Noida News : देशभर में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में एक बार फिर बड़ी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियों — Indian Oil Corporation, Bharat Petroleum Corporation और Hindustan Petroleum Corporation — ने शुक्रवार सुबह से पेट्रोल और डीजल के दामों में करीब ₹3 प्रति लीटर तक की वृद्धि लागू कर दी है।
यह फैसला पिछले लगभग चार वर्षों में ईंधन कीमतों में हुआ सबसे बड़ा संशोधन माना जा रहा है। इससे पहले कंपनियां अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव के बावजूद लंबे समय तक खुद नुकसान उठाकर कीमतों को स्थिर बनाए हुए थीं।
प्रमुख शहरों में पेट्रोल-डीजल के नए दाम
देश के अलग-अलग शहरों में टैक्स और स्थानीय शुल्क के कारण कीमतों में अंतर देखने को मिला है।
नई दरों के अनुसार:
दिल्ली
- पेट्रोल: ₹97.77 प्रति लीटर
- डीजल: ₹90.67 प्रति लीटर
मुंबई
- पेट्रोल: ₹106.68 प्रति लीटर
कोलकाता
- पेट्रोल: ₹108.70 प्रति लीटर
चेन्नई
- पेट्रोल: ₹103.67 प्रति लीटर
बेंगलुरु
- पेट्रोल: ₹106.21 प्रति लीटर
आखिर क्यों बढ़े पेट्रोल और डीजल के दाम?
तेल कंपनियों के अनुसार अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में लगातार तेजी इसका मुख्य कारण है। पिछले कुछ हफ्तों में ब्रेंट क्रूड की कीमतें तेजी से बढ़ी हैं, जिससे भारत पर आयात लागत का दबाव बढ़ गया।
बढ़ोतरी की बड़ी वजहें
- मध्य पूर्व में बढ़ता भू-राजनीतिक तनाव
- Hormuz Strait क्षेत्र में अस्थिरता
- भारत के क्रूड आयात बिल में तेजी
- तेल कंपनियों को लगातार हो रहा भारी घाटा
सूत्रों के मुताबिक, तेल कंपनियों को हर महीने हजारों करोड़ रुपये का अंडर-रिकवरी नुकसान झेलना पड़ रहा था। ऐसे में लंबे समय तक पुरानी कीमतों पर बिक्री जारी रखना मुश्किल हो गया था।
आम आदमी की जेब पर कितना असर?
पेट्रोल और डीजल की कीमतों में वृद्धि का सीधा असर आम उपभोक्ताओं की रोजमर्रा की जिंदगी पर पड़ने वाला है।
क्या-क्या होगा महंगा?
- सब्जियां और फल
- दूध और खाद्य सामग्री
- ट्रांसपोर्ट और लॉजिस्टिक्स
- टैक्सी और ऑटो किराया
- ऑनलाइन डिलीवरी सेवाएं
विशेषज्ञों का मानना है कि मध्यम वर्गीय परिवारों के मासिक खर्च में ₹300 से ₹500 तक अतिरिक्त बोझ बढ़ सकता है।
महंगाई पर भी बढ़ेगा दबाव
ईंधन कीमतों में वृद्धि के बाद देश में महंगाई दर बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। अर्थशास्त्रियों के अनुसार उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) पर इसका असर दिखाई दे सकता है।
संभावित असर
- महंगाई दर में 0.2% से 0.4% तक बढ़ोतरी
- परिवहन लागत में इजाफा
- छोटे कारोबार और लॉजिस्टिक्स कंपनियों पर दबाव
- कृषि और उद्योग क्षेत्र की लागत में वृद्धि
सरकार और तेल कंपनियों का क्या कहना है?
सरकारी सूत्रों के मुताबिक यह फैसला तेल कंपनियों का व्यावसायिक निर्णय है। हालांकि केंद्र सरकार लगातार हालात पर नजर बनाए हुए है।
ऊर्जा विशेषज्ञों का कहना है कि यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें और बढ़ती हैं, तो आने वाले समय में ईंधन कीमतों में फिर संशोधन देखने को मिल सकता है।
भारत क्यों है ज्यादा प्रभावित?
भारत अपनी जरूरत का लगभग 85 प्रतिशत कच्चा तेल विदेशों से आयात करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें बढ़ने का सीधा असर भारतीय अर्थव्यवस्था पर पड़ता है।
महत्वपूर्ण आंकड़े
- भारत की पेट्रोलियम खपत : लगभग 220 मिलियन मीट्रिक टन
- खुदरा कीमतों में टैक्स की हिस्सेदारी : 50% से अधिक
- रोजाना करोड़ों लीटर ईंधन की खपत