Asian Games 2026 : भारतीय बेटियों ने लगाया ऐसा निशाना कि इतिहास बन गया, दक्षिण कोरिया को हराकर जीता एशियाई खेलों का गोल्ड।
भारत की बेटियों ने एशियाई खेलों में इतिहास रच दिया। अंकिता भकत, कीर्ति शर्मा और कुमकुम मोहोड़ की तिकड़ी ने रोमांचक फाइनल में दक्षिण कोरिया को 5-3 से हराकर महिला रिकर्व टीम स्पर्धा का पहला ऐतिहासिक स्वर्ण पदक भारत की झोली में डाल दिया।
News Diary Today | New Delhi/Okazaki, Japan
:- आखिरी दौर तक बना रहा दबाव, लेकिन अंकिता भकत, कीर्ति शर्मा और कुमकुम मोहोड़ ने नहीं खोया धैर्य; महिला रिकर्व टीम ने पहली बार हासिल किया एशियाई खेलों का स्वर्ण
ओकाजाकी, जापान | तीरंदाजी में कभी-कभी जीत और हार के बीच अंतर सिर्फ एक तीर का होता है। शुक्रवार को एशियाई खेलों में भारतीय महिला रिकर्व टीम के लिए भी मुकाबला कुछ ऐसा ही था। सामने ऐसी टीम थी, जिसका इस स्पर्धा में लंबे समय से दबदबा रहा है। लेकिन भारतीय तिकड़ी ने दबाव के बीच अपने निशाने नहीं भटकने दिए और आखिरकार वह कर दिखाया, जिसका इंतजार लंबे समय से था।
अंकिता भकत, कीर्ति शर्मा और 17 वर्षीय कुमकुम मोहोड़ ने दक्षिण कोरिया को फाइनल में 5-3 से शिकस्त देकर महिला रिकर्व टीम स्पर्धा में भारत के लिए पहला स्वर्ण पदक जीत लिया।
यह सिर्फ पदक जीतने की कहानी नहीं है। यह उस मुकाबले की कहानी है, जिसमें भारत ने पहले बराबरी की, फिर बढ़त बनाई और अंत में अपने धैर्य के दम पर खिताब अपने नाम किया।
शुरुआत में दोनों टीमें एक-दूसरे से आगे नहीं निकल सकीं
फाइनल में भारत के सामने दक्षिण कोरिया की कांग चे-यंग, ली यून-जी और ओ ये-जिन की टीम थी। मुकाबले की शुरुआत से ही दोनों पक्षों के बीच अंतर करना मुश्किल था।
पहले सेट में दोनों टीमों का स्कोर 54-54 रहा। इसके बाद दूसरे सेट में भी भारतीय और कोरियाई तीरंदाजों ने 56-56 अंक हासिल किए।
यानी दो सेट के बाद स्कोर 2-2 था।
भारत के लिए यह स्थिति महत्वपूर्ण थी, क्योंकि अब मुकाबले में छोटी सी गलती भी पूरी तस्वीर बदल सकती थी।
तीसरे सेट में भारतीय टीम ने पकड़ बनाई
यहीं से भारतीय तीरंदाजों ने मुकाबले की दिशा अपने पक्ष में मोड़नी शुरू की। तीसरे सेट में भारत ने लगातार बेहतर निशाने लगाए और कुल 55 अंक हासिल किए। दक्षिण कोरिया की टीम इस दौरान 51 अंक तक ही पहुंच सकी।
इस सेट की जीत ने भारत को पहली बार स्पष्ट बढ़त दिलाई। स्कोर अब 4-2 हो चुका था।
भारतीय टीम को पता था कि अब एक और सेट में संयम बनाए रखना ही स्वर्ण तक पहुंचने का रास्ता है।
आखिरी सेट में फिर बढ़ा रोमांच
चौथे सेट में दक्षिण कोरिया ने आसानी से हार मानने के बजाय वापसी की कोशिश की। उसने 54 अंक बनाए।
