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नोएडा न्यूज़ | नोएडा के औद्योगिक विकास, हरित ऊर्जा और शहरी नियोजन को लेकर प्राधिकरण ने कई अहम फैसले लिए हैं। नोएडा प्राधिकरण की 224वीं बोर्ड बैठक में AI सिटी-कम-बिजनेस पार्क विकसित करने, सेक्टर-147 में IT/ITES परियोजना लाने, 15 मेगावाट क्षमता के सोलर पावर प्लांट लगाने और औद्योगिक इकाइयों के ट्रांसफर चार्ज में कटौती सहित कई प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। बैठक में किसानों के लिए 5 प्रतिशत विकसित आवासीय भूमि से जुड़े मामलों के निस्तारण और मोबाइल टावर लगाने की अनुमति प्रक्रिया को ऑनलाइन करने जैसे मुद्दे भी शामिल रहे।
इन फैसलों का असर नोएडा के औद्योगिक निवेश, कारोबारी गतिविधियों, ऊर्जा प्रबंधन और शहरी विकास की योजनाओं पर पड़ सकता है। खास तौर पर औद्योगिक इकाइयों के अंतरण शुल्क में कमी से कारोबारियों को राहत मिलने की उम्मीद है, जबकि प्रस्तावित AI सिटी से तकनीक आधारित कंपनियों और स्टार्टअप के लिए नए अवसर तैयार करने की योजना है।
किसकी अध्यक्षता में हुई नोएडा प्राधिकरण की बोर्ड बैठक?
नोएडा प्राधिकरण की 224वीं बोर्ड बैठक औद्योगिक विकास आयुक्त एवं नोएडा प्राधिकरण के अध्यक्ष दीपक कुमार की अध्यक्षता में आयोजित हुई। बैठक में नोएडा प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालक अधिकारी कृष्णा करुणेश, ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालक अधिकारी रवि कुमार एन.जी. और यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालक अधिकारी राकेश कुमार सिंह सहित बोर्ड के अन्य सदस्य उपस्थित रहे।
बैठक में शहर के औद्योगिक विकास, आधारभूत सुविधाओं, भूमि आवंटन, ऊर्जा और भवन निर्माण से संबंधित प्रस्तावों पर विचार किया गया।
1. नोएडा में विकसित होगी AI सिटी-कम-बिजनेस पार्क
नोएडा को तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जुड़े कारोबार का प्रमुख केंद्र बनाने की दिशा में AI सिटी-कम-बिजनेस पार्क की योजना को सैद्धांतिक मंजूरी दी गई है। यह परियोजना उत्तर प्रदेश प्राइवेट बिजनेस पार्क डेवलपमेंट स्कीम, 2025 के अंतर्गत विकसित करने का प्रस्ताव है।
इसके लिए मास्टर डेवलपर के चयन से संबंधित रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल (RFP) को सैद्धांतिक स्वीकृति दी गई है। परियोजना को DBFOT मॉडल यानी डिजाइन, निर्माण, वित्तपोषण, संचालन और हस्तांतरण के आधार पर विकसित करने की योजना है। भूमि का स्वामित्व नोएडा प्राधिकरण के पास रहेगा।
प्रस्तावित परिसर में ग्लोबल कंपेटेंसी सेंटर, IT और ITES कंपनियों, अनुसंधान संस्थानों, स्टार्टअप और कौशल विकास से जुड़ी सुविधाएं विकसित की जाएंगी। योजना के अनुसार, निर्धारित क्षेत्र का कम से कम 50 प्रतिशत हिस्सा IT और नॉलेज आधारित कंपनियों के लिए आरक्षित होगा।
परियोजना के लिए 45 वर्ष की रियायत अवधि का प्रस्ताव है, जिसे अधिकतम 15 वर्ष तक बढ़ाया जा सकता है। हालांकि, वास्तविक निर्माण और संचालन की समयसीमा चयनित डेवलपर तथा अंतिम स्वीकृत शर्तों पर निर्भर करेगी।
