ा सवाल स्थानीय लोकतांत्रिक व्यवस्था को लेकर उठ रहा है। दिल्ली, गाजियाबाद या अन्य बड़े शहरों की तरह यहां नगर निगम, मेयर या पार्षद व्यवस्था मौजूद नहीं है। शहर का पूरा प्रशासनिक और विकास तंत्र आईएएस अधिकारियों और प्राधिकरण के सीईओ के नियंत्रण में संचालित होता है। स्थानीय विधायक और सांसद केवल बोर्ड बैठकों में सुझाव दे सकते हैं, लेकिन अंतिम निर्णय लेने का अधिकार नौकरशाही के पास ही रहता है। यही वजह है कि आम जनता की समस्याएं सीधे निर्णय प्रक्रिया तक नहीं पहुंच पातीं।
‘नौकरशाही का गढ़ बन चुका है नोएडा’ : विशेषज्ञ
प्रशासनिक मामलों के जानकारों का मानना है कि यह व्यवस्था भारतीय संविधान के 74वें संशोधन की मूल भावना के विपरीत है, जिसमें शहरी निकायों को स्वायत्तता और स्थानीय लोकतांत्रिक अधिकार देने की बात कही गई थी। विशेषज्ञ इस मॉडल को “बिना जवाबदेही वाला पूंजीवादी प्रशासन” और “नौकरशाही का गढ़” बताते हैं, जहां विकास योजनाओं में जनता की भागीदारी बेहद सीमित हो चुकी है।
सड़क, पानी, सीवर और रजिस्ट्री की समस्याओं से जनता परेशान : डॉ आश्रय गुप्ता
समाजवादी पार्टी के महानगर अध्यक्ष डॉ आश्रय गुप्ता ने नोएडा प्राधिकरण की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि शहर की आम जनता सड़क, पानी, सीवर, बिजली और रजिस्ट्री जैसी बुनियादी समस्याओं से जूझ रही है। कई सेक्टरों में जलभराव, टूटी सड़कें और सीवर जाम जैसी समस्याएं लगातार बनी हुई हैं, लेकिन अधिकारी जनता की समस्याओं पर गंभीरता नहीं दिखा रहे। उन्होंने आरोप लगाया कि प्राधिकरण की नीतियां आम नागरिकों के बजाय बड़े उद्योगपतियों और बिल्डर लॉबी को फायदा पहुंचाने पर केंद्रित दिखाई देती हैं।
“जनता त्रस्त, अधिकारी मौन” : डॉ आश्रय गुप्ता
आश्रय गुप्ता ने कहा कि हजारों लोग फ्लैट और प्लॉट रजिस्ट्री से जुड़ी परेशानियों का सामना कर रहे हैं, लेकिन उनकी सुनवाई नहीं हो रही। उन्होंने आरोप लगाया कि नोएडा में लोकतांत्रिक ढांचा नहीं होने के कारण जनता की आवाज सीधे प्रशासन तक नहीं पहुंचती। उन्होंने मांग की कि शहर में स्थानीय स्वशासन व्यवस्था लागू की जाए और जनता के चुने हुए प्रतिनिधियों को विकास कार्यों और प्रशासनिक फैसलों में अधिकार दिए जाएं, ताकि जवाबदेही सुनिश्चित हो सके और शहर की समस्याओं का समाधान तेजी से हो सके।