भारत के लिए भी 54 का स्कोर निर्णायक था। भारतीय तीरंदाजों ने दबाव के बावजूद जरूरी अंक जुटाए और चौथा सेट 54-54 पर समाप्त हुआ।
जैसे ही यह सेट बराबरी पर खत्म हुआ, भारतीय खेमे में जीत की खुशी छा गई। भारत ने फाइनल 5-3 से जीत लिया।
17 साल की कुमकुम ने बड़े मंच पर छोड़ी छाप
इस ऐतिहासिक टीम में सबसे कम उम्र की सदस्य कुमकुम मोहोड़ थीं। महज 17 साल की उम्र में एशियाई खेलों जैसे बड़े मंच पर फाइनल खेलना अपने आप में बड़ी चुनौती थी।
लेकिन कुमकुम ने दबाव को अपने प्रदर्शन पर हावी नहीं होने दिया। महत्वपूर्ण मौकों पर उनके सटीक निशानों ने टीम को मजबूती दी।
उनके साथ अनुभवी अंकिता भकत और कीर्ति शर्मा ने भी पूरे मुकाबले में अपना संयम बनाए रखा। तीनों के प्रदर्शन में सबसे खास बात यह रही कि मुश्किल परिस्थितियों में भी टीम ने अपना तालमेल नहीं टूटने दिया।
फाइनल से पहले चीन को भी किया था बाहर
भारत की स्वर्णिम यात्रा फाइनल से शुरू नहीं हुई थी।
फाइनल में पहुंचने से पहले भारतीय टीम ने सेमीफाइनल में चीन को 5-1 से हराया था। इस जीत के साथ अंकिता, कीर्ति और कुमकुम की टीम ने पहली बार एशियाई खेलों में महिला रिकर्व टीम स्पर्धा के फाइनल में जगह बनाई।
इसके बाद फाइनल में दक्षिण कोरिया जैसी मजबूत टीम के सामने उतरना था।
भारतीय टीम ने वहां भी वही आत्मविश्वास बरकरार रखा और इतिहास रच दिया।
दक्षिण कोरिया के लंबे दबदबे के बीच भारत की बड़ी जीत
भारत की इस जीत को इसलिए भी खास माना जा रहा है क्योंकि दक्षिण कोरिया इस स्पर्धा में लंबे समय से बेहद मजबूत रहा है।
कोरियाई महिला रिकर्व टीम ने 1998 बैंकॉक एशियाई खेलों से लगातार सात बार स्वर्ण पदक जीता था। 2026 में वह लगातार आठवें खिताब के लिए मैदान में उतरी थी।
लेकिन इस बार फाइनल का परिणाम उसके पक्ष में नहीं गया।
भारत ने 5-3 की जीत के साथ न केवल स्वर्ण अपने नाम किया, बल्कि दक्षिण कोरिया की लगातार स्वर्ण जीत की श्रृंखला को भी रोक दिया।
भारतीय महिला रिकर्व टीम के लिए नया अध्याय
एशियाई खेलों के इतिहास में भारत ने कई खेलों में शानदार प्रदर्शन किया है, लेकिन महिला रिकर्व टीम का स्वर्ण अभी तक उसकी झोली में नहीं आया था।
अंकिता भकत, कीर्ति शर्मा और कुमकुम मोहोड़ ने इस इंतजार को खत्म कर दिया।
उनकी जीत की सबसे बड़ी खासियत यह रही कि टीम ने फाइनल में किसी एक खिलाड़ी पर निर्भर रहने के बजाय सामूहिक प्रदर्शन के दम पर मुकाबला अपने नाम किया।
ओकाजाकी में भारतीय तिरंगा लहराने के साथ महिला रिकर्व तीरंदाजी में भारत के लिए एक नया अध्याय शुरू हो गया है।