2. सेक्टर-147 में IT/ITES परियोजना के लिए जमीन आवंटन की तैयारी
नोएडा के सेक्टर-147 में IT/ITES गतिविधियों और ग्रेड-A ऑफिस स्पेस के विकास के लिए लगभग 68,000 वर्ग मीटर भूमि पर आवंटन योजना को सैद्धांतिक मंजूरी दी गई है।
इस परियोजना का उद्देश्य आधुनिक कार्यालयों और तकनीक आधारित व्यावसायिक गतिविधियों के लिए जगह उपलब्ध कराना है। इससे भविष्य में IT कंपनियों, सेवा क्षेत्र के कारोबार और संबंधित व्यावसायिक गतिविधियों के विस्तार की संभावनाएं बन सकती हैं।
हालांकि, जमीन का आवंटन, निवेश और निर्माण जैसे अगले चरण संबंधित योजना की शर्तों और आगे की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होंगे।
3. सेक्टर-105 में बनेगा एकीकृत ऑटोमोबाइल कॉम्प्लेक्स
बोर्ड बैठक में सेक्टर-105 में एकीकृत ऑटोमोबाइल कॉम्प्लेक्स विकसित करने की योजना को भी मंजूरी दी गई है। इसके लिए 12,596.64 वर्ग मीटर वाणिज्यिक भूमि निर्धारित की गई है।
प्रस्ताव के अनुसार, परिसर में अधिकतम 20 मीटर ऊंचाई तक निर्माण किया जा सकेगा। परियोजना को पांच वर्ष के भीतर पूरा करने का प्रावधान रखा गया है।
इस तरह के कॉम्प्लेक्स का उद्देश्य ऑटोमोबाइल से जुड़ी व्यावसायिक गतिविधियों को एक व्यवस्थित स्थान उपलब्ध कराना है। इससे संबंधित कारोबार को एक ही परिसर में सुविधाएं विकसित करने का अवसर मिल सकता है।
4. सिटी लॉजिस्टिक्स प्लान को मंजूरी, माल परिवहन व्यवस्था सुधारने पर जोर
नोएडा क्षेत्र के लिए तैयार सिटी लॉजिस्टिक्स प्लान की अंतिम रिपोर्ट को बोर्ड की मंजूरी मिल गई है। अब इसे शासन की स्वीकृति के लिए भेजा जाएगा।
इस योजना का प्रमुख उद्देश्य शहर में माल की आवाजाही और वितरण व्यवस्था को अधिक व्यवस्थित बनाना है। बेहतर लॉजिस्टिक्स व्यवस्था से परिवहन लागत कम करने, माल की आपूर्ति को सुचारु बनाने और यातायात प्रबंधन में सुधार करने में मदद मिल सकती है।
औद्योगिक और व्यावसायिक गतिविधियों वाले नोएडा जैसे शहर में माल परिवहन की बेहतर व्यवस्था कारोबार के साथ-साथ शहरी यातायात के लिए भी महत्वपूर्ण है। हालांकि, योजना का वास्तविक असर इसके क्रियान्वयन और आगे मिलने वाली स्वीकृतियों पर निर्भर करेगा।
5. औद्योगिक इकाइयों के ट्रांसफर चार्ज में कटौती, 10 से घटकर 7 प्रतिशत
नोएडा प्राधिकरण की बैठक में उद्योगों से संबंधित यूनिफाइड रेगुलेशंस-2025 में संशोधन का फैसला कारोबारियों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
प्रस्तावित संशोधनों के अनुसार:
- कार्यशील औद्योगिक इकाइयों के अंतरण शुल्क को 10 प्रतिशत से घटाकर 7 प्रतिशत किया गया है।
- कार्यशीलता के लिए पहले निर्धारित तीन या पांच वर्ष की समयवृद्धि के बाद अधिकतम तीन वर्ष का अतिरिक्त विस्तार देने का प्रावधान किया गया है।
- अंशधारिता में बदलाव की सूचना देने में देरी पर लगने वाला शुल्क 500 रुपये प्रतिदिन से घटाकर 300 रुपये प्रतिदिन किया गया है।
