नोएडा। साइबर ठगों ने डिजिटल अरेस्ट का ऐसा जाल बुना कि सेक्टर-40 निवासी एक डॉक्टर सात दिनों तक उनके शिकंजे में फंसे रहे। इस दौरान जालसाजों ने RTGS के जरिए 49,13,905 रुपये ट्रांसफर करा लिए। मामले में साइबर क्राइम थाने में FIR दर्ज कर पुलिस ने जांच शुरू कर दी है।
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नोएडा। गौतमबुद्ध नगर कमिश्नरेट में साइबर अपराध का एक बड़ा मामला सामने आया है। शातिर साइबर ठगों ने डिजिटल अरेस्ट का डर दिखाकर सेक्टर-40 निवासी डॉ. वजाहत हुसैन से 49 लाख 13 हजार 905 रुपये की ठगी कर ली। आरोप है कि जालसाजों ने पीड़ित को लगातार सात दिनों तक डिजिटल अरेस्ट के नाम पर अपने नियंत्रण में रखा और इस दौरान उनसे बैंक जाकर RTGS के माध्यम से रकम ट्रांसफर कराई। पीड़ित की शिकायत पर साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में अज्ञात आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया गया है।
पीड़ित डॉ. वजाहत हुसैन, निवासी डी-77, सेक्टर-40, नोएडा ने पुलिस को दी शिकायत में बताया कि अज्ञात व्यक्ति ने अपनी वास्तविक पहचान छिपाकर किसी अन्य व्यक्ति या अधिकारी के रूप में उनसे संपर्क किया और उन्हें अपने झांसे में ले लिया। आरोपियों ने कथित तौर पर फर्जी दस्तावेजों और इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड का इस्तेमाल कर पूरे मामले को वास्तविक कार्रवाई जैसा दिखाया, जिससे पीड़ित उनके जाल में फंस गए।
शिकायत के मुताबिक, साइबर ठगों ने सात दिनों तक डिजिटल अरेस्ट का भय दिखाकर पीड़ित पर मानसिक दबाव बनाए रखा। इस दौरान डॉ. वजाहत हुसैन बैंक जाकर RTGS के माध्यम से रकम ट्रांसफर करते रहे। इस तरह आरोपियों ने कुल 49,13,905 रुपये की धोखाधड़ी को अंजाम दिया।
फर्जी पहचान और दस्तावेजों के जरिए रचा ठगी का जाल
पुलिस में दर्ज एफआईआर के अनुसार, मामले में धोखाधड़ी के लिए पहचान छिपाने और फर्जी दस्तावेजों एवं इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड के इस्तेमाल का आरोप लगाया गया है। शिकायत में घटना की तारीख 16 अक्टूबर 2026 और समय सुबह 11 बजे दर्ज किया गया है। पीड़ित की शिकायत के आधार पर पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू कर दी है।
इन धाराओं में दर्ज हुई FIR
साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में अज्ञात आरोपियों के खिलाफ सूचना प्रौद्योगिकी (संशोधन) अधिनियम, 2008 की धारा 66D तथा भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की धारा 318(4) और 319(2) के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है।
पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक, एफआईआर संख्या 0549 दिनांक 16 अक्टूबर 2026 को शाम 4:49 बजे दर्ज की गई। मामले की विवेचना और निगरानी थाना प्रभारी निरीक्षक विजय सिंह राणा द्वारा की जा रही है।
डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों की तलाश
मुकदमा दर्ज होने के बाद साइबर क्राइम पुलिस मामले की तकनीकी जांच में जुट गई है। पुलिस की ओर से डिजिटल साक्ष्यों, इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड और वित्तीय लेनदेन से जुड़े पहलुओं की पड़ताल की जा रही है, ताकि ठगी में शामिल आरोपियों की पहचान कर उनके खिलाफ कार्रवाई की जा सके।