ध्रुव राठी की बढ़ीं कानूनी मुश्किलें! 2018 के मानहानि केस में नया समन, राम-सीता वीडियो पर भी नया मुकदमा; जानिए पूरा मामला

ध्रुव राठी की कानूनी मुश्किलें एक बार फिर सुर्खियों में हैं। 2018 के कथित आपराधिक मानहानि मामले में साकेत कोर्ट ने नए सिरे से समन जारी करने का निर्देश दिया है, जबकि राम-सीता से जुड़े वीडियो पर नया मानहानि मुकदमा दायर हुआ है। अब 17 अक्टूबर और 5 नवंबर की सुनवाई अहम मानी जा रही है—फिलहाल यह आरोप और कानूनी कार्यवाही है, अंतिम फैसला नहीं। जानिए पूरा मामला।
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नई दिल्ली, 15 अक्टूबर 2026। यूट्यूबर ध्रुव राठी एक बार फिर कानूनी मामलों को लेकर चर्चा में हैं। दिल्ली की साकेत अदालत ने वर्ष 2018 के कथित आपराधिक मानहानि मामले में उनके खिलाफ नए सिरे से समन जारी करने का निर्देश दिया है। वहीं, भगवान राम और माता सीता से संबंधित एक पुराने वीडियो के कथित कंटेंट को लेकर भी उनके खिलाफ नया मानहानि मुकदमा दायर किए जाने की जानकारी सामने आई है। इन दोनों मामलों के बीच उनके पुराने वीडियो को लेकर चल रही पुलिस जांच और वीडियो की भारत में उपलब्धता पर लगी रोक का मामला भी महत्वपूर्ण है।
ताजा घटनाक्रम में 17 अक्टूबर को पुराने मानहानि मामले की सुनवाई होनी है, जबकि राम-सीता से जुड़े वीडियो पर दायर नए मुकदमे की अगली सुनवाई 5 नवंबर के लिए निर्धारित बताई गई है। हालांकि, इन कानूनी कार्यवाहियों को दोषसिद्धि या अंतिम न्यायिक फैसले के रूप में देखना सही नहीं होगा। दोनों मामलों में आरोपों और अदालत की प्रक्रिया के बीच अंतर समझना जरूरी है।
2018 के मानहानि मामले में ध्रुव राठी को नया समन क्यों?
ध्रुव राठी के खिलाफ पहला ताजा घटनाक्रम वर्ष 2018 में दर्ज कराई गई आपराधिक मानहानि की शिकायत से संबंधित है। इस मामले में शिकायतकर्ता विकास सांकृत्यायन, जिन्हें विकास पांडे के नाम से भी जाना जाता है, ने आरोप लगाया था कि ध्रुव राठी ने अपने यूट्यूब चैनल पर प्रकाशित ‘BJP IT Cell Part II’ नामक वीडियो में उनके बारे में मानहानिकारक दावे किए थे।
शिकायतकर्ता का आरोप था कि वीडियो में भाजपा आईटी सेल से जुड़े लोगों पर उन्हें बदनाम करने की कोशिश करने और एक व्यक्ति को कथित तौर पर 50 लाख रुपये देने की पेशकश करने जैसे आरोप लगाए गए थे। शिकायतकर्ता ने इन दावों को अपनी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने वाला बताया था। ये शिकायतकर्ता के आरोप हैं, जिन्हें अंतिम रूप से सिद्ध तथ्य नहीं माना जाना चाहिए।
इस मामले में दिल्ली की साकेत अदालत ने जुलाई 2019 में ही ध्रुव राठी को समन जारी किया था। हालांकि, शिकायतकर्ता पक्ष के अनुसार, विदेश में रहने के कारण समन की तामील की प्रक्रिया लंबे समय से पूरी नहीं हो पा रही थी।
12 अक्टूबर को अदालत ने क्या आदेश दिया?
