नोएडा सेक्टर-2 में फर्जी कॉल सेंटर का भंडाफोड़ : बैंक कर्मचारी बनकर करते थे साइबर ठगी, 2 आरोपी गिरफ्तार।


KYC अपडेट और रिवॉर्ड पॉइंट रिडीम के नाम पर लोगों के फोन में इंस्टॉल कराते थे फर्जी APK फाइल, देशभर में 20 से ज्यादा शिकायतें दर्ज

न्यूज़ डायरी टुडे, नोएडा।
Noida News: गौतमबुद्धनगर कमिश्नरेट पुलिस ने साइबर अपराध के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए नोएडा के सेक्टर-2 स्थित एक फर्जी कॉल सेंटर का पर्दाफाश किया है। थाना फेज-1 पुलिस ने बैंक क्रेडिट कार्ड विभाग का कर्मचारी बनकर लोगों से ऑनलाइन ठगी करने वाले दो साइबर अपराधियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से मोबाइल फोन, सोने-चांदी के सिक्के और साइबर फ्रॉड में इस्तेमाल होने वाला डिजिटल डाटा बरामद किया है।
पुलिस के अनुसार यह गिरोह बेहद शातिर तरीके से लोगों को अपने जाल में फंसाता था। आरोपी खुद को नामी बैंकों का अधिकारी बताकर ग्राहकों को कॉल करते थे और KYC अपडेट, क्रेडिट कार्ड वेरिफिकेशन तथा रिवॉर्ड पॉइंट रिडीम कराने के बहाने उनके मोबाइल फोन में एक फर्जी APK फाइल डाउनलोड कराते थे। यह APK फाइल देखने में बिल्कुल बैंक की असली मोबाइल एप्लिकेशन जैसी लगती थी, जिससे लोग आसानी से धोखे में आ जाते थे।

सेक्टर-2 की बिल्डिंग में चल रहा था फर्जी कॉल सेंटर
पुलिस अधिकारियों के मुताबिक 12 मई 2026 को थाना फेज-1 पुलिस को लोकल इंटेलिजेंस और इलेक्ट्रॉनिक सर्विलांस के जरिए सूचना मिली कि सेक्टर-2 स्थित बिल्डिंग C-90 की चौथी मंजिल पर एक फर्जी कॉल सेंटर संचालित किया जा रहा है। सूचना के आधार पर पुलिस टीम ने तत्काल छापा मारा और मौके से दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान विकास कुमार और सूरज के रूप में हुई है। पुलिस ने बताया कि दोनों कमीशन बेस पर कॉल सेंटर में काम करते थे और लोगों के बैंक डाटा का दुरुपयोग कर साइबर ठगी को अंजाम देते थे।

गिरफ्तार आरोपियों की पहचान

गिरफ्तार अभियुक्तों की पहचान विकास कुमार पुत्र जयपाल सिंह निवासी ग्राम पलवाड़ा थाना बहादुरगढ़ जनपद हापुड़, हाल निवासी कैलाश पुरम गोविंदपुरम थाना कविनगर गाजियाबाद उम्र करीब 31 वर्ष तथा सूरज पुत्र बलवीर सिंह निवासी ग्राम रसमई थाना सादाबाद जनपद हाथरस, हाल निवासी गली नंबर-6 न्यू अशोक नगर दिल्ली उम्र करीब 20 वर्ष के रूप में हुई है। पुलिस के अनुसार दोनों आरोपी फर्जी कॉल सेंटर में कमीशन बेस पर काम करते थे और बैंक अधिकारी बनकर लोगों से साइबर ठगी की घटनाओं को अंजाम देते थे।

ऐसे करते थे साइबर फ्रॉड

पुलिस जांच में खुलासा हुआ कि आरोपी AU बैंक, एक्सिस बैंक और अन्य बैंकों के क्रेडिट कार्ड धारकों का डाटा अवैध तरीके से हासिल करते थे। इसके बाद ग्राहकों को कॉल कर खुद को बैंक अधिकारी बताते थे।आरोपी लोगों से कहते थे कि उनके क्रेडिट कार्ड की KYC अपडेट करनी है या उनके कार्ड पर जमा रिवॉर्ड पॉइंट्स को रिडीम करना है। इसके लिए वे ग्राहकों को एक लिंक भेजते थे, जिससे APK फाइल डाउनलोड होती थी।जैसे ही ग्राहक उस एप में अपना क्रेडिट कार्ड नंबर, CVV और अन्य बैंकिंग जानकारी भरते थे, पूरी जानकारी सीधे आरोपियों तक पहुंच जाती थी। इसके बाद आरोपी ब्लिंकिट और जेप्टो जैसी ऑनलाइन डिलीवरी ऐप्स के जरिए गोल्ड और सिल्वर क्वाइन खरीद लेते थे।सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि ट्रांजेक्शन के दौरान आने वाला OTP भी APK फाइल के जरिए सीधे आरोपियों के मोबाइल पर पहुंच जाता था, जिससे ग्राहक को धोखाधड़ी का पता ही नहीं चलता था।

ठगी के बाद सिम तोड़कर कर देते थे नष्ट

पुलिस के मुताबिक आरोपी साइबर ठगी को अंजाम देने के बाद इस्तेमाल किए गए सिम कार्ड तोड़कर फेंक देते थे ताकि पुलिस उन्हें ट्रेस न कर सके। वहीं सोने-चांदी के सिक्कों की डिलीवरी अलग-अलग रैंडम पतों पर मंगवाई जाती थी। बाद में आरोपी इन सिक्कों को बाजार में बेचकर रकम आपस में बांट लेते थे।

20 से ज्यादा शिकायतें NCRP पोर्टल पर दर्ज

जांच में सामने आया है कि आरोपियों के खिलाफ देश के विभिन्न राज्यों में नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) पर 20 से अधिक शिकायतें दर्ज हैं। पुलिस अब इनके नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की तलाश में जुटी हुई है। संभावना जताई जा रही है कि इस गिरोह में कई और लोग शामिल हो सकते हैं।पुलिस ने क्या-क्या बरामद किया

पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से : 3 मोबाइल फोन 2 पीली धातु (सोने जैसे) के सिक्के 2 सफेद धातु (चांदी जैसे) के सिक्के बरामद किए हैं।

एडीसीपी मनीषा सिंह की आमजन से अपील

एडीसीपी नोएडा मनीषा सिंह ने लोगों से सतर्क रहने की अपील करते हुए कहा कि नोएडा पुलिस लगातार साइबर अपराध के खिलाफ अभियान चला रही है। उन्होंने कहा कि कोई भी व्यक्ति किसी अनजान लिंक या APK फाइल को अपने मोबाइल में डाउनलोड न करे और न ही फोन पर बैंकिंग जानकारी साझा करे।

उन्होंने कहा कि यदि किसी के साथ साइबर ठगी होती है तो तुरंत हेल्पलाइन नंबर 1930 या राष्ट्रीय साइबर क्राइम पोर्टल⁠ पर शिकायत दर्ज कराएं।साइबर फ्रॉड से बचने के लिए जरूरी सावधानियांकिसी भी अनजान APK फाइल को डाउनलोड न करेंबैंक कभी फोन पर OTP या CVV नहीं मांगताकेवल Google Play Store या Apple App Store से ही ऐप डाउनलोड करेंकिसी भी संदिग्ध कॉल की तुरंत पुलिस को सूचना देंमोबाइल में एंटी वायरस और सिक्योरिटी अपडेट हमेशा चालू रखें