100 करोड़ रुपये से अधिक के अंतरराज्यीय बीमा घोटाले का पर्दाफाश करने वाली IPS अनुकृति शर्मा को बड़ी उपलब्धि मिली है। वर्ष 2026 के प्रतिष्ठित केंद्रीय गृहमंत्री दक्षता पदक के लिए उनका चयन हुआ है। संभल में तैनाती के दौरान उनके नेतृत्व में इस सनसनीखेज सिंडिकेट का खुलासा हुआ था।
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नोएडा न्यूज़ | उत्तर प्रदेश कैडर की 2020 बैच की तेजतर्रार आईपीएस (IPS) अधिकारी अनुकृति शर्मा को वर्ष 2026 के प्रतिष्ठित “केंद्रीय गृहमंत्री दक्षता पदक” (Kendriya Grihmantri Dakshata Padak) के लिए चुना गया है। गृह मंत्रालय (MHA) द्वारा उन्हें यह सर्वोच्च सम्मान भारत के 12 राज्यों में फैले 100 करोड़ रुपये से अधिक के सनसनीखेज बीमा घोटाले का पर्दाफाश करने के लिए दिया जा रहा है। बता दें कि यह कार्रवाई तब हुई जब अनुकृति शर्मा उत्तर प्रदेश के संभल जिले में एडिशनल एसपी (Additional SP) के पद पर तैनात थीं। पुलिस चेकिंग के दौरान एक संदिग्ध गाड़ी से भारी मात्रा में कैश और 19 अलग-अलग व्यक्तियों के डेबिट कार्ड मिलने के बाद उन्होंने इस केस की परतें खोलना शुरू किया।जांच में एक ऐसा खूंखार सिंडिकेट सामने आया जो असाध्य बीमारियों (कैंसर, टीबी) से पीड़ित गरीब लोगों या पहले से मृत हो चुके लोगों के नाम पर फर्जी दस्तावेज बनाकर भारी-भरकम बीमा करवाता था।सबसे चौंकाने वाला खुलासा यह हुआ कि गिरोह के सदस्य भारी बीमा राशि हड़पने के लिए जिंदा लोगों की हत्या कर देते थे और उसे सड़क दुर्घटना (Accident) का रूप दे देते थे।इस अंतरराज्यीय सिंडिकेट के खिलाफ कार्रवाई करते हुए पुलिस ने 70 से अधिक आरोपियों को गिरफ्तार किया। जांच में बैंक कर्मचारियों, अस्पताल कर्मियों और आशा वर्करों की मिलीभगत भी सामने आई। इस मामले की गंभीरता को देखते हुए बाद में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने भी मनी लॉन्ड्रिंग के तहत जांच शुरू की और मुख्य आरोपियों की करोड़ों की संपत्तियां कुर्क की गईं।
कौन हैं IPS अनुकृति शर्मा?
मूल रूप से जयपुर (राजस्थान) की रहने वाली अनुकृति शर्मा पढ़ाई में बेहद होनहार रही हैं। उन्होंने IISER कोलकाता से उच्च शिक्षा प्राप्त की और अमेरिका के ह्यूस्टन में रिसर्च के दौरान NASA से जुड़े प्रोजेक्ट पर भी काम किया।देश सेवा के जज्बे के कारण उन्होंने विदेश के शानदार करियर और लाखों का पैकेज छोड़कर भारत लौटने का फैसला किया और अपने पांचवें प्रयास में UPSC परीक्षा में 138वीं रैंक हासिल कर IPS बनीं।संभल में तैनाती के दौरान उन्होंने पुलिस और जनता के बीच की दूरी मिटाने के लिए ‘पुलिस माई फ्रेंड’ अभियान चलाया और जिले के सभी 15 थानों में ‘मदर एंड चाइल्ड केयर रूम’ (क्रेच) की शुरुआत की। उनके इन बेहतरीन कार्यों के लिए उन्हें डीजी प्रशंसा चिह्न (सिल्वर मेडल) से भी नवाजा जा चुका है।संभल में अपनी अमिट छाप छोड़ने के बाद, वर्तमान में वह गौतमबुद्धनगर (नोएडा) में एडिशनल डीसीपी (Addl. DCP) / एसीपी के पद पर तैनात रहकर अपनी सेवाएं दे रही हैं।अपराधियों के छक्के छुड़ाने और इस खौफनाक सिंडिकेट का भंडाफोड़ करने वाली इस जांबाज अधिकारी को केंद्रीय गृह मंत्रालय का यह पदक मिलना वाकई पूरे देश और पुलिस महकमे के लिए गर्व की बात है।