मामले में ताजा घटनाक्रम 12 अक्टूबर 2026 को सामने आया, जब साकेत अदालत के न्यायिक मजिस्ट्रेट राहुल जैन ने शिकायतकर्ता की अर्जी पर सुनवाई की। शिकायतकर्ता पक्ष ने अदालत को बताया कि ध्रुव राठी इन दिनों भारत में हैं और दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के विरोध-प्रदर्शनों में भाग लेने के लिए आए हुए हैं।
इसी आधार पर अदालत से अनुरोध किया गया कि समन की तामील के लिए नए सिरे से प्रक्रिया शुरू की जाए।
रिपोर्टों के मुताबिक, अदालत ने ध्रुव राठी के गुरुग्राम स्थित पते पर नए समन जारी करने का निर्देश दिया। साथ ही, शिकायतकर्ता को समन की तामील कराने वाले संबंधित कर्मचारी के साथ जाने की अनुमति भी दी गई, ताकि प्रक्रिया पूरी करने में मदद मिल सके।
इस मामले की अगली सुनवाई 17 अक्टूबर 2026 के लिए निर्धारित है। अब इस तारीख पर कार्यवाही किस दिशा में आगे बढ़ती है, यह महत्वपूर्ण होगा।
यह स्पष्ट करना जरूरी है कि समन जारी होने का अर्थ अदालत द्वारा आरोपी को उपस्थित होने या कानूनी प्रक्रिया में शामिल होने के लिए बुलाना है। यह अपने आप में दोष सिद्ध होने या सजा सुनाए जाने का आदेश नहीं है।
राम-सीता वाले वीडियो पर नया मानहानि मुकदमा
ध्रुव राठी से जुड़ा दूसरा मामला भगवान राम और माता सीता के वनवास के दौरान कथित खानपान संबंधी दावों वाले एक वीडियो से जुड़ा है। इस वीडियो को लेकर पहले भी विवाद हुआ था और इसके कंटेंट के खिलाफ कानूनी शिकायत की गई थी।
शिकायतकर्ता पक्ष का आरोप है कि वीडियो में धार्मिक ग्रंथों के संदर्भों को गलत तरीके से प्रस्तुत किया गया और भगवान राम तथा माता सीता के बारे में ऐसी बातें कही गईं, जिनसे धार्मिक भावनाएं आहत हुईं। शिकायतकर्ता पक्ष ने इस मामले में कानूनी कार्रवाई की मांग की है।
इस प्रकरण में सुप्रीम कोर्ट की वकील अमिता सचदेवा की ओर से कानूनी कार्रवाई किए जाने की जानकारी सामने आई है। 15 अक्टूबर को प्रकाशित रिपोर्टों के अनुसार, साकेत जिला अदालत में ध्रुव राठी के खिलाफ एक नया मानहानि मुकदमा दायर किया गया है।
याचिकाकर्ता पक्ष की ओर से अदालत से कथित मानहानिकारक कंटेंट के संबंध में घोषणा, निषेधाज्ञा यानी संबंधित कंटेंट पर रोक लगाने और हर्जाने जैसी राहत मांगी गई है।
रिपोर्टों के अनुसार, सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता पक्ष के वरिष्ठ वकील वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से अपनी दलीलें रख रहे थे। तकनीकी समस्या के कारण उनकी दलीलें पूरी नहीं हो सकीं। इसके बाद मामले को आगे की सुनवाई के लिए 5 नवंबर 2026 तक सूचीबद्ध किया गया।
यहां एक अहम बात समझना जरूरी है। कुछ समाचार शीर्षकों में इस घटनाक्रम को ‘अवमानना का केस’ कहा गया है, लेकिन उपलब्ध ताजा रिपोर्टों में साकेत अदालत में दायर नई कार्यवाही को मानहानि के मुकदमे के रूप में बताया गया है। इसलिए इसे बिना न्यायालय के मूल आदेश की पुष्टि किए सीधे अवमानना का मामला कहना उचित नहीं होगा।
पहले भी वीडियो हटाने का मामला पहुंचा था दिल्ली हाईकोर्ट
राम-सीता से संबंधित वीडियो को लेकर कानूनी विवाद नया नहीं है। इससे पहले भी इस वीडियो के कंटेंट को लेकर शिकायत की गई थी और मामला दिल्ली हाईकोर्ट तक पहुंचा था।
इंडियन एक्सप्रेस की 10 सितंबर 2026 की रिपोर्ट के मुताबिक, शिकायतकर्ता अमिता सचदेवा ने 22 मार्च 2026 को शिकायत दी थी। इसमें आरोप लगाया गया था कि वीडियो में हिंदू धार्मिक ग्रंथों का गलत संदर्भ दिया गया और धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाला कंटेंट प्रस्तुत किया गया।
इस शिकायत पर दिल्ली पुलिस ने जांच शुरू की थी। पुलिस ने वीडियो और उससे संबंधित इलेक्ट्रॉनिक जानकारी प्राप्त करने के लिए गूगल तथा यूट्यूब से संपर्क किया था। रिपोर्ट के अनुसार, संबंधित प्लेटफॉर्म से कुछ स्पष्टीकरण मांगे गए थे और पुलिस ने आवश्यक जानकारी मिलने के बाद जांच पूरी कर अंतिम स्थिति रिपोर्ट दाखिल करने की बात कही थी।
