न्यूज़ डायरी,नई दिल्ली।
घुघुती फाउंडेशन की ओर से दिल्ली के मयूर विहार फेज-3 स्थित रेडफॉक्स पार्क में आयोजित तीन दिवसीय ‘राज्योत्सव’ सांस्कृतिक कार्यक्रम का आज भव्य और रंगारंग आगाज हुआ। उत्तराखंड की लोक संस्कृति, लोक संगीत और परंपराओं को समर्पित इस आयोजन के पहले दिन सुबह से लेकर देर शाम तक सांस्कृतिक उल्लास देखने को मिला।
दीप प्रज्वलन के साथ हुआ कार्यक्रम का शुभारंभ
कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ घुघुती फाउंडेशन के नागेंद्र दत्त शर्मा द्वारा दीप प्रज्वलित कर किया गया। इसके बाद सुबह के सत्र की शुरुआत हुई, जिसमें उत्तराखंड की पारंपरिक धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत को दर्शाते हुए भजन-कीर्तन मंडली प्रतियोगिता आयोजित की गई।
कीर्तन मंडली प्रतियोगिता में 10 टीमों की शानदार प्रस्तुति
सुबह के मुख्य सत्र में आयोजित उत्तराखंडी भजन-कीर्तन मंडली प्रतियोगिता में कुल 10 टीमों के लगभग 120 प्रतिभागियों ने भाग लिया। प्रतियोगिता में रेखा चौहान, उर्मिला ढोंडियाल और संगीता अजनवी ने मुख्य निर्णायक की भूमिका निभाई।
प्रतियोगिता के दौरान सभी टीमों ने उत्तराखंड के पारंपरिक भजनों और कीर्तनों की भावपूर्ण और सजीव प्रस्तुतियां देकर दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
निर्णायकों के फैसले के अनुसार, उत्तराखंड कीर्तन मंडली, न्यू कोंडली (दिल्ली) ने प्रथम स्थान प्राप्त किया। वहीं माँ नारायणी कीर्तन मंडली, मयूर विहार (दिल्ली) को दूसरा और दुर्गा कीर्तन मंडली, खोड़ा को तीसरा स्थान मिला। विजेता टीमों को दर्शकों की ओर से खूब सराहना और तालियां मिलीं।
शाम के सत्र में गढ़रत्न नरेंद्र सिंह नेगी के गीतों की गूंज
शाम का सत्र पूरी तरह से उत्तराखंड के लोक संगीत के नाम रहा। कार्यक्रम की सबसे खास प्रस्तुति गढ़रत्न नरेंद्र सिंह नेगी जी की रही। उन्होंने अपने प्रसिद्ध गीत ‘धरती हमरा गढ़वाल की’ से शाम के सत्र का शुभारंभ किया।
इसके बाद त्रिजुगीनारायण, यखी पहाड़ों मा जड्डु ह्वे गे भारी, फूल-फूल बोलू के बुरांस बोलू, लागी भटूली जैसे एक से बढ़कर एक सुपरहिट गीतों की प्रस्तुति देकर दर्शकों को भावनाओं के सागर में डुबो दिया।
अनिल बिष्ट ने भी बांधा समां
कार्यक्रम में लोक गायक अनिल बिष्ट ने भी अपनी दमदार प्रस्तुति दी। उन्होंने ‘हनुमंत बलबीरा’, ‘ऐजा ए भानुमति पाबो बजारा’ जैसे लोकप्रिय गीतों से मंच पर ऐसा समां बांधा कि दर्शक झूमने पर मजबूर हो गए।
कार्यक्रम का मंच संचालन गणेश खुगशाल ‘गणि’, आयुषी जुयाल और प्रशांत गगोड़िया ने संयुक्त रूप से किया। उनकी प्रभावी और सधे हुए संचालन शैली ने कार्यक्रम को और भी आकर्षक बना दिया।
राज्योत्सव को देखने के लिए दिल्ली-एनसीआर समेत आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में उत्तराखंडी प्रवासी पहुंचे, जिससे पूरा परिसर उत्तराखंडी संस्कृति के रंग में रंगा नजर आया।
उत्तराखंडी संस्कृति को सहेजने का प्रयास
घुघुती फाउंडेशन के आयोजकों ने बताया कि इस तीन दिवसीय आयोजन का मुख्य उद्देश्य उत्तराखंड की समृद्ध लोक संस्कृति, लोक संगीत और पारंपरिक विरासत को देश की राजधानी में संरक्षित और प्रचारित करना है। उन्होंने कहा कि यह कार्यक्रम न केवल उत्तराखंडी समाज को एक मंच पर जोड़ता है, बल्कि नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से परिचित कराने का भी एक सार्थक प्रयास है।