Noida News : नोएडा साइबर क्राइम थाना पुलिस ने ‘डिजिटल अरेस्ट’ के नाम पर लोगों को डराकर ठगी करने वाले गिरोह के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है। पुलिस ने इस गैंग को बैंक खाते उपलब्ध कराने वाले दो आरोपियों को पंजाब के लुधियाना से गिरफ्तार किया है। आरोपियों के पास से दो मोबाइल फोन बरामद किए गए हैं।
पुलिस के मुताबिक, 3 मई 2026 को मिली खुफिया सूचना के आधार पर कार्रवाई करते हुए भावेश गुप्ता और हर्षित कुमार (दोनों उम्र 21 वर्ष) को पकड़ा गया। जांच में सामने आया कि ये दोनों साइबर ठगों को अपने बैंक खाते इस्तेमाल करने के लिए देते थे, जिनमें ठगी की रकम ट्रांसफर की जाती थी।
ऐसे देते थे ठगी को अंजाम
पूछताछ में खुलासा हुआ कि गिरोह के सदस्य खुद को CBI, पुलिस, ED या अन्य जांच एजेंसियों का अधिकारी बताकर लोगों को कॉल करते थे। इसके बाद ‘डिजिटल अरेस्ट’ का डर दिखाकर उन्हें मानसिक दबाव में लिया जाता था और जांच के नाम पर पैसे ट्रांसफर कराने के लिए मजबूर किया जाता था।
एक मामले में पीड़ित से 7 लाख रुपये की ठगी की गई, जो आरोपियों के खातों में मंगवाए गए थे। इसके बदले दोनों ने करीब 4.5 लाख रुपये कमीशन के तौर पर लिए।
पहले से भी दर्ज हैं शिकायतें
जांच में यह भी सामने आया कि आरोपियों के बैंक खातों से जुड़े मामलों में तेलंगाना में 2 और आंध्र प्रदेश में 1 शिकायत पहले से दर्ज है। इन मामलों में भी ठगी की रकम इन्हीं खातों में ट्रांसफर की गई थी।
डीसीपी साइबर ने क्या कुछ खास जानकारी साझा।
डीसीपी साइबर क्राइम शैव्या गोयल ने साफ किया कि “डिजिटल अरेस्ट” जैसा कोई कानूनी प्रावधान नहीं है। कोई भी एजेंसी फोन कॉल के जरिए किसी को गिरफ्तार नहीं कर सकती। उन्होंने लोगों से अपील की कि इस तरह की कॉल से घबराएं नहीं और तुरंत 1930 हेल्पलाइन पर संपर्क करें या आधिकारिक पोर्टल पर शिकायत दर्ज करें।
पुलिस ने यह भी चेतावनी दी कि अपना बैंक खाता किसी को इस्तेमाल करने के लिए देना भी गंभीर अपराध है और इसमें सख्त कार्रवाई की जाएगी।