इन बदलावों से औद्योगिक संपत्तियों के अंतरण और कंपनी की संरचना में बदलाव से जुड़ी प्रक्रियाओं में राहत मिलने की उम्मीद है। खास तौर पर उन इकाइयों को फायदा हो सकता है जिन्हें स्वामित्व, हिस्सेदारी या कारोबारी संरचना में बदलाव के दौरान प्राधिकरण से संबंधित औपचारिकताएं पूरी करनी होती हैं।
हालांकि, किसी विशेष औद्योगिक इकाई पर नए नियम किस तारीख से और किन शर्तों के तहत लागू होंगे, इसकी पुष्टि प्राधिकरण के संशोधित नियमों से की जानी चाहिए।
6. मोबाइल टावर और RoW की अनुमति प्रक्रिया होगी ऑनलाइन
मोबाइल नेटवर्क और दूरसंचार बुनियादी ढांचे से जुड़ी अनुमति प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए मोबाइल टावर और राइट ऑफ वे (RoW) से संबंधित आवेदनों को ऑनलाइन करने के प्रस्ताव को स्वीकृति दी गई है।
प्रेस विज्ञप्ति में दी गई जानकारी के अनुसार, पहले से स्थापित टावर के लिए आवेदन शुल्क 1.5 लाख रुपये और नए टावर के लिए एक लाख रुपये निर्धारित किया गया है। इसके साथ ही तीन लाख रुपये की बैंक गारंटी की शर्त हटाने का निर्णय भी शामिल है।
ऑनलाइन प्रक्रिया लागू होने से आवेदन जमा करने और संबंधित औपचारिकताओं को पूरा करने में सुविधा मिल सकती है। इससे दूरसंचार बुनियादी ढांचे के विकास में प्रक्रियागत बाधाएं कम करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
7. मास्टर प्लान-2031 में संशोधन, किसानों की 5 प्रतिशत विकसित भूमि का मामला
नोएडा महायोजना-2031 में संशोधन का प्रस्ताव किसानों से जुड़े 5 प्रतिशत विकसित आवासीय भूमि यानी जनसंख्या घनत्व के प्लॉट के निस्तारण को गति देने के उद्देश्य से लाया गया है।
बैठक में इस संबंध में संशोधन को मंजूरी दी गई। दिए गए विवरण के अनुसार, 5 प्रतिशत जनसंख्या घनत्व के प्रावधान को शर्त-8 यानी Existing Village Abadi के तहत राइट ऑफ वे (ROW) में शामिल किया जा रहा है।
यह विषय उन किसानों के लिए महत्वपूर्ण है जिनके विकसित आवासीय भूखंडों से जुड़े मामलों का निस्तारण प्राधिकरण के स्तर पर लंबित है। प्रस्ताव का उद्देश्य प्रक्रिया को सुगम बनाना और ऐसे मामलों के निस्तारण में तेजी लाना बताया गया है।
हालांकि, संशोधन के बाद किन भूखंडों को लाभ मिलेगा और निस्तारण किस प्रक्रिया से होगा, इसकी स्पष्ट जानकारी संबंधित आदेश और लागू शर्तों से ही मिलेगी।
8. नोएडा में 15 मेगावाट सोलर पावर प्लांट लगाने की तैयारी
हरित ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए नोएडा प्राधिकरण के विभिन्न परिसरों में कुल 15 मेगावाट क्षमता के सोलर पावर प्लांट स्थापित करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई है।
योजना के तहत क्षमता का विभाजन इस प्रकार प्रस्तावित है:
- सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) पर 8 मेगावाट।
- बहुमंजिला पार्किंग और जलाशयों पर 7 मेगावाट।
इन संयंत्रों को RESCO मॉडल के तहत विकसित करने की योजना है। इस मॉडल में सोलर परियोजना के विकास और संचालन की जिम्मेदारी निर्धारित अनुबंध के अनुसार सेवा प्रदाता की हो सकती है।