इस मामले में 3 जुलाई 2026 को दिल्ली हाईकोर्ट ने ग्रिवांस अपीलेट कमेटी (GAC) को शिकायत पर शीघ्र निर्णय लेने का निर्देश दिया था। इसके बाद 15 जुलाई को कमेटी ने वीडियो हटाने का निर्देश दिया। 11 अगस्त को दिल्ली हाईकोर्ट ने रिकॉर्ड पर लिया कि भारत में वीडियो तक पहुंच प्रतिबंधित कर दी गई थी।
हालांकि, सितंबर में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, पुलिस की जांच उस समय भी जारी थी। इस जांच में गूगल और यूट्यूब से मांगी गई जानकारी महत्वपूर्ण बताई गई थी।
फिर वीडियो का तीन मिनट का हिस्सा दोबारा अपलोड करने का आरोप
राम-सीता वाले वीडियो से संबंधित ताजा मुकदमे में याचिकाकर्ता पक्ष का कहना है कि पहले हटाए गए वीडियो का लगभग तीन मिनट का हिस्सा दोबारा अपलोड किया गया। इसके बाद उन्होंने नए सिरे से कानूनी राहत मांगने का फैसला किया।
मनीकंट्रोल की 15 अक्टूबर 2026 की रिपोर्ट के अनुसार, याचिकाकर्ता पक्ष ने दिल्ली हाईकोर्ट से पहले हुई कार्यवाही के संदर्भ में नई कानूनी प्रक्रिया शुरू करने की अनुमति मिलने की बात कही और इसके बाद साकेत अदालत में नया मानहानि मुकदमा दायर किया।
यह मामला पुराने वीडियो को हटाने से संबंधित कार्यवाही से अलग है। नए मुकदमे में याचिकाकर्ता पक्ष ने कथित कंटेंट को लेकर अतिरिक्त राहत की मांग की है। अब 5 नवंबर को होने वाली सुनवाई में आगे की दलीलें रखे जाने की संभावना है।
फिलहाल, यह शिकायतकर्ता पक्ष का आरोप है कि वीडियो का हिस्सा दोबारा अपलोड किया गया। इस दावे और उससे जुड़े कानूनी सवालों पर अंतिम निष्कर्ष अदालत की कार्यवाही के बाद ही निकाला जा सकेगा।
10 अक्टूबर को ध्रुव राठी को पुलिस ने हिरासत में भी लिया था
इन कानूनी घटनाक्रमों के बीच ध्रुव राठी का नाम कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के आंदोलन को लेकर भी चर्चा में रहा। लाइव हिन्दुस्तान की 15 अक्टूबर की रिपोर्ट के मुताबिक, 10 अक्टूबर 2026 को गुरुग्राम स्थित उनके आवास से दिल्ली पुलिस ने उन्हें हिरासत में लिया था। रिपोर्ट में बताया गया कि करीब 20 घंटे बाद उन्हें रिहा कर दिया गया।
CJP का आंदोलन मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर आयोजित किया जा रहा था। ध्रुव राठी के इस आंदोलन से जुड़ने के दौरान ही पुराने मानहानि मामले में समन की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की खबर सामने आई।
हालांकि, पुलिस हिरासत की घटना और दोनों मानहानि मामलों की कानूनी कार्यवाही को अलग-अलग घटनाक्रम के रूप में समझना चाहिए। उपलब्ध रिपोर्टों के आधार पर यह निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा कि एक घटना के कारण दूसरी कानूनी कार्रवाई हुई।
ध्रुव राठी के सामने अब क्या हैं अहम तारीखें?
ध्रुव राठी से जुड़े मामलों में फिलहाल दो तारीखें विशेष रूप से महत्वपूर्ण हैं।
17 अक्टूबर 2026: वर्ष 2018 के ‘BJP IT Cell Part II’ वीडियो से संबंधित कथित आपराधिक मानहानि मामले में साकेत अदालत में अगली सुनवाई निर्धारित है। अदालत पहले ही नए सिरे से समन जारी करने का निर्देश दे चुकी है।
5 नवंबर 2026: भगवान राम और माता सीता से संबंधित वीडियो को लेकर दायर नए मानहानि मुकदमे में अगली सुनवाई निर्धारित बताई गई है। पिछली सुनवाई में तकनीकी समस्या के कारण याचिकाकर्ता पक्ष की दलीलें पूरी नहीं हो सकी थीं।
इन तारीखों पर अदालत क्या निर्देश देती है और संबंधित पक्ष क्या दलीलें रखते हैं, इससे आगे की कानूनी प्रक्रिया की दिशा स्पष्ट होगी।
क्या ध्रुव राठी को इन मामलों में सजा हो गई है?
नहीं। 15 अक्टूबर 2026 तक उपलब्ध रिपोर्टों में इन दोनों मामलों में ध्रुव राठी को दोषी ठहराए जाने या सजा सुनाए जाने की पुष्टि नहीं है।
पहले मामले में अदालत ने समन जारी करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई है। दूसरे मामले में नया मानहानि मुकदमा दायर होने और सुनवाई की तारीख तय होने की जानकारी है। पुराने वीडियो से संबंधित पुलिस जांच और वीडियो हटाने की कार्यवाही भी अलग विषय हैं।

