स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप : बिसरख सीएचसी प्रभारी व डिप्टी CMO पर गिरी गाज, शासन ने मेरठ मंडल अटैच कर सौंपी जांच।

बिसरख सीएचसी में रिश्वत मांगने के गंभीर आरोपों पर शासन ने बड़ी कार्रवाई की है। डिप्टी सीएमओ डॉ. सचिंद्र कुमार मिश्रा को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर मेरठ मंडल कार्यालय से अटैच कर दिया गया है। अब इस पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच होगी।

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नोएडा न्यूज़ | उत्तर प्रदेश शासन ने भ्रष्टाचार के खिलाफ एक बड़ी कार्रवाई करते हुए गौतमबुद्ध नगर स्वास्थ्य विभाग के डिप्टी सीएमओ को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग की प्रमुख सचिव वी हेकाली झिमोमी ने स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई का पत्र जारी किया है। बता दें कि यह पूरी कार्रवाई बिसरख सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) में तैनात रहे प्रभारी और लेवल-3 के चिकित्सा अधिकारी डाॅ. सचिंद्र कुमार मिश्रा के खिलाफ की गई है। उन पर आरोप है कि उन्होंने बिसरख में ही एक अपंजीकृत क्लिनिक का संचालन करने वाले पवन चौधरी को फोन कर अवैध रूप से पैसों (रिश्वत) की मांग की थी। फोन पर रिश्वत मांगने का यह मामला शासन तक पहुँचने के बाद इसे गंभीरता से लिया गया और उत्तर प्रदेश सरकारी सेवक नियमावली का पालन न करने के आरोप में उन्हें सस्पेंड कर दिया गया।प्रमुख सचिव द्वारा जारी पत्र के अनुसार, निलंबन की यह दंडात्मक कार्रवाई 22 अक्टूबर 2026 को ही अमल में ला दी गई थी। हालांकि, स्वास्थ्य विभाग गौतमबुद्ध नगर के कार्यालय को इसका डिजिटल लेटर आज यानी मंगलवार (3 नवंबर) को प्राप्त हुआ है। निलंबन अवधि के दौरान डॉ. मिश्रा को अपर निदेशक चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, मेरठ मंडल के कार्यालय से अटैच किया गया है।

मेरठ मंडल करेगा मामले की उच्चस्तरीय जांच

इस संबंध में मेरठ मंडल के अपर निदेशक डाॅ. मनोज सेन ने निलंबन की पुष्टि करते हुए बताया कि शासन की ओर से लेवल-3 के अधिकारी डॉ. सचिंद्र कुमार मिश्रा पर कार्रवाई का पत्र उनके कार्यालय को मिल चुका है। शासन के उच्च अधिकारियों के निर्देशानुसार जल्द ही एक विशेष टीम का गठन कर इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच शुरू कर दी जाएगी।

सीएमओ का बयान: पत्र मिलते ही होगी अग्रिम कार्रवाई

गौतमबुद्ध नगर के मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) डाॅ. मदन मोहन मणि त्रिपाठी ने बताया कि जैसे ही शासन का आधिकारिक पत्र उनके कार्यालय को भौतिक या औपचारिक रूप से प्राप्त होगा, नियमों के तहत आगे की विभागीय कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल जिला स्तर पर पत्र के पूरी तरह प्रोसेस होने का इंतजार किया जा रहा है।इस कार्रवाई के बाद से जिले के स्वास्थ्य महकमे और अवैध रूप से चल रहे क्लीनिक संचालकों के बीच हड़कंप मचा हुआ है।

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