प्रेस विज्ञप्ति के मुताबिक, इस पहल से अगले 25 वर्षों में लगभग एक लाख टन कार्बन उत्सर्जन कम करने का अनुमान है। इससे प्राधिकरण के ऊर्जा खर्च के प्रबंधन और स्वच्छ ऊर्जा के इस्तेमाल को बढ़ावा देने में भी मदद मिल सकती है।
यह अनुमानित पर्यावरणीय लाभ है। वास्तविक उत्पादन और उत्सर्जन में कमी संयंत्रों की क्षमता, संचालन तथा ऊर्जा उपयोग पर निर्भर करेगी।
9. मॉडल बिल्डिंग बायलॉज-2026 को अपनाने की मंजूरी
नोएडा में भवन निर्माण से संबंधित नियमों को लेकर मॉडल बिल्डिंग बायलॉज-2026 को अपनाने की स्वीकृति दी गई है।
भवन निर्माण नियमों का उद्देश्य विकास कार्यों को निर्धारित मानकों के अनुरूप संचालित करना और शहर में निर्माण से संबंधित प्रक्रियाओं को व्यवस्थित करना होता है। नए प्रावधानों का वास्तविक प्रभाव लागू किए जाने वाले नियमों, संक्रमण संबंधी शर्तों और प्राधिकरण की ओर से जारी विस्तृत निर्देशों के बाद स्पष्ट होगा।
10. सेक्टर-32 के वाणिज्यिक भूखंड की भू-भाटक दर में बदलाव
सेक्टर-32 स्थित वाणिज्यिक भूखंड संख्या 51 पर निर्मित इकाइयों के उपाधिकार से संबंधित भू-भाटक दर में बदलाव का निर्णय लिया गया है।
दिए गए विवरण के अनुसार, वार्षिक भू-भाटक दर 232 रुपये प्रति वर्ग मीटर से बढ़ाकर 612 रुपये प्रति वर्ग मीटर करने का फैसला किया गया है।
यह बदलाव संबंधित संपत्ति के धारकों और वहां संचालित व्यावसायिक गतिविधियों के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है। प्रभावित पक्षों को नई दर लागू होने की तारीख और गणना की शर्तों की पुष्टि प्राधिकरण के आदेश से करनी चाहिए।
11. सहकारी समितियों, सोसाइटी और ट्रस्ट से जुड़े मामलों में सुविधा
बैठक में सहकारी समितियों, सोसाइटी और ट्रस्ट के पक्ष में संपत्ति के उपाधि प्रलेखों के निष्पादन और अंतरण से जुड़ी सुविधा प्रदान करने का निर्णय भी शामिल है।
इस फैसले का उद्देश्य पात्र संस्थाओं के संपत्ति संबंधी मामलों में आवश्यक औपचारिकताएं पूरी करने का रास्ता स्पष्ट करना है। हालांकि, इसका लाभ किन संस्थाओं को मिलेगा और इसके लिए कौन-कौन से दस्तावेज जरूरी होंगे, यह संबंधित नियमों और पात्रता शर्तों पर निर्भर करेगा।
नोएडा के विकास के लिए क्यों महत्वपूर्ण हैं ये फैसले?
224वीं बोर्ड बैठक में लिए गए फैसलों का दायरा केवल नई परियोजनाओं तक सीमित नहीं है। इनमें औद्योगिक इकाइयों के लिए शुल्क में राहत, किसानों की विकसित भूमि से जुड़े मामलों का निस्तारण, डिजिटल अनुमति प्रक्रिया, हरित ऊर्जा और भवन निर्माण नियम जैसे विषय भी शामिल हैं।
AI सिटी और IT/ITES परियोजनाएं तकनीक आधारित कारोबार के लिए बुनियादी ढांचा तैयार करने की दिशा में कदम हैं। वहीं, सोलर पावर प्लांट और लॉजिस्टिक्स प्लान शहर की ऊर्जा और परिवहन व्यवस्था को बेहतर बनाने की संभावनाएं प्रस्तुत करते हैं।
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