‘नक्षत्र मेडिटेशन’ पर नया दावा: डॉ अजय भाभी ने बताई अपनी खोज, नक्षत्र मेडिसिन पर किया काम।

नक्षत्र और ज्योतिष से जुड़ी अवधारणाओं को लेकर एक नया दावा सामने आया है। डॉ अजय भाभी ने ‘नक्षत्र मेडिटेशन’ नामक सिद्धांत को अपनी खोज बताते हुए कहा है कि यह पारंपरिक ज्योतिष से अलग एक नई दिशा में काम करता है।

न्यूज़ डायरी टुडे, नोएडा
ज्योतिष और वैदिक परंपराओं के क्षेत्र में एक बार फिर नए दावे चर्चा में हैं। डॉ अजय भाभी ने ‘नक्षत्र मेडिटेशन’ को अपनी खोज बताते हुए कहा है कि इस विषय का उल्लेख अब तक कहीं भी नहीं मिलता और यह एक स्वतंत्र शोध का परिणाम है।
उन्होंने दावा किया कि नक्षत्रों का वर्णन प्राचीन ग्रंथों, विशेष रूप से Rigveda में मिलता है, जहां 27 नक्षत्रों का उल्लेख किया गया है। परंपरागत ज्योतिष में इन्हीं नक्षत्रों के आधार पर व्यक्ति का नाम, राशि और दशा आदि निर्धारित की जाती है।

‘नक्षत्र मेडिटेशन’ क्या है?
डॉ अजय भाभी के अनुसार, ‘नक्षत्र मेडिटेशन’ एक ऐसी अवधारणा है, जो नक्षत्रों से निकलने वाली ऊर्जा या प्रभाव को दर्शाती है। उनका कहना है कि यह सिद्धांत पारंपरिक ज्योतिष से आगे जाकर मानव जीवन और स्वास्थ्य पर प्रभाव डालता है। हालांकि, इस दावे को लेकर किसी मान्यता प्राप्त वैज्ञानिक संस्था या शोध द्वारा पुष्टि नहीं की गई है।

जीवन का मकसद जानने का नया फॉर्मूला! शोध को लेकर बड़ा दावा

डॉ अजय भाभी अपने शोध के हवाले से यह भी दावा करते हैं कि ‘नक्षत्र मेडिटेशन’ के माध्यम से व्यक्ति के जीवन के उद्देश्य को समझा जा सकता है। उनके अनुसार, हर इंसान का जन्म किसी विशेष कारण और लक्ष्य के साथ होता है, जिसे नक्षत्रों के प्रभाव और उनकी ऊर्जा के आधार पर पहचाना जा सकता है। उनका कहना है कि इस पद्धति के जरिए यह जानने की कोशिश की जाती है कि व्यक्ति इस जीवन में क्यों आया है, उसके जीवन का मूल उद्देश्य क्या है और उसे किस दिशा में आगे बढ़ना चाहिए।अजय भाभी का दावा है कि यह अवधारणा पारंपरिक ज्योतिष से आगे बढ़कर व्यक्ति को आत्म-समझ और जीवन की दिशा तय करने में मदद कर सकती है।

उनके मुताबिक, यदि इस पद्धति पर और गहराई से काम किया जाए और इसे व्यवस्थित रूप से विकसित किया जाए, तो यह आने वाली पीढ़ियों के लिए एक मार्गदर्शक सिद्ध हो सकती है। उनका यह भी कहना है कि भविष्य में ‘नक्षत्र मेडिटेशन’ और इस तरह के शोध मानव जीवन को समझने और बेहतर बनाने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।

2012 में लिखी किताब , डॉ अजय भाभी ने किया पुनः प्रकाशन।
अजय भाभी ने बताया कि उन्होंने इस विषय पर वर्ष 2012 में एक पुस्तक लिखी थी, जिसे The Times of India के साथ मिलकर उन्होंने प्रकाशित किया था। उनका कहना है कि इस पुस्तक का हाल ही में पुनः प्रकाशन किया गया है और इसमें उनके शोध को विस्तार से समझाया गया है।

आध्यात्मिक परंपरा से जुड़ाव
उन्होंने खुद को महावतार बाबा जी की परंपरा से जुड़ा बताया और कहा कि उन्हें यह ज्ञान आध्यात्मिक साधना के माध्यम से प्राप्त हुआ है। उनके अनुसार, यह विधि उन्हें ‘कृपा’ के रूप में प्राप्त हुई, जिसके आधार पर उन्होंने आगे शोध किया।

‘नक्षत्र मेडिटेशन’ पर काम
अजय भाभी ने यह भी दावा किया कि वह ‘नक्षत्र मेडिटेशन’ नाम से एक नई पद्धति पर काम कर रहे हैं, जिसमें नक्षत्रों के प्रभाव के आधार पर स्वास्थ्य संबंधी समाधान देने की कोशिश की जा रही है।