शिकायत या साजिश ? शिकायतकर्ता की मंशा पर सवाल।

✍️ योगेश राणा

न्यूज़ डायरी टुडे,नोएडा।

नव वर्ष की शुरुआत के साथ ही नोएडा प्राधिकरण द्वारा भू-माफियाओं के खिलाफ चलाया जा रहा अभियान पूरी आक्रामकता के साथ जारी है। अवैध कॉलोनियों, अतिक्रमित सरकारी जमीनों और अनधिकृत निर्माणों पर “पीले पंजे” की कार्रवाई लगातार की जा रही है। इस सघन अभियान के तहत अब तक अरबों रुपये मूल्य की सरकारी भूमि को भू-माफियाओं के कब्जे से मुक्त कराया जा चुका है, जिससे माफिया नेटवर्क में खलबली मची हुई है।
प्रत्यक्ष टकराव में विफल होने के बाद अब कुछ भू-माफिया नए हथकंडे अपना रहे हैं। सूत्रों के अनुसार, ये माफिया सीधे विरोध करने के बजाय ‘छद्म युद्ध’ की रणनीति पर उतर आए हैं। इसके तहत तथाकथित समाजसेवियों और अन्य जनपदों के जनप्रतिनिधियों को आगे कर प्राधिकरण की कानूनी कार्रवाई में बाधा डालने और उसे राजनीतिक रंग देने का प्रयास किया जा रहा है।


बताया जा रहा है कि इन भू-माफियाओं की रणनीति यह है कि बाहरी जिलों के प्रभावशाली लोगों को गुमराह कर कार्रवाई को ‘गरीबों का उत्पीड़न’ बताकर रोकने का दबाव बनाया जाए। इसी कड़ी में नोएडा प्राधिकरण में इन दिनों एक शिकायत चर्चा का विषय बनी हुई है, जिसमें शिकायतकर्ता किसी अन्य जनपद का निवासी है, लेकिन उसने नोएडा प्राधिकरण के अधिकारियों के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है।
मामले को लेकर रोचक पहलू यह है कि शिकायतकर्ता जांच किसी निष्पक्ष और स्वतंत्र एजेंसी से कराने की मांग कर रहा है, लेकिन साथ ही वह पहले प्राधिकरण के एक वरिष्ठ अधिकारी को हटाने पर जोर दे रहा है। इस विरोधाभास ने प्रशासनिक हलकों में कई सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि जांच वास्तव में निष्पक्ष और स्वतंत्र एजेंसी से करानी है, तो फिर जांच से पूर्व किसी वरिष्ठ अधिकारी को हटाने की मांग क्यों की जा रही है—यह प्रश्न शिकायतकर्ता की मंशा और पृष्ठभूमि पर भी संदेह पैदा कर रहा है।
सूत्रों का कहना है कि इस तरह की शिकायतों के पीछे भू-माफिया गिरोहों की भूमिका से इनकार नहीं किया जा सकता, जो कार्रवाई रुकवाने के लिए हर संभव दबाव बनाने की कोशिश कर रहे हैं। फिलहाल यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि इस पूरे प्रकरण पर संबंधित वरिष्ठ अधिकारी और शासन स्तर पर क्या निर्णय लिया जाता है।


भू-माफियाओं पर जीरो टॉलरेंस के तहत होगी कार्रवाई: डॉ. लोकेश एम

नोएडा अथॉरिटी के CEO डॉ. लोकेश एम ने दो टूक कहा कि शासन के स्पष्ट निर्देश हैं कि भू-माफियाओं के खिलाफ शून्य सहिष्णुता (Zero-Tolerance) की नीति अपनाई जाए। अवैध कब्जों और निर्माणों के खिलाफ कार्रवाई पूरी पारदर्शिता के साथ की जा रही है और इसकी शुरुआत से ही वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा लगातार निगरानी (Monitoring) की जा रही है, जो आगे भी जारी रहेगी।