✍️ योगेश राणा
:- ट्रैफिक सेल से लेकर वर्क सर्किल-10 तक SIT की पैनी नजर, कई विभाग जांच के घेरे में !
न्यूज़ डायरी टुडे, नोएडा।
नोएडा सेक्टर 150 में एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर की सड़क हादसे में मौत के बाद उत्तर प्रदेश शासन ने कड़ा रुख अपनाया है। सीईओ लोकेश एम (Lokesh M) को उनके पद से हटाकर ‘प्रतीक्षारत’ (waitlist) कर दिया गया है परन्तु यह कार्यवाही यही रुकने वाली नहीं है क्योंकि आने वाले दिनों में इस कारवाई के रडार में कई अधिकारी आने वाले हैं और ऐसा हम इस लिए कह रहें हैं क्योंकि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर गठित तीन सदस्यों वाली उच्च स्तरीय विशेष जांच टीम(SIT)को अगले पांच दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपेगी, जिसके आधार पर लापरवाही बरतने वाले अन्य वरिष्ठ और कनिष्ठ अधिकारियों पर गाज गिर सकती है।
SIT के रडार पर कौन कौन अधिकारी हैं!
SIT की जांच मुख्य रूप से प्रशासनिक लापरवाही और सुरक्षा मानकों की अनदेखी पर केंद्रित है। इसमें शामिल रडार पर प्रमुख नाम और विभाग हैं। सड़क सुरक्षा, रिफ्लेक्टर और चेतावनी बोर्ड न लगाने के लिए ट्रैफिक सेल के वरिष्ठ अधिकारियों की भूमिका की जांच की जा रही है और स्थानीय निवासियों ने आरोप लगाया है कि उन्होंने पहले भी सुरक्षा खतरों की शिकायतें की थीं, लेकिन वर्क सर्किल-10 के अधिकारियों ने जिम्मेदारी एक-दूसरे पर डाल दी और कोई सुधारात्मक कदम नहीं उठाए और शासन ने उन सभी अधिकारियों और कर्मचारियों को कारण बताओ नोटिस (Show-cause notice) जारी किया है जो सेक्टर-150 में ट्रैफिक प्रबंधन और सुरक्षा व्यवस्था के लिए जिम्मेदार थे और डेवलपर की निर्माण गतिविधियों,आवंटन और सुरक्षा इंतजामों की भी गहन समीक्षा की जा रही है।
अब तक हुई कार्रवाई!
इस मामले में नोएडा प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (CEO) लोकेश एम को उनके पद से हटाकर प्रतीक्षारत (Waitlist) कर दिया गया है और इसके पहले सीईओ ने नोएडा ट्रैफिक सेल के जूनियर इंजीनियर नवीन कुमार की सेवाओं को तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दिया था।
SIT के सदस्य और समय सीमा-?
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने तीन सदस्यीय SIT का गठन किया है, जिसे 5 दिनों के भीतर अपनी विस्तृत रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया गया है और इस एसआईटी टीम का नेतृत्व
भानु भास्कर अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (ADG), मेरठ जोन (अध्यक्ष) और मेरठ मंडलायुक्त तथा PWD के मुख्य अभियंता(Chief Engineer) सदस्य के रूप में सम्मिलित
हैं और इस (SIT)एसआईंटी टीम को पांच दिनों में उन सभी
दृष्टि कोण उन से परिस्थितियों और लापरवाही की पहचान करेगी जिसके कारण 27 वर्षीय इंजीनियर की कार पानी से भरे गड्ढे में गिर गई और वह करीब दो घंटे तक मदद के लिए पुकारता रहा।